चैत्र नवरात्रि में माता के आने व जाने के वाहन एवं घट स्थापना का शुभ मुहूर्त-राशि अनुसार करें यह उपाय
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| चैत्र नवरात्रि में माता के आने व जाने के वाहन एवं घट स्थापना का शुभ मुहूर्त राशि अनुसार उपाय |
नवरात्रि शब्द के अर्थ की तो, नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ होता है नौ-रातें। ऐसे में नवरात्रि नौ दिनों तक चलने वाला एक भारतीय त्योहार है और इस दौरान नौ देवी (माँ दुर्गा के नौ रूपों) देवताओं की पूजा का विधान बताया गया है।
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल से प्रारंभ होगी और 10 अप्रैल तक चलेगी।
अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार इस दौरान अलग-अलग मान्यताएं और अनुष्ठान किए जाते हैं। बहुत से लोग चैत्र नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत जलाते हैं, तोरण या बंदरबन रखकर पूजा करते हैं, पूरे 9 दिन उपवास करते हैं, और कलश स्थापना से इस दिन की पूजा प्रारंभ करते हैं।
नवरात्रि में माता के वाहन का देवीपुराण में उल्लेख
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त - 2 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक।
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त - 2 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
यह त्यौहार युद्ध में राक्षस महिषासुर को हराने के लिए देवी दुर्गा के सम्मान और जश्न के रूप में मनाया जाता है। राक्षस महिषासुर ने कठिन तपस्या से भगवान ब्रह्मा से इस शर्त पर अमरता प्राप्त कर ली थी कि उसे केवल एक महिला ही हरा सकती है। उसे इस बात का गुरूर था कि कोई भी महिला उसे कभी मर नहीं सकती। ऐसे में उसने तीनों लोकों (पृथ्वी, स्वर्ग और नर्क) में तांडव करना शुरू कर दिया।
महिषासुर के तांडव को रोकने के लिए और तीनों लोकों की रक्षा करने के लिए भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु, और भगवान शिव और अन्य सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को मिलाकर देवी दुर्गा की रचना की थी। तब देवी दुर्गा ने धर्म को बहाल करने और महिषासुर का अंत करने के लिए राक्षस महिषासुर से घोर युद्ध किया था और अंत में विजयी हुई थी।
किस दिन की जाएगी किस देवी की पूजा
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पहला दिन शैलपुत्री देवी
मां पार्वती के अवतार और पर्वत की पुत्री शैलपुत्री देवी की पूजा से नवरात्रि के पहले दिन की पूजा प्रारंभ होती है। इस दिन माता की भगवान शिव की पत्नी के रूप में मां दुर्गा पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री नंदी बैल की सवारी करती हैं, इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है।
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दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी
द्वितीया (दूसरे दिन) पर, पार्वती के एक और अवतार देवी ब्रम्चारिणी की पूजा की जाती है। इस रूप में मां पार्वती योगिनी स्वरूप में नजर आती हैं। यानी कि यह माता का अविवाहित स्वरूप है जिसमें वो भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या कर रही थीं। मान्यता है कि ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करने से मुक्ति, मोक्ष, और सुख, शांति, समृद्धि प्राप्त होती है।
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तीसरा दिन- चंद्रघंटा देवी
तृतीया (तीसरे दिन) हम चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। वह सुंदरता की प्रतिमूर्ति होने के साथ-साथ वीरता की भी प्रतीक हैं।
चौथा दिन – कुष्मांडा देवी
चतुर्थी (चौथे दिन) को देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है। ब्रह्मांड की रचनात्मक शक्ति माने जाने वाले कुष्मांडा देवी पृथ्वी पर वनस्पति के भंडार से जुड़ी मानी जाती हैं।
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पांचवां दिन – स्कंदमाता
पंचमी (पांचवें दिन) को देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं। मां स्कंदमाता सफेद रंग को दर्शाती है और सफेद रंग एक माँ की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक है जब उसके बच्चे को खतरे का सामना करना पड़ता है। मां स्कंदमाता शेर की सवारी करती है इनकी चार भुजाएं हैं और माता ने अपने हाथ में अपने बच्चे को पकड़ा हुआ है।
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छठा दिन – कात्यायनी देवी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि अविवाहित लड़कियों द्वारा मनचाहा पति पाने के लिए देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है; यह भी माना जाता है कि देवी सीता ने भी अच्छे पति के लिए मां कात्यायनी की पूजा की थी।
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सातवां दिन – कालरात्रि देवी
कालरात्रि देवी को माँ दुर्गा का सबसे क्रूर रूप माना जाता है, नवरात्रि के सातवें दिन यानि सप्तमी को कालरात्रि देवी की पूजा की जाती है।
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आठवां दिन – महागौरी देवी
आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है, वह बुद्धि और शांति का प्रतीक हैं। ऐसा माना जाता है कि जब कालरात्रि ने गंगा नदी में स्नान किया, तो वह गर्म हो गई और उनका रंग काला पड़ गया था।
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नौवां दिन – सिद्धिदात्री देवी
नवरात्रि के अंतिम और आखिरी दिन यानि नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा करने से भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है। इस दिन को राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह भगवान राम का जन्मदिन भी है।
नवरात्रि के दौरान क्या करें क्या ना करें
नवरात्रि के सभी दिनों में सूर्योदय से पहले उठकर गंगा नदी में स्नान करें। यदि ऐसा करना मुमकिन नहीं है तो आप अपने नहाने के पानी में ही कुछ बूंद गंगाजल की डालकर उससे स्नान कर सकते हैं। कहा जाता है ऐसा करने से आपके पिछले जन्म के सभी पाप धुल जाते हैं।
दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से आपके स्वास्थ्य में लाभकारी परिणाम प्राप्त होते हैं और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।
पूजा स्थल पर अखंड ज्योति जलाएं। ऐसा करने से आपका भाग्य उज्जवल होता है।
रात्रि में नवदुर्गा जागरण का आयोजन करें।
माता रानी को लाल चुनरी या कपड़े, फल फूल, श्रृंगार की सामग्री आदि चीजें अर्पित करें। ऐसा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
अपने घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्ते लगायें।
इस दौरान क्रोध और क्रूरता से जितना दूर रह सकते हैं उतना दूर रहें।
शराब या किसी भी तरह के तामसिक भोजन का सेवन ना करें।
घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाकर रखें।
इस अवधि के दौरान ब्रम्हचर्य बनाए रखना बेहद ही शुभ माना गया है।
चैत्र नवरात्रि पर राशि अनुसार करें यह उपाय मिलेगा मां का आशीर्वाद और समृद्धि का वरदान
मेष राशि: मां दुर्गा को लाल रंग के फूल और चुनरी चढ़ाएं।
वृषभ राशि: दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।
मिथुन राशि: महिलाओं को हरे रंग के फल और उपहार की वस्तुएं दान करें।
कर्क राशि: अपने घर में मां दुर्गा की चौकी और कलश अवश्य रखें और पूजा करें।
सिंह राशि: अपने कार्यस्थल पर माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें और उनकी पूजा करें।
कन्या राशि: ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडये विच्चे’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
तुला राशि: पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा को सफेद रंग की मिठाई अर्पित करें।
वृश्चिक राशि: 108 बार ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये विच्छे’ मंत्र का जप करते हुए हवन सामग्री की आहुति दें।
धनु राशि: 9 दिनों तक रोजाना महिषासुरमर्दिनि का पाठ करें।
मकर राशि: गरीब लोगों को सूखे मेवे का प्रसाद दान करें।
कुंभ राशि: अपने मंदिर के अग्नि कोण में एक अखंड दीपक अवश्य जलाएं। (इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यह अखंड दीप पूरे चैत्र नवरात्रि तक जलना चाहिए।)
मीन राशि: रोजाना महिलाओं को फल का दान करें।
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