ज्योतिष के अनुसार, साल में दो बार खरमास लगता है. जब सूर्य मार्गी होते हुए बारह राशियों में एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करते हैं तो इस दौरान बृहस्पति के आधिपत्य वाली राशि धनु और मीन में जब सूर्य का प्रवेश होता है तो खरमास लगता है. इस तरह से मार्च माह में जब सूर्य मीन में प्रवेश करते हैं तब खरमास लगता है तो वहीं, दिसंबर में जब सूर्य धनु में प्रेवश करते हैं तब खरमास लगता है. इस समय सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्व माना जाता है. खासतौर पर जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हो उन्हें खरमास के दौरान सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिए.
खरमास में वर्जित मांगलिक कार्य:-
धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, खरमास को शुभ नहीं माना जाता है. इसलिए इस माह के दौरान कोई भी शुभ, मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है. इस दौरान हिंदू धर्म में बताए गए संस्कार, जैसे मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, नामकरण, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ, वधू प्रवेश, सगाई, विवाह आदि कोई भी कार्य नहीं किया जाता है.
सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से लगेगा खरमास
खरमास प्रारंभ
16 दिसंबर की रात 06:56 बजे सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से खरमास लग जायेगा. सूर्य के इस राशि परिवर्तन से खरमास यानी अशुद्ध मास का आरंभ हो जायेगा. सूर्य ही संक्रांति व लग्न के राजा माने जाते हैं.
खरमास समापन
14 जनवरी को देर रात 02:53 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से खरमास समाप्त हो जायेगा. रात्रि काल में राशि परिवर्तन होने से कारण इसका पुण्यकाल 15 जनवरी को मध्याह्न काल तक रहेगा. संक्रांति का स्नान-दान, खिचड़ी का त्योहार 15 को ही मनाया जायेगा. इस साल खरमास का प्रारंभ 16 दिसंबर से हो रहा है. इस दिन सूर्य की धनु संक्रांति पर है.
भगवान श्रीहरि की पूजा फलदायी :
सूर्य, गुरु की राशि धनु व मीन राशि में प्रवेश करता है, तो इससे गुरु का प्रभाव समाप्त हो जाता है. शुभ मांगलिक कार्यों के लिए गुरु का पूर्ण बली अवस्था में होना आवश्यक है. कहा जाता है कि इस दौरान सूर्य मलिन अवस्था में रहता है. इसलिए इस एक माह की अवधि में किसी भी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं.खरमास पूरे एक माह तक रहता है. खरमास में भगवान विष्णु की पूजा फलदायी होती हैं
खरमास पौष कृष्ण अष्टमी 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है. इसके साथ ही शुभ कार्यों, मांगलिक कार्यों पर महीने भर का विराम लग जायेगा. फिर नये साल में मध्यरात्रि के बाद सूर्य का राशि परिवर्तन होने से इसका पुण्यकाल अगले दिन 15 जनवरी को होगा. इस दिन से शुभ मांगलिक कार्य शुरू होंगे.
मकर संक्रांति
जिस दिन सूर्य देव के एक राशि से दूसरे राशि में स्थान बदलते हैं उस दिन को संक्रांति कहा जाता है. सूर्य देव दिसंबर महीने में धनु राशि में प्रवेश करेंगे. जिससे खरमास लगा रहा है. नए साल 2023 में सूर्य देव 14 जनवरी को धुन राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तो मकर संक्रांति पड़ेगी. मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने के बाद सूर्य पूजा करते हैं.
30 दिनों में न करें ये काम वरना होगा बड़ा नुकसान:-
– धर्म-शास्त्रों के अनुसार खरमास का महीना बहुत पवित्र महीना होता है. इस महीने में तामसिक भोजन जैसे- लहसुन-प्याज, नॉनवेज और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. इस पूरे महीने शाकाहारी भोजन ही करें.
– खरमास का महीना केवल पूजा-पाठ का महीना है. इस महीने में कोई भी शुभ कार्य जैसे- विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश, नए काम की शुरुआत आदि नहीं करना चाहिए. इस महीने में किए गए शुभ काम भी अशुभ फल देते हैं. इसलिए इस महीने में ये काम करने से बचना चाहिए.
– खरमास के दौरान तांबे के बर्तन में रखे भोजन या पानी का सेवन नहीं करना चाहिए. ये सेहतपर बुरा असर डालता है.
– खरमास में नया घर खरीदने या घर का निर्माण कार्य शुरू करने की भी मनाही की गई है. कहा जाता है कि इस समय में खरीदे या बनाए गए घर में रहने से जीवन में सुख-समृद्धि नहीं रहती है.
– खरमास के दौरान गाड़ी, गहनें आदि कीमती चीजें भी नहीं खरीदें. वरना ये जल्दी खराब हो जाती हैं, या इनके चोरी आदि होने की गुंजाइश रहती है.
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