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शुक्रवार, 11 मार्च 2022

PujaTips एक गणेश मूर्ति परिपूर्ण जीवन का प्रतीक है जो महत्व के सिद्धांतों को सिखाती है

PujaTips एक गणेश मूर्ति परिपूर्ण जीवन का प्रतीक है जो महत्व के सिद्धांतों को सिखाती है

PujaTips एक गणेश मूर्ति परिपूर्ण जीवन का प्रतीक है जो महत्व के सिद्धांतों को सिखाती है
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अपने पूजा घर में गणेश जी की केवल एक ही मूर्ति रखें. दो या उससे ज्यादा गणेश जी रखने पर उनकी पत्नी रिद्धि-सिद्धि नाराज होती हैं. 

ज्ञान और बुद्धि के देवता गणेशजी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य है। वे गणाधिपति हैं जिन्हें किसी दूसरे का आदेश मानने की मजबूरी नहीं। ये ऐसे देवता हैं जो हर प्रसंग में जीवन को शुभ-लाभ की दिशा देते हैं। वे विघ्नहर्ता हैं, मार्ग की सारी अड़चनों को दूर करने वाले। श्री गणेश की प्रतिमा लाने से पूर्व या घर में स्थापना से पूर्व यह सवाल सामने आता है कि श्री गणेशजी की सूंड किस तरफ होनी चाहिए ?क्या कभी आपने ध्यान दिया है कि भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में उनकी सूंड दाईं या कुछ में बाईं ओर होती है। सीधी सूंड वाले भगवान गणेश दुर्लभ हैं। इनकी एक तरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है। भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप भी दो प्रकार के हैं। कुछ प्रतिमाओं में गणेशजी की सूंड बाईं ओर घूमी  हुई होती है तो कुछ में दाईं ओर। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं  में सूर्य का प्रभाव माना गया है। गणेश जी की सीधी सूंड तीनों तरफ से दिखती है। आप पूजा के स्थान पर अपने बाएँ हाथ की और यदि गणेश जी की प्रतिमा रखते है तो आप की कुंडली में चंद्रमा को बल मिलता है | जिससे आप के रुके और विचाराधीन कार्य जल्दी ही पुरे होते है | ये तो medical में भी नाड़ी को माना जाता है | सूर्य नाड़ी और चन्द्र नाड़ी जो की मनुष्य का आधार है |

दाईं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी

दाईं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं। आमतौर पर ऐसी प्रतिमा घर और ऑफिस में नहीं रखी जाती। इनको स्थापित करने पर कई धार्मिक रीतियों का पालन करना ज़रूरी होता है । ऐसी प्रतिमा को देवालयों में स्थापित करके वहीं उनकी पूजा की जाती है। ऐसे गणेशजी का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। दायीं ओर घूमी  हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है व शुभ फल प्राप्त होता है।

बाईं सूंड वाले गणेशजी

सिंहासन पर बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा जिनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी  होती है, पूजा घर में रखी जानी चाहिए। इनकी पूजा से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है। ऐसी मूर्ति  की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे  शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली। घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। यहां बायीं ओर घूमी  हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए। बायीं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं। इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है। घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्नविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती है।इससे घर में पॉजीटिव एनर्जी रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है।

सीधी सूंड वाले गणेशजी

सीधी सूंड वाली मूर्ति की आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। अक्सर संत समाज ऐसी ही मूर्ति की आराधना करता है। 

घर में गणेश जी की मूर्ति कहाँ लगाएं?

घर में गणेश की मूर्ति रखने के लिए पश्चिम, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा सबसे अच्छी जगह है। याद रखें, सभी गणेश प्रतिमाओं का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान शिव रहते हैं। आप गणेश मूर्ति को मुख्य द्वार पर अंदर की ओर मुख करके भी रख सकते हैं। यदि आप गणेश जी की प्रतिमा लगा रहे हैं तो उसका मुख घर के मुख्य द्वार की ओर होना चाहिए। गणेश जी की मूर्ति को दक्षिण दिशा में न रखें।

गणेशजी की मूर्ति रखने के लिए इन जगहों से बचें

गणेश मूर्ति को बेडरूम, गैरेज या लॉन्ड्री एरिया में नहीं रखना चाहिए। इसे सीढ़ियों के नीचे या बाथरूम के पास नहीं रखना चाहिए। चूंकि गैरेज या कार पार्किंग क्षेत्र को खाली क्षेत्र माना जाता है, इसलिए घर के इस हिस्से में किसी देवता को रखना अशुभ होता है। साथ ही, सीढ़ियों के नीचे बहुत सारी नकारात्मक ऊर्जाएं होती हैं जो किसी भी वास्तु वस्तु को रखने के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं।

घर के लिए कौन से रंग की गणेश मूर्ति अच्छी है?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, सफेद रंग की गणेश मूर्ति उन लोगों के लिए सही विकल्प है जो शांति और समृद्धि चाहते हैं। आप सफेद गणेश चित्र भी चुन सकते हैं। जो लोग आत्म-विकास के इच्छुक हैं, उन्हें सिंदूर रंग की गणेश मूर्ति का चुनाव करना चाहिए। यह भी देखें: घर पर तुलसी के पौधे के लिए वास्तु

किस प्रकार की गणेश मूर्ति घर के लिए अच्छी है?

आसन

आदर्श रूप से, ललितासन में गणेश की छवि या मूर्ति को सबसे अच्छा माना जाता है। इसे बैठे हुए गणेश के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह की स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है शांत और शांति। इसके अलावा, लेटने की स्थिति में गणेश तस्वीरें भी बहुत भाग्यशाली मानी जाती हैं क्योंकि यह विलासिता, आराम और धन का प्रतिनिधित्व करती है।

वास्तु के अनुसार, गणेश की मूर्ति की सूंड बाईं ओर झुकी होनी चाहिए, क्योंकि यह सफलता और सकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसा माना जाता है कि दाईं ओर झुकी हुई सूंड एक कठिन-से-खुशी वाले रवैये का प्रतिनिधित्व करती है।

मोदक 

अपने घर के लिए गणपति की तस्वीर या मूर्ति खरीदते समय, सुनिश्चित करें कि मोदक और चूहा संरचना का हिस्सा हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि चूहे को उनका वाहन माना जाता है जबकि मोदक को उनकी पसंदीदा मिठाई माना जाता है। यह भी देखें: हाथी की मूर्तियों का उपयोग करके धन और सौभाग्य लाने के उपाय

एक गणेश मूर्ति परिपूर्ण जीवन का प्रतीक है जो महत्व के सिद्धांतों को सिखाती है जैसे:

बड़ा सोचने के लिए बड़ा सिर।

बड़े कान ध्यान से सुनने के लिए।

ध्यान केंद्रित करने के लिए छोटी आंखें।

कम बोलने के लिए छोटा मुँह।

केवल अच्छाई बनाए रखने के लिए एक दांत।

अनुकूलनीय रहने के लिए एक लंबी सूंड।

अच्छा और बुरा पचाने के लिए बड़ा पेट।

गणेश का मुख किस दिशा में होना चाहिए

गणपति की मूर्तियों या छवियों को आदर्श रूप से उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व या पश्चिम दिशा में रखा जाना चाहिए, अधिमानतः उत्तर की ओर।

भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप के भी कई भेद हैं। कुछ मूर्तियों में गणेशजी की सूंड को बाई को घुमा हुआ दर्शाया जाता है तो कुछ में दाई ओर। गणेश की अधिकतर मूर्तियां सीधी या उत्तर की ओर सूंड वाली होती हैं। मान्यता है कि गणेश की मूर्ति जब भी दक्षिण की ओर मुड़ी हुई बनाई जाती है तो वह टूट जाती है। कहा जाता है कि यदि संयोगवश आपको दक्षिणावर्ती मूर्त मिल जाए और उसकी विधिवत उपासना की जाए तो अभिष्ट फल मिलते हैं। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है।

इसका है प्रभाव

प्राय: गणेश की सीधी सूंड तीन दिशाओं से दिखती है। जब सूंड दाईं ओर घूमी होती है तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य से प्रभावित माना गया है। ऐसी प्रतिमा का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। वहीं बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्त को इड़ा नाड़ी व चंद्र प्रभावित माना गया है। ऐसी मूर्त की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली।सीधी सूंड वाली मूर्त का सुषुम्रा स्वर माना जाता है और इनकी आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। संत समाज ऐसी मूर्त की ही आराधना करता है। सिद्धि विनायक मंदिर में दाईं ओर सूंड वाली मूर्त है इसीलिए इस मंदिर की आस्था और आय आज शिखर पर है।

श्री गणेश के सूंड का महत्व, किस तरफ होनी चाहिए दाईं या बाईं सूंड

दाई ओर घुमी सूंड के गणेशजी शुभ होते हैं तो कुछ का मानना है कि बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ फल प्रदान करते हैं। हालांकि कुछ विद्वान दोनों ही प्रकार की सूंड वाले गणेशजी का अलग-अलग महत्व बताते हैं। यदि गणेशजी की स्थापना घर में करनी हो तो दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं। दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है। शुभ फल प्रदान करता है। इससे घर में पॉजीटिव एनर्जी रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है।

घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। यहां बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए। बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं। इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है। घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्वविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती।


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