Breaking

✨ "विपरीत परिस्थितियां कुछ लोगों को तोड़ देती हैं, और कुछ लोगों को रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार करती हैं" — अक्षय जमदग्नि ... 🌟 "आपका भविष्य आपके आज के फैसलों पर निर्भर करता है, ग्रहों की चाल को अपने पुरुषार्थ से बदलें" ... 🚀 "वास्तु सुधारेगा परिवेश, और विचार बदलेंगे आपका भविष्य" ... 💎 "Astro Vastu Kosh: जहाँ ज्ञान, ऊर्जा और प्रेरणा मिलते हैं" ...

🕉️ Astro Vastu Kosh 🔱

ज्योतिष | वास्तु | अंक ज्योतिष

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

27+ वर्षों का अनुभव | वैदिक ज्योतिष | वास्तु परामर्श | अंक ज्योतिष

रविवार, 16 जनवरी 2022

कब है सरस्वती पूजा? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, Katha एवं महत्व

कब है सरस्वती पूजा? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व




बसंत पंचमी 2022


बसंत पंचमी पर्व तिथि व मुहूर्त 2022

बसंत पंचमी 2022

फरवरी

बसंत पंचमी 5 फरवरी 2022

पूजा मुहूर्त - 07:11 से 12:36 बजे तक

पंचमी तिथि का आरंभ - 03:46 बजे से (5 फरवरी 2022)

पंचमी तिथि समाप्त - 03:46 बजे (6 फरवरी 2022) तक


बसंत पंचमी हिन्दुओं का प्रसिद्ध पर्व है जो माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2022 में कब है बसंत पंचमी का पर्व? कब और कैसे करें सरस्वती पूजा? जानें 


बसंत पंचमी का त्यौहार हिन्दुओं का एक प्रसिद्ध त्यौहार है जो वसंत पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को प्रतिवर्ष अत्यंत धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। बसंत पंचमी में बसंत’ शब्द का अर्थ है वसंत और ‘पंचमी’ का अर्थ पांचवें दिन से है। इस दिन ज्ञान की देवी माता सरस्वती की आराधना करने की परंपरा है। बसंत पंचमी से ही भारत में वसंत ऋतु की शुरुआत होती है और इस दिन महिलाएं पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं।  

बसंत पंचमी 2022 की तिथि एवं मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी को माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है, जो प्रत्येक वर्ष जनवरी के अंत या फरवरी महीने के आरंभ में आती है। इसके अतिरिक्त वसंत पंचमी के दिन का निर्धारण पूर्वाहन काल के प्रचलन के आधार पर किया जाता है,सामान्य शब्दों में सूर्योदय और मध्य दिन के बीच की अवधि। अगर पूर्वाहन काल के दौरान पंचमी तिथि प्रबल होती है, तब वसंत पंचमी के उत्सव का आरंभ होता है।

बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व

बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन ही देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं, तब समस्त देवी-देवताओं ने माँ सरस्वती की स्तुति की थी। इस स्तुति से ही वेदों की ऋचाएं बनीं और उनसे वसंत राग का निर्माण हुआ। यही कारण है कि इस दिन को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। 
बसंत ऋतु  छः ऋतुओं में सर्वाधिक लोकप्रिय है और इस ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य मन को मोहित करता है। इस ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है। 
मान्यता है कि पति-पत्नी द्वारा बसन्त पंचमी के दिन भगवान कामदेव और देवी रति की षोडशोपचार पूजा करने से सुखी-वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है। 
शास्त्रों में बसंत पंचमी का वर्णन ऋषि पंचमी के नाम से मिलता है। इसके अतिरिक्त बसंत पंचमी को श्रीपंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।  

बसंत पंचमी पर संपन्न होने वाली पूजा

  • बसंत पंचमी का सनातन धर्म में अत्यधिक महत्व है और इस दिन पीले रंग के उपयोग को शुभ माना जाता है। इस दिन देवी सरस्वती सहित भगवान विष्णु, कामदेव एवं श्रीपंचमी का पूजन किया जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा करना विशेष रूप से फलदायी होता है, वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा इस प्रकार करें:
  • पूजा स्थान की साफ़-सफाई करने के बाद गंगा जल ऋषि पंचमी का छिड़काव करें। 
  • इसके पश्चात देवी सरस्वती की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। 
  • अब सर्वप्रथम विघ्नहर्ता गणेश का ध्यान करें और उसके पश्चात कलश की स्थापना करें। 
  • मां सरस्वती को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
  • इसके बाद देवी को रोली, चंदन, हल्दी, केसर, चंदन, पीले या सफेद रंग के पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
  • देवी सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सरस्वती स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। 
  • अब दोनों हाथ जोड़कर माता सरस्वती का ध्यान एवं उनसे प्रार्थना करें। 
  • अंत में देवी सरस्वती की आरती करें और उन्हें प्रसाद रूप में पीली मिठाई का भोग लगाएं। 

 
श्री पंचमी पूजा का महत्व

बसंत पंचमी के दिन धन-संपदा की देवी लक्ष्मी और जगत पालनहार श्रीविष्णु की पूजा का भी विधान है। इन दिन कई लोग माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की पूजा एक साथ करते हैं। सामान्य रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा व्यापारी वर्ग के लोग करते हैं, साथ ही इस दिन माँ लक्ष्मी के पूजन के साथ श्री सू्क्त का पाठ करना फलदायी सिद्ध होता है।

बसंत पंचमी से जुडी मान्यताएं

महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में नवविवाहित जोड़ों के लिए अपनी पहली बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनकर पूजा करने के लिए मंदिर जाना अनिवार्य होता है।
राजस्थान में एक प्रचलित प्रथा के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन भक्त चमेली की माला पहनते है।
इस त्यौहार को पंजाब में वसंत के मौसम के आरम्भ के रूप में मनाया जाता है। वहां सभी लोग वसंत पंचमी को पीली पगड़ी और पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन पंजाब में कई जगह पतंगबाजी भी की जाती है।

कहाँ मनाया जाता है बसंत पंचमी का पर्व?

बसंत पंचमी को बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक माना गया है जो ज्ञान एवं शिक्षा की देवी सरस्वती को समर्पित है। इस त्यौहार को देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्सों में धूमधाम एवं श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाता है। इस हिन्दू त्यौहार को नेपाल में भी अत्यधिक जोश के साथ मनाते हैं।

बसंत पंचमी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार,ब्रह्मा जी पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे और उन्हें अपने संसार में किसी कमी का आभास हुआ। इसके पश्चात उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर धरती पर छिड़का, तभी वहां श्वेत वर्ण वाली, हाथों में पुस्तक, माला और वीणा हाथ में लिए हुए देवी प्रकट हुईं। ब्रह्मा जी ने उन्हें सर्वप्रथम वाणी की देवी सरस्वती के नाम से पुकारा और समस्त जीवों को वाणी प्रदान करने के लिए कहा। उस दिन से ही माता सरस्वती ने अपनी वीणा के मधुर नाद से समस्त प्राणियों को वाणी प्रदान की।



🔮 Astro Vastu Kosh

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

📌 Daily Panchang | Vedic Astrology | Vastu Guidance | Spiritual Wisdom

💥 👨‍👩‍👧‍👦 आपके एक गलत फैसले का असर केवल आप पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ सकता है। 💥

🛑 सही समय, सही दिशा और सही निर्णय जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। कई बार जल्दबाज़ी, भ्रम या प्रतिकूल समय में लिया गया निर्णय आर्थिक, व्यावसायिक, पारिवारिक और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दैनिक कॉस्मिक एनर्जी (Cosmic Energy), ग्रहों के गोचर, राहुकाल और शुभ-अशुभ समय को समझना अत्यंत आवश्यक है।

🔮 २७+ वर्षों के अनुभव से तैयार सटीक वैदिक पंचांग, दैनिक राशिफल, गोचर विश्लेषण और ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रतिदिन सबसे पहले प्राप्त करने के लिए अभी जुड़ें:

• 🟢 WhatsApp Channel: रोज सुबह सटीक पंचांग, राशिफल और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अपडेट प्राप्त करें।
👉 यहाँ क्लिक करके Follow करें

• 👥 Facebook Page: दैनिक वैदिक ज्ञान, ज्योतिषीय विश्लेषण, राशिफल और विशेष आध्यात्मिक सामग्री के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Like करें

• 💼 LinkedIn: व्यावसायिक एवं रणनीतिक मार्गदर्शन, करियर काउंसिलिंग और कॉरपोरेट वास्तु विश्लेषण के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Connect करें

⚠️ व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श (Paid Consultation)

दैनिक राशिफल और गोचर केवल सामान्य संकेत प्रदान करते हैं, लेकिन आपके जीवन, करियर, व्यापार, धन, विवाह, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।

📿 २७+ वर्षों के अनुभव के साथ गहन, प्रामाणिक और व्यक्तिगत वैदिक ज्योतिषीय परामर्श हेतु:

✍️ Astro Vastu Kosh Newsletter

👉 अपनी ईमेल दर्ज करें और विशेष वैदिक ज्योतिषीय विश्लेषण, गहन लेख तथा परामर्श संबंधी अपडेट प्राप्त करें:
👉 परामर्श प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए यहाँ क्लिक करें


क्या आप अपनी कुंडली या घर का वास्तु दिखाना चाहते हैं?
हमारे Facebook Page से जुड़ें और अपनी समस्याओं का समाधान पाएं।

फेसबुक Page Join करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें