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शुक्रवार, 22 जुलाई 2022

वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित

वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित

वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित
वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित


आप जहाँ भी रहते हैं, वहाँ कहीं भी, किसी भी दिशा अथवा स्थान पर सेप्टिक टैंक होने से कैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं ? अगर वास्तु के अनुसार गलत हो तो बिना टैंक हटाए क्या उन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है ?।।

यदि हां तो क्यों और यदि नहीं तो क्यों ? इस विषय पर गम्भीरता से विचार करते हैं । आधुनिक समय में घर के अन्दर के मल-मूत्र एवं अवशिष्ट पदार्थों के निष्कासन हेतु सेप्टिक टैंक का निर्माण अत्यावश्यक है ।।

सेप्टिक टैंक निर्माण लोग अपनी सुविधानुसार कहीं भी कर देते हैं । फिर चाहे वो वास्तु के सिद्धान्तों के अनुरूप हो या न हो । लोगों को पता नहीं चलता परन्तु गलत स्थान और दिशा में इसके निर्माण से अन्यान्य कष्टों एवं परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।।

वास्तु के सिद्धांतों को यदि मानें तो यह गड्ढा सावधानी पूर्वक बनाया जाना चाहिए । क्योंकि इसमें किसी भी तरह की कमी तथा असंगतता अत्यधिक नकारात्मक ऊर्जा का सृजन करती है ।।

ऐसी उर्जा घर में रहने वालों को अनेक प्रकार से पीड़ा पहुंचाती है । साथ ही वायुमंडलीय प्रदूषण का कारण भी बनती है । वास्तु शास्त्र का मानना है कि सेप्टिक टैंक का निर्माण सावधानी पूर्वक करना चाहिए ।।

वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित
वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित


वास्तुशास्त्र में सेप्टिक टैंक के निर्माण हेतु कुछ नियम एवं निर्देश बताये गये हैं । जिनको ध्यान में रख करके ही सेप्टिक टैंक का निर्माण किया जाना चाहिए ।।

#1. वास्तुशास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक इस प्रकार बनवाना चाहिए कि इसका मुख कभी भी दक्षिण-पूर्व अर्थात अग्निकोण, दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैरित्य कोण अथवा उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण दिशा की ओर न हो ।।

#2. सेप्टिक टैंक के लिए सबसे उपयुक्त स्थान उत्तर-पश्चिम अर्थात वायव्य कोण की दिशा मानी गयी है । सेप्टिक टैंक की व्यवस्था इस प्रकार होना चाहिए कि उसके जल का निकास पूर्व दिशा की ओर हो तथा मल एवं अवशिष्ट पदार्थों का निष्कासन पश्चिम दिशा की ओर हो ।।

#3. सेप्टिक टैंक की लम्बाई पूर्व-पश्चिम दिशा की ओर तथा चैड़ाई उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर होनी चाहिए । इसका निर्माण जमीन के लेवल में किया जाना चाहिए तथा इसे घर के मुख्य दीवार अथवा कम्पाउन्ड वॉल से कुछ दूरी पर होना चाहिए ।।

#4. ऐसी व्यवस्था बनाएं कि टॉयलेट एवं स्नानागार की नाली के पाइप का निकास पश्चिम अथवा उत्तर-पश्चिम की ओर से हो । इसके विपरीत रसोईघर का जल-निकास पाइप पूर्व अथवा उत्तर की दिशा की ओर हो ।।

#5. जल निकास पाइप किसी भी परिस्थिति में घर के दक्षिणी भाग में नहीं होना चाहिए । यदि इस प्रकार का निर्माण किन्हीं कारणों से हो भी गया हो तो यह व्यवस्था बनायें कि कम से कम जल का निकास पूर्व अथवा उत्तर दिशा से हो ।।

#6. घर का गन्दा जल/मल उत्तर, पूर्व अथवा पश्चिम की ओर अवस्थित हो सकता है किन्त दक्षिण दिशा में इसका निकास वास्तु के दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जाता है ।।

वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित
वास्तु शास्त्र के अनुसार सेप्टिक टैंक कहां और कैसा होना चाहिए : जानिये उपाय सहित


वास्तुशास्त्र के अनुसार सम्पूर्ण भूखण्ड के 9 भाग का सिद्धांत  :-

यदि सम्पूर्ण उत्तरी भाग को 9 समान हिस्सों में विभाजित किया जाय तो सेप्टिक टैंक उत्तर-पश्चिम दिशा के तीसरे भाग में निर्मित की जानी चाहिए ।।

सेप्टिक टैंक को मुख्यतया सम्पूर्ण भूखण्ड को 9 गुणा 9 के कुल 81 ग्रिड में बांटकर सेप्टिक टैंक का स्थान निर्धारित करना चाहिए । इसी हिसाब से घर में सेप्टिक टैंक हेतु स्थान का चयन कर निर्माण करवाना चाहिए ।।

पूर्व दिशा सबसे शुद्ध एवं दैव दिशा मानी जाती है । इधर से ही जीवनदायिनी रश्मियों एवं ऊर्जाओं का घर में प्रवेश एवं प्रवाह होता है । अतः इस दिशा को सेप्टिक टैंक के लिए निषिद्ध माना गया है ।।

क्योंकि इसकी नकारात्मक ऊर्जा के कारण इस दिशा से सकारात्मक ऊर्जा एवं लाभदायक किरणों एवं तरंगों का प्रवेश एवं प्रवाह अवरुद्ध एवं प्रभावित होता है ।।

अतः वास्तु में इस दिशा को काफी महत्व दिया गया है तथा इसे दोषमुक्त रखने की बात कही गई है । इस कारण से इस दिशा में सेप्टिक टैंक होना बहुत बड़ा दोषपूर्ण माना गया है ।।

दक्षिण-पश्चिम घर का सर्वाधिक शान्त क्षेत्र होता है । गृहस्वामी के शयन कक्ष के लिए यह क्षेत्र सर्वथा उपयुक्त होता है । क्योंकि दिनभर के कार्य से थकान के उपरान्त यहां आराम एवं मानसिक शान्ति की अनुभूति होती है ।।

इस दिशा में सेप्टिक टैंक का निर्माण होने से अत्यधिक नकारात्मक ऊर्जा का सृजन होता है । जिसके कारण गृहस्वामी एवं उनकी पत्नी को घबराहट, बेचैनी, सिरदर्द एवं माइग्रेन के साथ-साथ अन्य कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।।

इस दिशा में सेप्टिक टैंक होने से सिरदर्द, घबराहट, बेचैनी आदि की समस्या हो सकती है । घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहने लगता है एवं दुर्घटना का भय सदैव बना रहता है ।।

घर के सदस्यों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति विकसित होने लगती है । पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े, मार-पीट, मुकदमेबाजी एवं व्यापार में नुकसान होने लगती है ।।

A. ईशान कोण को ब्रह्मस्थान भी कहा जाता है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ब्रह्मस्थान देवताओं का स्थान होता है । जहां हर प्रकार के देवी-देवताओं का वास माना जाता है तथा यहां पर वास्तुपुरुष की नाभि भी मानी जाती है ।।

B. नाभि जो कि शरीर का सर्वाधिक मर्म स्थान होता है । इसलिए यहां पर पूजा-पाठ के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की गतिविधि वर्जित है । वास्तु शास्त्र के अनुसार सम्पूर्ण भूभाग के 81 भागों में से एकदम मध्य के 9 भागों में किसी भी प्रकार का निर्माण सर्वथा वर्जित है ।।

C. यहाँ खुला स्थान होना चाहिए जिसे आँगन कहा जाता है । अतः यहां पर सेप्टिक टैंक का निर्माण निवासियों की पूर्ण बर्बादी का द्योतक बन जाती है ।।

D. ब्रह्मस्थान में सेप्टिक टैंक हो तो घर में सुख, शान्ति एवं समृद्धि का सर्वथा अभाव हो जाता है एवं अकारण घर में लड़ाई-झगडे़ तथा पड़ोसियों से मुकदमेबाजी आदि की संभावनायें बढ़ जाती हैं ।।

दोष और उपाय :-

1. घर के किसी सदस्य की हत्या अथवा अपहरण होने की संभावना बढ़ जाती हैं । घर के लोगों के स्वास्थ्य में असामान्य उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है । अकारण अपमान तथा मान-प्रतिष्ठा में कमी एवं संतानहीनता बढ़ जाती हैं ।।

2. गलत स्थान पर सेप्टिक टैंक बन गया हो तो सर्वोत्तम उपाय उसे वहाँ से हटाना ही है । फिर भी इन दोषों के कुछ उपाय कर सकते हैं । जैसे घर के उत्तर-पूर्व में फाउण्टेन अथवा फिश एक्वेरियम लगा सकते हैं ।।

3. घर के द्वार के बाहर बड़ा स्वास्तिक चिह्न बनाएं अथवा स्वास्तिक पिरामिड लगाएं । द्वार पर ओम अथवा त्रिशूल लगाएं साथ ही द्वार के बाहर एवं अन्दर गणेश जी के दो फोटो इस प्रकार लगाएं कि दोनों के पृष्ठ भाग एक-दूसरे से जुड़े हों ।।

4. घर के हर कमरे में पिरामिड रखें और घर के उत्तर-पश्चिम भाग में बांस का पौधा लगाने से भी इस दोष का निराकरण होता है । समय-समय पर घर में पूजा-पाठ तथा हवन आदि करवाते रहें ।।

5. घर के उत्तरी क्षेत्र में मनी प्लान्ट लगाएं । घर के उत्तरी एवं उत्तर-पश्चिमी दिशा में विन्ड चाइम लगाएं । गलत स्थान में सेप्टिक टैंक हो तो उसके चारों तरफ तांबे के तार से परगोला बनाकर दबा दें ।।

6. इसे तीन भागों में विभाजित किया जाता है । आदर्श रूप में जल पूर्व भाग में तथा मल एवं अवशिष्ट पश्चिमी भाग में जमा होना चाहिए ।।

सावधानीपूर्वक निर्माण :-

1. यदि जगह की कमी है तथा उचित स्थान पर सेप्टिक टैंक का निर्माण संभव नहीं है तो सेप्टिक टैंक पश्चिमी भाग के उत्तरी कोने पर बनवाया जाना वास्तु सम्मत माना गया है ।।

2. किन्तु सेप्टिक टैंक की घर के मुख्य दीवार अर्थात कम्पाउण्ड वॉल से दूरी (कम से कम 2 फीट) अवश्य होनी चाहिए । सेप्टिक टैंक का निर्माण भवन में प्लिंथ लेवल से ऊपर नहीं होना चाहिए ।।

3. इसका निर्माण ग्राउण्ड लेवल में करना सर्वोत्तम माना जाता है । भवन का गटर उत्तर, पूर्व अथवा पश्चिम में होना वास्तु सम्मत माना गया है । दक्षिण दिशा में इसकी स्थिति कदापि स्वीकार्य नहीं है ।।

4. वैसे लोग जो भवन के ऊपरी तलों पर रहते हैं, वे इस बात का ख्याल अवश्य रखें कि जल निकास पाइप दक्षिण-पश्चिम के कोने पर कदापि न हो ।।

5. यदि किसी कारण बस हो भी तो उससे जल का रिसाव तो बिल्कुल न हो । ऊपर के तलों से आने वाले पाइप दक्षिण-पश्चिम कोने पर बिलकुल नहीं होना चाहिए ।।

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