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मंगलवार, 8 मार्च 2022

AM और PM शब्द की उत्पत्ति के पीछे है ये अनोखा तथ्य, जानें इसका ज्योतिषीय महत्व

AM और PM शब्द की उत्पत्ति के पीछे है ये अनोखा तथ्य, जानें इसका ज्योतिषीय महत्व

AM और PM शब्द की उत्पत्ति के पीछे है ये अनोखा तथ्य, जानें इसका ज्योतिषीय महत्व
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हम सब आज के आधुनिक युग में जब भी किसी को समय बताते हैं तो उसके आगे AM और PM को लगाते हैं। कई स्मार्ट फ़ोन या घड़ियों में तो समय के नंबर के आगे स्वयं ही AM और PM लगा हुआ दिखाई देता है। परंतु क्या आपके मन में कभी AM और PM के अर्थ और उसकी उत्पत्ति को लेकर कोई सवाल आया है? जब हम दूसरों से पूछेंगे तो अक्सर लोग AM का अर्थ पूर्वाह्न (सुबह) जबकि PM का अर्थ है मध्याह्न के बाद का समय बताएंगे। जो काफी हद तक सही भी है। 

असल में एक दिन का आकलन कुल 24 होरा अर्थात 24 घंटों में किया जाता है। इसके साथ ही एक पूरे दिन को समय के अनुसार दो पहरों में विभाजित किया गया है। इन्हीं पहरों में से AM का अर्थ है मध्याह्न से पहले अर्थात प्रथम पहर और PM का अर्थ है मध्याह्न के बाद अर्थात दूसरी पहर। काल के अनुसार इन दोनों पहरों की अवधि 12-12 घंटों में विभाजित की गई हैं। ऐसे में एक पहर 12 घंटे के चलते AM और PM 12-12 घंटे के हो जाते हैं। 

बदलते दौर में बदलते गए समय को मापने के पैमाने    

काल और बदलती परिस्थितियों के अनुसार आज के युग में समय को मापने के पैमानों में भी काफी बदलाव आ चूका है। आधुनिक युग से आज वैज्ञानिक दौर के नवीनतम आविष्कारों का इस्तेमाल कर मनुष्य ने यूँ तो क्रिस्टल घड़ी से लेकर सबसे सटीक समय बताने वाली घड़ी “परमाणु घड़ी” तक की खोज कर ली है। परंतु आज सबसे सरल भाषा में जब भी हम समय को व्यक्त करते हैं तो प्रायः एएम और पीएम शब्दों का प्रयोग ज़रूर करते हैं। इसमें जहाँ दोपहर से पहले हम AM तो वहीं दोपहर के बाद के समय के लिए PM शब्द का प्रयोग होता है। 


AM और PM का पौराणिक व ज्योतिषीय महत्व

आधुनिक समय में भले ही मनुष्य के पास कलाई घड़ी से लेकर फ़ोन घड़ी तक उपलब्ध हो गई हो। लेकिन प्राचीन काल में मनुष्य समय की गणना सूर्य की बदलती स्थितियों से करते थे। अब सवाल ये उठता है कि दिन में सूर्य को देखा जा सकता है, लेकिन रात्र में सूर्य नहीं दिखाई देता। तो इस स्थिति में समय का आकलन कैसे किया जाता होगा?

दरअसल रात्रि में समय का पता लगाने के लिए तारों की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। विशेषज्ञों की मानें तो सूर्य की स्थिति से ही असल में AM (एएम) और PM (पीएम) शब्दों की उत्पत्ति हुई है। 

माना जाता है कि दोपहर के समय जब सूर्य की स्थिति ठीक हमारे सिर के ऊपर होती है, इस दौरान हम उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर आकाश में एक काल्पनिक रेखा बनाते हैं और इस रेखा को मेरिडियन कहते हैं। ऐसे में जब सूर्य रेखा पर होता है तब उस समय को दोपहर का समय मान लिया जाता है। इसके अलावा सूर्य जब इस रेखा के पूर्व की ओर स्थित होता है तो वो समय दोपहर से पहले का समय अर्थात सुबह का समय माना जाता है। जबकि सूर्य इस रेखा से पश्चिम की ओर चला जाता है तो उस समय को दोपहर के बाद का समय मान लिया जाता है। 


कैसे हुई AM और PM शब्द की उत्पत्ति और क्या है इसका अर्थ ?

अब अगर AM और PM शब्दों की उत्पत्ति की बात करें तो, एएम(AM) शब्द एंटी मेरिडियन का, जबकि पीएम (PM) शब्द पोस्ट मेरिडियन का संक्षिप्त रूप है। इसमें मेरिडियन शब्द लैटिन भाषा के मेरीडीज शब्द से मिलकर बना है, जिसका असल में अर्थ होता है दिन का मध्य। ऐसे में दोपहर से पहले एएम शब्द को लिया गया। इस दौरान सूर्य मेरिडियन रेखा के पूर्व की ओर होने के कारण इस समय को दोपहर से पहले का समय माना गया है। जिसे हम आज सरल भाषा में एएम (AM) शब्द में व्यक्त करते हैं। 

इसी तरह सूर्य जब मेरिडियन रेखा के पश्चिम की ओर होता है तो उस समय को दोपहर के बाद का समय मान लिया जाता है। जिसे हम सरल भाषा में पीएम शब्द यानी पोस्ट मेरिडियन में व्यक्त करते हैं। 

इन दोनों पहरों में हम देर रात के 12:00 बजे से दिन के 12:00 बजे तक के समय को पहला पहर मानकर उसे एएम शब्द से संबोधित करते हैं। जबकि दोपहर के 12:00 बजे से लेकर रात के 12:00 बजे तक के समय को दूसरा पहर मानकर हम उसे पीएम शब्द से संबोधित करते हैं। 


हिन्दू पंचांग और अंग्रेजी ईसवी कल के अनुसार अलग-अलग होती है समय की गणना 

वैदिक ज्योतिष गणना व हिन्दू पंचांग नियामक के अनुसार एक नया वार सूर्योदय से मान्य होता है तथा अंग्रेजी ईसवी काल गणना के अनुसार रात्रि 12:00 बजे से ही एक नया वार एवं एक नई तारीख परिवर्तित हो जाती है।

परंतु ज्योतिष में भारतीय पौराणिक गणना पद्धति से ही जातक के जन्म पत्र, जन्म काल, इष्टकाल आदि की गणना हेतु सूर्योदय के अनुसार ही वार प्रवृत्ति मान्य होती है। 

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