Surya Gochar 15 June 2022 को मिथुन में गोचर करते ही 5 Rashiyion पर पड़ेगा शुभ-अशुभ प्रभाव
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| Surya Gochar 15 June 2022 को मिथुन में गोचर करते ही 5 Rashiyion पर पड़ेगा शुभ-अशुभ प्रभाव |
सूर्य देव जल्द ही अपना गोचर करते हुए राशिपरिवर्तन करेंगे। जल्द ही होने वाली संक्रांति की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि ।
15 जून को सूर्य बदलेंगे अपनी राशि, इन 5 राशियों पर पड़ सकता है अशुभ प्रभाव
वृषभ राशि
ग्रहों के अधिपति सूर्य वृष राशि के चतुर्थ भाव के स्वामी हैं और अब इस गोचर के दौरान सूर्य आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर करेंगे। आर्थिक दृष्टि से इस अवधि में आपकी आय में वृद्धि होने की संभावना अधिक रहेगी। ऐसे में अगर आप इस समय किसी संपत्ति या जमीन में कोई निवेश करते हैं तो आपको अच्छा लाभ मिलने के योग बनेंगे। यदि आप सरकारी क्षेत्र में कार्यरत हैं तो आपको सरकार और आपके उच्च अधिकारियों से किसी प्रकार का सहयोग और अच्छा लाभ मिलने की संभावना है।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए सूर्य दूसरे भाव का स्वामी है और अब यह ग्रह कर्क राशि के जातकों के बारहवें भाव में विराजमान है। सूर्य की यह गोचर स्थिति आपके लिए विदेश यात्रा पर जाने के योग बनाएगी। इसके अलावा इस समय आपके शत्रु कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहेंगे, लेकिन आप उन पर विजय पाने में पूरी तरह सफल होने वाले हैं। यदि कोर्ट में कोई मामला चल रहा है तो सूर्य के मिथुन राशि में गोचर के कारण उसका फैसला आपके पक्ष में आने की अधिक संभावना है।
सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य आपके लग्न भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान सूर्य आपकी राशि से एकादश भाव में अस्त होगा। सिंह राशि वालों के लिए सूर्य के गोचर की यह स्थिति वित्तीय जीवन में विभिन्न स्रोतों से लाभ प्राप्त करने की संभावना बनाएगी। इसके अलावा इस समय आपकी आमदनी में भी वृद्धि संभव है जिससे आपकी आर्थिक स्थिति तो बेहतर होगी ही साथ ही समाज में आपके मान सम्मान में भी वृद्धि होगी। वहीं प्रेम संबंधों के लिए भी समय अच्छा रहेगा। क्योंकि इस दौरान आप अपने रिश्ते में आ रही हर गलतफहमी को दूर करने में सफल रहेंगे। पारिवारिक जीवन में भी यह समय आपको मित्रों और प्रियजनों का पूरा सहयोग देगा। साथ ही कार्यक्षेत्र में नौकरीपेशा लोगों को अच्छा प्रमोशन मिलने से खुशी का अनुभव होगा।
कन्या राशि
सूर्य ग्रह कन्या राशि के बारहवें भाव का स्वामी है और अब मिथुन राशि में गोचर के दौरान यह आपकी राशि से दशम भाव में स्थित होगा। सूर्य का यह गोचर आपके कार्यक्षेत्र में भाग्य के साथ आपकी मदद करेगा। क्योंकि इस समय आपके करियर में आगे बढ़ने की प्रबल संभावना है। इस दौरान नौकरीपेशा जातक अपने कार्यस्थल पर भी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने बॉस या अधिकारियों से अच्छा प्रमोशन मिलेगा।
मकर राशि
सूर्य ग्रह मकर राशि के जातकों के अष्टम भाव का स्वामी है और अब यह गोचर के दौरान आपकी राशि से छठे भाव में होगा। यह गोचर आपको पहले से अधिक ऊर्जावान बनाएगा, जिसके फलस्वरूप आप कार्यक्षेत्र में सभी कार्यों को शीघ्रता से करते नजर आएंगे। हालांकि, आपकी चपलता और गति को देखकर आपके अन्य सहकर्मी आपसे कुछ नाराज हो सकते हैं। ऐसे में आपको विशेष रूप से सलाह दी जाती है कि कार्यक्षेत्र में अपने साहस और आत्मविश्वास को बनाए रखें और किसी भी तरह के नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी न होने दें। अब बात करें आपके आर्थिक जीवन की तो अगर आपने कोई कर्ज या कर्ज लिया था तो इस अवधि में आप उसे चुकाने में सक्षम होने वाले हैं। वहीं जिन लोगों का कोर्ट में केस चल रहा था तो भगवान सूर्य की कृपा से उसका फैसला भी आपके पक्ष में आता दिख रहा है।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य उनके छठे भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान ग्रह अब आपकी राशि से चतुर्थ भाव में विराजमान होगा। कार्यक्षेत्र की बात करें तो इस समय आपको पेशेवर मोर्चे पर कुछ समस्याओं से जूझना पड़ेगा। लेकिन आप अपनी मेहनत और सूझबूझ से इन सभी समस्याओं का सामना करने में भी सफल होने वाले हैं। इसके अलावा सूर्य देव का यह गोचर कई लोगों को भूमि, भवन आदि से अच्छा लाभ दिलाएगा। वहीं नौकरीपेशा जातकों के लिए जो अपनी वर्तमान नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल रहने वाला है। इस दौरान आपके कार्यक्षेत्र से संबंधित स्थान का अच्छा परिवर्तन होने की संभावना रहेगी।
15 जून को सूर्य करेंगे मिथुन में गोचर
वर्ष 2022 में सूर्य देव 15 जून, बुधवार के दिन शुक्र की वृषभ राशि से निकलकर बुध की मिथुन राशि में विराजमान हो जाएंगे। ऐसे में देशभर में इसे मिथुन संक्रांति के रूप में मनाया जाएगा। समस्त संक्रांतियों में से मिथुन संक्रांति के दिन खासतौर से सूर्यदेव की पूजा-अर्चना किये जाने का महत्व है। विशेषकर हिन्दू धर्म में इस दिन को एक पवित्र पर्व की भांति मनाया जाता है। क्योंकि मान्यता अनुसार इसी दिन से वर्षा ऋतु की शुरूआत होती है, जिससे प्रकृति में कई बड़े बदलाव नज़र आने लगते हैं। कई राज्यों में मिथुन संक्रांति को रज पर्व के रूप में भी जाना जाता है। लोग इस पर्व पर भगवान सूर्य देव से प्रार्थना करते हुए अच्छी खेती और अच्छी बारिश की विनती करते हैं। इसके लिए उन्हें प्रसन्न करने हेतु व्रत, दान-पुण्य आदि कार्य किया जाता है। ।
गोचरकाल की समयावधि
हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष 2022 में मिथुन संक्रांति आषाढ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यानी 15 जून बुधवार को पड़ रही है। क्योंकि इसी दिन दोपहर 11:58 बजे पर सूर्यदेव अपना गोचर मिथुन राशि में करेंगे और सूर्य इस स्थिति में अगले माह की 16 जुलाई तक रहेगा। फिर इसके बाद पुनः अपना गोचर करते हुए वे चन्द्रमा की राशि कर्क में प्रवेश कर जाएगा।
मिथुन संक्रांति का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व
भारत के पूर्वी राज्य विशेषकर ओड़िसा के लोग मिथुन संक्रांति को एक पर्व की तरह मनाते हैं। इस दौरान वे सूर्यदेव से अच्छी फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में बारिश की मनोकामना करते हुए उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
जब 15 जून, बुधवार के दिन सूर्य मिथुन राशि में अपना गोचर करेंगे, तब समस्त नक्षत्रों में राशियों की दिशा में भी बदल आएगा। वातावरण के अनुसार इस बदलाव को बड़ा व महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वयं एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञों की मानें तो जब सूर्य देव कृतिका नक्षत्र से भ्रमण करते हुए रोहिणी नक्षत्र में आते हैं तो, उससे वर्षा ऋतु होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में 16 जून को ही सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में आ जाएंगे और फिर से रोहिणी से मृगशिरा में अपनी चाल शुरू कर देंगे।
मिथुन संक्रांति के बाद से ही भारत में वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है।
कई राज्यों में इस दिन सूर्यदेव की विधि-विधान अनुसार पूजा की जाती है। इस दौरान अपनी कुंडली में सूर्य ग्रह की शांति के लिए लोग स्नान, दान-पुण्य और यज्ञ का आयोजन भी करते हैं।
मिथुन संक्रांति को रज पर्व के रूप में मनाते हुए कई राज्यों में व्रत करने का विधान भी है।।
पौराणिक महत्वता के अनुसार इस दिन लोग सिलबट्टे की दूध और पानी से पूजा करने की सदियों पुरानी परंपरा भी निभाते हैं।
मिथुन में बनेगा बुधादित्य योग
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और बुध का किसी राशि में एकसाथ विराजमान होना या युति करना ही बुधादित्य योग का निर्माण करता है। मिथुन राशि में ये शुभ योग 2 जुलाई से 15 जुलाई तक बनेगा। जिसके परिणामस्वरूप खासतौर से मिथुन राशि के जातक अपने करियर को लेकर पहले से अधिक गंभीर नज़र आएंगे। इससे उनका अपने लक्ष्यों के प्रति रुझान साफ़ देखा जाएगा। साथ ही मिथुन राशि में इस योग का बनना कई जातकों को अपने किसी पुराने ऋण से निजात दिलाने का कार्य भी करेगा। वो जातक जो सरकारी क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन्हें अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।
मिथुन संक्रांति की पूजा-विधि
मिथुन संक्रांति पर सूर्यदेव के पूजन के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान-कर्म करें।
इसके पश्चात् साफ़ वस्त्र धारण करें और सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें लाल रोली, लाल फूल मिलाएं।
अब उगते हुए सूर्य के नग्न आंखों से दर्शन करते हुए, उन्हें नमस्कार करें और फिर उन्हें धूप-दीप आदि दिखाकर उनका पूजन करें।
सूर्य नमस्कार के बाद सूर्य देव को “ॐ घृणि सूर्याय नम:” मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य दें।
मिथुन संक्रांति के उपाय
मिथुन संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए।
संभव हो तो सुबह सूर्यदेव के किसी मंदिर में जाकर दान-पुण्य करें।
गरीब व जरूरतमंदों में हरे रंग की वस्तुओं का दान करना भी उचित रहेगा।
माना जाता है कि इस दिन पालक, मूंग की दाल, हरे रंग के वस्त्र व महिलाओं में चूड़ियों का दान करना अत्यंत शुभ सिद्ध होता है।
इस दिन व्रत करने से जातक को अपने दुखों से मुक्ति मिलती है।
ये भी माना जाता है कि सूर्यदेव को अर्घ्य देने वाले जल को जमीन पर न गिराते हुए, उस पवित्र जल को किसी बड़े तांबे के बर्तन में इकट्ठा कर लें और पूजा के बाद उस पवित्र जल को किसी वृक्ष की जड़ में डालना उत्तम होता है।
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