Rang-देव पंचमी का महत्त्व धन-वैभव के लिए शुभ मुहूर्त राशिनुसार रंग का प्रयोग
रंग पंचमी मुख्य रूप से पंच तत्व जैसे पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल एवं आकाश को सक्रिय करने के लिए मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन रंग खेलने से यह सभी देवी देवता प्रसन्न होते हैं तथा जातकों को सुख-समृद्धि एवं धन-वैभव का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। शास्त्रों के अनुसार रंग पंचमी का दिन देवताओं को समर्पित है इसलिए इसे देव पंचमी भी कहा जाता है।
देवताओं के रंगोत्सव में शामिल होने के कारण घर में धन-संपदा में वृद्धि होती है इसलिए कई जगहों पर इस त्योहार को श्री पंचमी भी कहा जाता है। रंग पंचमी के दिन होली की तरह ही गुलाल और पानी से होली खेली जाती है, कहते हैं ऐसा करने से देवता आकर्षित होते हैं और मनवांछित इच्छाओं को पूरा करते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस दिन शरीर पर रंग ना लगाकर उसे हवा में उड़ाया जाता है और जब रंग हवा में मिलते हैं तो एक ऐसा माहौल बन जाता है जिससे तमोगुण और रजोगुण का नाश हो जाता है और सतोगुण में वृद्धि होती है।
रंगों का पावन त्योहार होली दुनियाभर में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, और होली के ठीक पांच दिन बाद रंगपंचमी यानी देवताओं के साथ होली खेली जाती है। रंगपंचमी का त्योहार हर वर्ष होली के बाद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल रंग पंचमी 22 मार्च, 2022 को मनाई जाएगी। वैसे तो इस पर्व को देश के हर हिस्से में मनाया जाता है लेकिन इसकी सबसे ज़्यादा धूम राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, गुजरात और मध्यप्रदेश में देखने को मिलती है। इसके अलावा कई जगहों पर इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है जिससे जातकों पर माँ का ममतामयी आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।
रंग पंचमी का शुभ मुहूर्त
रंग पंचमी – मंगलवार, 22 मार्च, 2022
पंचमी तिथि शुरू – 22 मार्च 2022 को सुबह 06:26:32 बजे
पंचमी तिथि समाप्त – 23 मार्च 2022 को सुबह 04:24:06 बजे तक
शुभ मुहूर्त – 12:04:06 से 12:52:46 तक
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क्यों मनाई जाती हैं रंग पंचमी?
शास्त्रों में रंग पंचमी के त्यौहार का इतिहास काफी पुराना है। प्राचीन काल में होली का त्यौहार कई दिनों तक मनाया जाता था जो होलिका दहन के दिन से शुरू होकर रंगपंचमी के दिन समाप्त होता था और इस दिन के बाद रंग नहीं खेला जाता था। मान्यताओं के अनुसार इस दिन सच्चे मन से पूजा-पाठ करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। इस दिन की गई पूजा से कुंडली में मौजूद बड़े से बड़े दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
कैसे मनाते हैं रंग पंचमी?
रंग पंचमी के दिन लोग हवा में रंग और गुलाल उड़ा कर अपनी खुशियाँ मानते है, ऐसा करने से हवा में सकारात्मकता का संचार होता है। जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, व्यक्तित्व और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। साथ ही इससे बुरे कर्म और पाप आदि नष्ट होते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन श्री कृष्ण ने राधिका रानी के साथ होली खेली थी इसलिए इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी को भी रंग अर्पित किया जाता है। यदि कोई प्रेमी युगल इस दिन राधा-कृष्ण को रंग चढ़ाते हैं तो उनके जीवन में प्रेम गंगा हमेशा प्रवाहित रहती है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में इस दिन शोभा यात्रा भी निकाली जाती है।
रंग पंचमी के दिन किस देवी-देवताओं को लगाएं कौन सा रंग
रंग पंचमी के दिन भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु को पीला रंग अर्पित कर सकते हैं। भगवान कृष्ण को और भगवान विष्णु को पीला रंग बेहद प्रिय होता है। ऐसे में उन्हें पीले रंग के वस्त्र पहनाएं और उनके चरणों में पीले रंग का अबीर अर्पित करें।
माँ लक्ष्मी, बजरंगबली और भैरव महाराज को लाल रंग अर्पित करें।
माँ बगलामुखी को पीले रंग का अबीर अर्पित करें।
सूर्यदेव को लाल रंग चढ़ाएं या आप उन्हें सिन्दूर का अर्घ्य भी दे सकते हैं।
शनि देव को नीला रंग बेहद प्रिय होता है। ऐसे में इस दिन आप चाहे तो उन्हें नीला रंग लगाकर इस दिन की शुभकामनाएं दे सकते हैं।
रंग पंचमी पर माँ लक्ष्मी की पूजा से जातकों पर होगी धनवर्षा
रंग पंचमी की पूजा में माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कमल पर विराजमान तस्वीर अथवा प्रतिमा को एक साफ़ चौकी पर स्थापित करें।
तत्पश्चात एक कलश में शुद्ध जल भरकर माँ की प्रतिमा के आगे देसी घी का दीपक जलाएं।
माँ लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु को गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें और सच्ची भक्ति से उनका ध्यान करें।
पूजा के पश्चात माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को खीर, मिश्री, श्रीखंड और गुड़-चने का भोग लगाएं।
पूजा में “ॐ श्रीं श्रीये नमः” मंत्र का जप करें।
विधिपूर्वक आरती के बाद कलश में रखे जल को पूरे घर में छिडकें। ऐसा कहा जाता है कि जल की बूंदे जहाँ-जहाँ गिरती हैं, वहां-वहां माँ लक्ष्मी का वास होता है और जहाँ माँ लक्ष्मी वास करती है वहां सदैव सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रहता है।
रंग पंचमी के दिन मां लक्ष्मी की भक्तिपूर्वक आराधना करने से व्यक्ति को कभी भी आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।
जातकों को रंग पंचमी के दिन पूजा प्रारंभ करने से पहले नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी और गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए।
इसके अलावा रंग पंचमी के दिन पूजा के बाद नारियल पर सिंदूर डालकर इसे महादेव को अर्पित करने की भी मान्यता है।
रंग पंचमी के दिन राशिनुसार करें इस रंग का प्रयोग
मेष राशि – मेष राशि के जातकों को इस दिन लाल, नारंगी और पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए।
वृषभ राशि – वृषभ राशि के जातकों के लिए नीला, काला और हरा रंग विशेष रूप से फलदायी रहेगा।
मिथुन राशि – इस दिन हरा रंग आपके लिए शुभ रहेगा, इसका प्रयोग करने से आप तनाव मुक्त रहेंगे।
कर्क राशि – कर्क राशि के जातकों के लिए इस चन्द्रमा का रंग यानी क्रीम कलर शुभ साबित होगा। यह आपके परेशान मन का शांति प्रदान करेगा।
सिंह राशि – सिंह राशि के जातकों के लिए नारंगी, गुलाबी, लाल और पीले रंग के सभी शेड्स लकी रहेंगे। यह रंग आपके दिन को खुशनुमा बनाएंगे।
कन्या राशि – कन्या राशि के जातकों को इस दिन गहरे रंग का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। यह आपकी ऊर्जा को बढ़ाने वाला एवं आपको सम्पन्नता प्रदान करेगा।
तुला राशि – इस दिन नीला, सफ़ेद और हरा रंग आपके लिए लाभकारी रहेगा। इस दिन इन रंगों का प्रयोग आपकी ऊर्जा शक्ति को बढ़ाएगा।
वृश्चिक राशि – आपके लिए शुभ रंग लाल है यह आपको हर कार्य में सफलता प्रदान करने वाला सिद्ध होगा।
धनु राशि – आपके लिए पीले और लाल रंग का प्रयोग करना सर्वोत्तम है। यह आपको आपके विचारों को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
मकर राशि – आपके लिए बैंगनी, नीला और काला रंग शुभ रहेंगे।
कुंभ राशि – काला और नीला रंग आपके लिए लकी रहेंगे। इनका प्रयोग आपके जीवन की परेशानी का अंत करेगा।
मीन राशि – लाल और पीला रंग आपको भक्ति के मार्ग पर बढ़ने में मदद करेगा।
महाराष्ट्र की रंग पंचमी
महाराष्ट्र में होली यानी धुलंडी से लेकर पंचमी तिथि तक रंग खेलने की परंपरा है। इस दिन रंग खेलने के लिए गुलाल या अबीर का प्रयोग किया जाता है। इस विशेष दिन पर भोजन में मीठे पकवान बनाए जाते हैं जिसमें पूरनपोली का विशेष महत्त्व होता है। मछुआरों के लिए भी यह दिन बेहद खास होता है। वह इस दिन नाचते, गाते और खूब मस्ती करते हैं। रंग पंचमी के दिन जगह-जगह पर दही-हांडी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं, इस दौरान महिलाएं मटकी फोड़ने वालों पर रंग फेंकती हैं और अंत में जो व्यक्ति मटकी फोड़ने में सफल होता है उसे पुरस्कार दिया जाता है।
राजस्थान में रंग पंचमी
राजस्थान के जैसलमेर में खासतौर पर रंग पंचमी का यह त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन जैसलमेर के मंदिरों में लोकनृत्यों में डूबा वातावरण देखने को मिलता है।
इंदौर में रंग पंचमी
मध्यप्रदेश के इंदौर में रंग पंचमी को पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन पूरे शहर में धूम-धाम से गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला जाता है और लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं। इस जुलूस को वहां के स्थानीय लोग “गेर” कहते हैं। इस जुलूस में सभी धर्म व जाति के लोग हिस्सा लेते हैं। पूरा इंदौर इस दिन अलग-अलग रंगों में रंगा नजर आता है।
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