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मंगलवार, 12 अप्रैल 2022

Hanuman Jayanti 2022 पर बनने वाले विशेष योग हनुमान जयंती पूजा विधि महत्व और राशि अनुसार हनुमान जी का भोग

Hanuman Jayanti 2022 पर बनने वाले विशेष योग हनुमान जयंती पूजा विधि महत्व और राशि अनुसार हनुमान जी का भोग

Hanuman Jayanti 2022 पर बनने वाले विशेष योग हनुमान जयंती पूजा विधि महत्व और राशि अनुसार हनुमान जी का भोग
Hanuman Jayanti 2022 पर बनने वाले विशेष योग हनुमान जयंती पूजा विधि महत्व और राशि अनुसार हनुमान जी का भोग


चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। वहीं चैत्र पूर्णिमा का पवनपुत्र हनुमान जी से भी एक विशेष संबंध है। मान्यता है कि इस तिथि यानि पूर्णिमा तिथि को ही संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इसी कारण हर साल चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती (जन्मोत्सव) होता है।

वायुपुराण में एक श्लोक वर्णित है- 

आश्विनस्या सितेपक्षे स्वात्यां भौमे च मारुतिः। 

मेष लग्ने जनागर्भात स्वयं जातो हरः शिवः।। 

यानी- भगवान हनुमान का जन्म कृष्ण पक्ष चतुर्दशी मंगलवार को स्वाति नक्षत्र की मेष लग्न और तुला राशि में हुआ था. 

हनुमान जी बाल्यकाल से ही तरह-तरह की लीलाएं करते थे. एक दिन उन्हें ज्यादा भूख लगी तो सूर्य को मधुर फल समझकर अपने मुंह में भर लिया. जिसके कारण पूरे संसार में अंधेरा छा गया. इसे विपत्ति समझकर इंद्र भगवान ने हनुमान जी पर व्रज से प्रहार किया. इसके प्रभाव से उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई. यही वजह है कि इनका नाम हनुमान पड़ा.

पौराणिक कथा

अंजना एक अप्सरा थीं, हालाँकि उन्होंने श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और यह श्राप उनपर तभी हट सकता था जब वे एक संतान को जन्म देतीं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री हनुमान जी के पिताथे। वे सुमेरू के राजा थे और केसरी बृहस्पति के पुत्र थे। अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप उन्होंने संतान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया। ऐसा विश्वसा है कि हनुमानजी भगवान शिव के ही अवतार हैं।

16 अप्रैल को हनुमान जयंती मनाई जाएगी। इस दिन हनुमान जी की पूजा- अर्चना करने का विधान है। हनुमान जी की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व…

चैत्र पूर्णिमा का पंचांग

सूर्योदय: सुबह 05:55:12 बजे

सूर्यास्त: शाम 06:47:48 बजे

चंद्रोदय: शाम 06:27:24 बजे

चंद्रास्त: चंद्रास्त नहीं

राहुकाल: सुबह 09:08 बजे से सुबह 10:45 बजे तक

भद्रा: सुबह 05:55 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक

हनुमान जन्मोत्सव के दिन ऐसे करें हनुमान जी की पूजा

चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुबह स्नान और दान के बाद श्रीराम भक्त हनुमान की पूजा करनी चाहिए। इस पूजा के दौरान श्री हनुमानजी को लाल लंगोट, सिंदूर, बूंदी के लड्डू, चमेली का फूल या तेल अवश्य चढ़ाना चाहिए। जिसके पश्चात हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। वहीं इस पूरे दिन हनुमान जी के प्रभावी मंत्रों का जाप करना विशेष माना जाता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती इस साल चैत्र पूर्णिमा 16 अप्रैल 2022, शनिवार को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस दिन शनिवार पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,  मंगलवार और शनिवार का दिन श्रीराम भक्त हनुमान जी को समर्पित माना गया है। हनुमान जयंती का पावन पर्व हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन बजरंगबली की विधि-विधान के साथ पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। जानिए हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त व बनने वाले शुभ योग-

हनुमान जयंती तिथि-

ज्योतिष पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 16 अप्रैल, शनिवार को देर रात 02 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी, जो कि 17 अप्रैल को सुबह 12 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में व्रत रखने का नियम होने के कारण हनुमान जयंती का त्योहार 16 अप्रैल को मनाया जाएगा।

इन शुभ योग में मनाई जाएगी हनुमान जयंती-

पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन रवि व हर्षण योग में मनाई जाएगी। हस्त व चित्रा नक्षत्र रहेगा। 16 अप्रैल को हस्त नक्षत्र सुबह 08 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से चित्रा नक्षत्र आरंभ होगा। साथ ही इस दिन रवि योग प्रात: सुबह 5 बजकर 55 मिनट से शुरु हो रहा है और इसका समापन 08:40 बजे हो रहा है। हर्षण योग 02:45 AM, अप्रैल 17 तक रहेगा।

हर्षण व रवि योग का महत्व-

हर्ष का अर्थ होता है खुशी, प्रसन्नता। ऐसे में इस योग में किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होने की मान्यता है। रवि योग को भी ज्योतिष शास्त्र में शुभ योगों में गिना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल मिलता है।

हनुमान जयंती पर होने वाले शुभ योग:

इस साल हनुमान जयंती रवि और हर्षण योग में मनाई जाएगी। इस दिन हस्त और चित्रा नक्षत्र रहेगा।आपको बता दें कि 16 अप्रैल को हस्त नक्षत्र सुबह 08:40 बजे तक है, उसके बाद से चित्रा नक्षत्र आरंभ होगा। साथ ही इस दिन रवि योग प्रात: 05:55 बजे से शुरु हो रहा है और इसका समापन 08:40 बजे हो रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल मिलता है।

राशि अनुसार हनुमान जी का भोग


मेष: इस राशि के जातकों को हनुमान जी को बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए। 

वृष: वृष राशि वालों को हनुमान जयंती पर तुलसी बीज का भोग लगाना चाहिए। 

मिथुन: हनुमान जयंंती पर आपकी राशि के लोगों को पूजा के समय तुलसी का पत्ता अर्पित करना चाहिए।

कर्क: हनुमान की कृपा प्राप्त करने के लिए गाय के घी में बेसन का हलवा बनाएं और पूजा के समय भोग लगाएं। 

सिंह: इस राशि का स्वामी सूर्य है और हनुमान जी सूर्य देव के शिष्य हैं। ऐसे में हनुमान जयंती पर बजरंगबली को जलेबी का भोग लगाएं।

कन्या: इस राशि के जातकों को हनुमान जयंती पर बजरंगबली को चांदी का अर्क चढ़ाना चाहिए।

तुला: तुला राशि वाले लोग हनुमान जी को मोतीचूर यानी बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।

वृश्चिक: इस राशि के जातक बेसन के लड्डू का भोग हनुमान जी को लगाएं। गाय के घी में बेसन के लड्डू बनाकर चढ़ाएं।

धनु: हनुमान जयंंती पर धनु राशि के जातक बजरंगबली को बंदूी के लड्डू और तुलसी के पत्ते का भोग लगाएं।

मकर: आपको हनुमान जी के जन्मदिवस पर मोतीचूर का लड्डू अर्पित करना चाहिए। 

कुंभ: हनुमान जयंती पर बजरंगबली को सिंदूर का चोला अर्पित करें और लड्डू का भोग लगाएं।

मीन: इस राशि के जातकों को हनुमान जयंती पर पवनपुत्र को लौंग चढ़ाना चाहिए। 

हनुमान जयंती की आपको हार्दिक शुभकामनाएँ!

हनुमान जयंती की आपको हार्दिक शुभकामनाएँ!.

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