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गुरुवार, 3 मार्च 2022

Puja Tips : Dainik puja ke niyam हर दिन घर में पूजा के समय इन नियमों का रखें ध्यान, तभी होगा धन और सुख लाभ

Puja Tips : Dainik puja ke niyam हर दिन घर में पूजा के समय इन नियमों का रखें ध्यान, तभी होगा धन और सुख लाभ

Puja Tips : Dainik puja ke niyam जानें पूजन के नियम, जिससे होगा धन और सुख लाभ

-पूजा स्थान पर कभी दो शंख नहीं होने चाहिए

-दक्षिणावर्त शंख जिस घर में होता है, वहां साक्षात लक्ष्मी और शांति का वास होता है

-कपूर का एक छोटा टुकड़ा घर में नित्य अवश्य जलाना चाहिए, इससे वातावरण शुद्ध होता है

-गणेश जी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए

-दुर्गा जी को दूर्वा नहीं चढ़ानी चाहिए

-सूर्य देव और शिव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए

-तुलसी का पत्ता बिना स्नान किये नहीं तोड़ना चाहिए

-रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए

-केतकी का फूल शंकर जी को नहीं चढ़ाना चाहिए

इन बातों का रखें खास ध्यान

-बिल्व पत्र दस रात्रि तक जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं

-तुलसी के पत्तों को ग्यारह रात्रि तक जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं

-तांबे के पात्र में चंदन नहीं रखना चाहिए

-दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए, जो दीपक से दीपक जलाते हैं वो रोगी होते हैं

-प्रतिदिन की पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए

-दक्षिणा में अपने दोष, दुर्गुणों को छोड़ने का संकल्प लें, मनोकामना पूर्ण होगी

-स्त्रियों को शंख नहीं बजाना चाहिए, ऐसा करने से लक्ष्मी वहां से चली जाती है

-पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके करनी चाहिए

-संभव हो तो सुबह 6 से 8 बजे के बीच में पूजा करें

इन नियमों का करें पालन 

-पूजा जमीन पर ऊनी आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए

-पूजा गृह में सुबह एवं शाम को दीपक जलाएं

-प्रतिदिन एक घी का और एक तेल का दीपक जलाएं

-घर में पूजा पाठ और मांगलिक पर्व में सिर पर टोपी या पगड़ी पहननी चाहिए

-सिर पर सफेद रुमाल ना रखें ये शुभ नहीं माना जाता है

दक्षिणावर्त शंख जिस घर में होता है, उसमे साक्षात लक्ष्मी एवं शांति का वास होता है. वहां मंगल ही मंगल होते हैं पूजा स्थान पर दो शंख नहीं होने चाहिए.

कपूर का एक छोटा सा टुकड़ा घर में नित्य अवश्य जलाना चाहिए, जिससे वातावरण अधिकाधिक शुद्ध होरू वातावरण में धनात्मक ऊर्जा बढ़े.

गणेश जी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए.

दुर्गा जी को दूर्वा नहीं चढ़ानी चाहिए.

सूर्य देव और शिव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए.

तुलसी का पत्ता बिना स्नान किये नहीं तोडना चाहिए. जो लोग बिना स्नान किये तोड़ते हैं,उनके तुलसी पत्रों को भगवान स्वीकार नहीं करते हैं.

रविवार, एकादशी, द्वादशी , संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए.

केतकी का फूल शंकर जी को नहीं चढ़ाना चाहिए.

कमल का फूल पांच रात्रि तक उसमें जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं.

बिल्व पत्र दस रात्रि तक जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं

तुलसी की पत्ती को ग्यारह रात्रि तक जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं.

हाथों में रखकर हाथों से फूल नहीं चढ़ाना चाहिए.

तांबे के पात्र में चंदन नहीं रखना चाहिए.

दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए जो दीपक से दीपक जलते हैं वो रोगी होते हैं.

पतला चंदन देवताओं को नहीं चढ़ाना चाहिए.

प्रतिदिन की पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए. दक्षिणा में अपने दोष,दुर्गुणों को छोड़ने का संकल्प लें, अवश्य सफलता मिलेगी और मनोकामना पूर्ण होगी.

चर्मपत्र या प्लास्टिक पात्र में गंगाजल नहीं रखना चाहिए.

स्त्रियों को शंख नहीं बजाना चाहिए यदि वे बजाते हैं तो लक्ष्मी वहां से चली जाती है.

पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके करनी चाहिए, हो सके तो सुबह 6 से 8 बजे के बीच में करें

पूजा जमीन पर ऊनी आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए, पूजा गृह में सुबह एवं शाम को दीपक,एक घी का और एक तेल का रखें.

घर में पूजा पाठ व मांगलिक पर्व में सिर पर टोपी व पगड़ी पहननी चाहिए, रुमाल विशेष कर सफेद रुमाल शुभ नहीं माना जाता है.

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