अप्रैल के सप्ताह के व्रत और त्योहार जाने कब है संकष्टी चतुर्थी, कालाष्टमी व्रत
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| अप्रैल के सप्ताह के व्रत और त्योहार जाने कब है संकष्टी चतुर्थी, कालाष्टमी व्रत |
आज 17 अप्रैल दिन रविवार है. अप्रैल का तीसरा सप्ताह प्रारंभ हो रहा है. इस सप्ताह में भी कुछ व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं. आइए जानते हैं कि ये व्रत एवं त्योहार कब और किस दिन हैं, ताकि आप पहले से इसकी तैयारी कर लें.
जाने कब है संकष्टी चतुर्थी, कालाष्टमी व्रत? पढ़े अप्रैल के सप्ताह के व्रत और त्योहार
आज 17 अप्रैल दिन रविवार है. अप्रैल का तीसरा सप्ताह प्रारंभ हो रहा है. इस सप्ताह में भी कुछ व्रत एवं त्योहार आने वाले हैं. इसमें ईस्टर, हिन्दू कैलेंडर का दूसरा माह वैशाख का प्रारंभ, विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत और मासिक कालाष्टमी व्रत आने वाला हैं. इस सप्ताह में भगवान श्रीगणेश और काल भैरव की पूजा का अवसर मिलेगा. आइए जानते हैं कि ये व्रत एवं त्योहार कब और किस दिन हैं, ताकि आप पहले से इसकी तैयारी कर लें.
अप्रैल 2022 तीसरे सप्ताह के व्रत एवं त्योहार:
17 अप्रैल, दिन: रविवार: वैशाख माह की शुरुआत, ईस्टर
वैशाख 2022: हिंदू कैलेंडर का दूसरा माह वैशाख 17 अप्रैल से शुरु होगा. इसमें कृष्ण पक्ष का प्रारंभ होगा. इस माह में भगवान विष्णु और गंगा की पूजा करने का विधान है. ऐसा करने से पुण्य लाभ होता है.
ईस्टर 2022: राजद्रोह के आरोप में जब गुड फ्राइडे को ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था, उसके तीसरे दिन यानी संडे को वे फिर से जीवित हो गए थे. उनके दोबारा जीवित होने की खुशी में ईस्टर संडे मनाया जाता है. यह दिन उत्सव मनाने का है.
19 अप्रैल, दिन: मंगलवार: संकष्टी चतुर्थी व्रत
संकष्टी चतुर्थी 2022: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 19 अप्रैल दिन मंगलवार को है, इसलिए इस दिन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी. इस दिन गणेश जी की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है. जो लोग व्रत रखते हैं, वे चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करते हैं.
संकष्टी चतुर्थी वाले दिन गणेश पूजा के बाद रात में चंद्रमा की पूजा करते हैं और जल अर्पित करते हैं. चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही चतुर्थी व्रत पूर्ण होता है. विनायक चतुर्थी में चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित होता है क्योंकि इससे झूठा कलंक लगने का डर रहता है.
23 अप्रैल, दिन: शनिवार: कालाष्टमी व्रत
कालाष्टमी व्रत 2022: वैशाख माह का कालाष्टमी व्रत 23 अप्रैल दिन शनिवार को है. हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है. इस दिन रुद्रावतार काल भैरव की पूजा की जाती है. उनकी कृपा से डर, भय, भूत, प्रेत, रोग, दोष आदि का कोई डर नहीं रहता है.
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