जानिए मकर संक्रांति का मतलब इस दिन क्यों करते हैं दान |
मकर संक्रान्ति (मकर संक्रांति) भारत का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रांति (संक्रान्ति) पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहते हैं, यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन से ही भगवान का दिन 6 माह के लिए शुरू हो जाता है. माना जाता है कि मकर संक्रांति को सूर्य दक्षिणायन से निकलकर उत्तरायण होते हैं. इसलिए इसे देवताओं का दिन कहा जाता है. इसके अलावा इस तारीख से दिन बड़े और रातें छोटी होने लग जाती हैं.
बता दें कि मकर संक्रांति के दिन से शुभ कार्य भी शुरू हो जाते हैं. साथ ही इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और उसके बाद दान करने का विशेष महत्व माना जाता है. दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख शांति के साथ ही काफी फलदायी भी होता है.
ये है मकर संक्रांति का मतलब
शास्त्रों के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का संहार किया था, इस दौरान जितने समय में पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाती है, उसे सौर वर्ष कहते हैं. साथ ही धरती का गोलाई में सूर्य के चारों ओर घूमना ‘क्रान्ति चक्र’ कहा जाता है. इसके अलावा पृथ्वी का एक राशि से दूसरी में प्रवेश करना ‘संक्रान्ति ’कह जाता है. आखिरी में जब पृथ्वी मकर राशि में जाती है तो इसे मकर संक्रान्ति कह जाता है.
पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।
तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहते हैं, यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है।
आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में चलने वाली सर्द हवाओं से लोगो को अनेक प्रकार की बीमारिया हो जाती है, इसलिए प्रसाद के रूप में खिचड़ी, तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने का प्रचलन है। तिल और गुड़ से बनी हुई मिठाई खाने से शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। इन सभी चीजों के सेवन से शरीर के अंदर गर्मी बढ़ती है। तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक चौथाई कप या 36 ग्राम तिल के बीज से 206 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। यह गठिया रोग के लिए अत्यंत लाभकारी है|
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