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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

अप्रैल माह में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार तथा ग्रहों का ख़ास गोचर

अप्रैल माह में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार तथा ग्रहों का ख़ास गोचर

अप्रैल माह में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार तथा ग्रहों का ख़ास गोचर
अप्रैल माह में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार तथा ग्रहों का ख़ास गोचर


अप्रैल महीने में जन्मे लोगों का व्यक्तित्व

अप्रैल साल का चौथा महीना होता है लेकिन राशि चक्र के अनुसार यह राशि में मेष यानी राशि चक्र की पहली राशि का भी महीना होता है। नतीजन अप्रैल का महीना कुछ अनूठी विशेषताओं वाला महीना माना गया है और साल के अन्य महीनों की तुलना में इस महीने की विशेषता सबसे अलग और खास मानी जाती है।

अप्रैल में पैदा होने वाले लोग बहिर्मुखी स्वभाव की तुलना में ज्यादा अंतर्मुखी होते हैं। वह अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी आलोचनात्मक होते हैं। इस महीने जन्मे लोग जो कुछ भी काम शुरु करते हैं उसमें अपना 100% देने के लिए तत्पर रहते हैं। इन्हें यात्रा करना बहुत पसंद होता है वहीं विश्वासघात और धोखेबाज़ी इन्हें बिल्कुल पसंद नहीं होती है। अप्रैल महीने में जन्मे लोग किसी भी उद्देश्य को बेहद ही आसानी से प्राप्त करने में कामयाब होते हैं और किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति के काम को भी पूरा करने का इनके अंदर एक अनूठा साहस होता है। हालांकि अक्सर देखा गया है कि अप्रैल में जन्मे लोग जिद्दी स्वभाव के होते हैं और यही वजह है कि उनकी यह आदत उन्हें खुश रहने नहीं देती है।

इस महीने जन्मे लोगों के साथ रहना और इन्हें समझना कई बार चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। खास करके अगर ये आपको पसंद नहीं करते हैं लेकिन अगर अप्रैल में जन्मे लोग आप पर भरोसा करते हैं तो यह आपके सबसे खास और विश्वसनीय दोस्त साबित होते हैं।

अप्रैल के महीने में जन्म लेने वाले लोग अपने सपनों को, जुनून और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से समर्पित होते हैं। इस महीने जन्मे लोगों में ऊर्जा शानदार होती है जो उनका उनके लक्ष्य के प्रति समर्पित होने को भी बखूबी दर्शाती है। इसके साथ ही इस महीने जन्मे लोग उन्मुख होते हैं और भविष्य के प्रति अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता रखते हैं।

अप्रैल में जन्मे लोगों के लिए भाग्यशाली अंक: 9

अप्रैल में जन्मे लोगों के लिए भाग्यशाली रंग: क्रिमसन, लाल, गुलाबी और पिंक

अप्रैल में जन्मे लोगों के लिए भाग्यशाली दिन: मंगलवार

अप्रैल में जन्मे लोगों के लिए भाग्यशाली रत्न: हीरा

उपाय/सुझाव: ‘ॐ भौं भौमाये नमः’ मंत्र का जाप करें।

अप्रैल महीने के आगाज के साथ ही वसंत ऋतु अपने चरम पर है। साल के इस सबसे खूबसूरत समय का हमारे जीवन पर भी खुशहाल रंग देखने को अवश्य ही मिलता है। इसी आशा के साथ कि इस वसंत ऋतु की ही तरह आपके जीवन में भी हरियाली और खुशियां हमेशा बनी रहे। आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं अप्रैल महीने से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण और जानने योग्य बातें। अप्रैल महीने की बात करें तो यह महीना उत्तरी गोलार्ध में सूर्य और वृद्धि का महीना माना गया है और इसका नाम लैटिन शब्द एपेरेयर [Latin word Aperaire] (खुलने के लिए) या खुबानी (धूप) से आया है। अप्रैल महीना बसंत के आगमन और राशि चक्र की शुरुआत के साथ नई शुरुआत का महीना होता है।

बढ़ने और खिलने के मौसम के साथ-साथ किए महीना रामनवमी, चेती चंद, उत्तरायण, चैत्र अमावस्या, वैशाख अमावस्या, जैसे ढेरों उत्सव और त्योहार अपने साथ लेकर आता है। 

अप्रैल महीने के महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार

1 अप्रैल, 2022 शुक्रवार चैत्र अमावस्या

अमावस्या तिथि पितृ तर्पण के लिए बेहद ही उपयुक्त मानी जाती है। पितरों की मुक्ति के लिए पितृ तर्पण के साथ चैत्र अमावस्या पर कई तरह के धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन उपवास करने से न केवल पूर्वजों को मुक्ति प्रदान होती है और शांति मिलती है बल्कि इससे व्रत करने वाले लोगों को अत्यंत संतुष्टि, भगवान का आशीर्वाद और जीवन में सफलता भी प्राप्त होती है।

2 अप्रैल, शनिवार चैत्र नवरात्रि – उगादि – घटस्थापना – गुड़ी पड़वा

3 अप्रैल, रविवार चेती चंद

चेटी चंड का त्योहार हिंदी कैलेंडर में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना गया है और यह सिंधी परोपकारी संत झूलेलाल के जन्म के सम्मान में मनाया जाता है। हिंदी नव वर्ष के रूप में मनाया जाने वाला यह त्यौहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है। लोग इस पूर्व संध्या पर समृद्धि और धन प्राप्ति के लिए भगवान वरुण की प्रार्थना करते हैं। झूलेलाल को जल देवता के रूप में माना जाता है। चेती चंद ना केवल अपने धार्मिक महत्व के चलते महत्वपूर्ण होता है बल्कि इसलिए भी इसका महत्व कितना माना जाता है क्योंकि सिंधु समुदाय के पारंपरिक मूल्यों और विश्वासों का यह त्यौहार प्रतिनिधित्व करता है।

10 अप्रैल, रविवार रामनवमी

रामनवमी का यह पावन हिंदू त्योहार अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र प्रभु भगवान श्री राम के जन्म उत्सव के उपलक्ष में मनाया जाता है।

12 अप्रैल, मंगलवार कामदा एकादशी

कामदा एकादशी का व्रत भगवान वासुदेव की भव्यता और सम्मान के रूप में मनाया जाता है। स्वाभाविक सी बात है कि इस दिन उनकी पूजा भी की जाती है।

भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए सबसे उपयुक्त एकादशी का दिन माना जाता है। ऐसे में बहुत से लोग इस दिन व्रत भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सिर्फ व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और पापों का नाश होता है। एकादशी व्रत से 1 दिन पहले यानी दशमी तिथि के दिन दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए, इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए और एकादशी तिथि के दिन व्रत रखना चाहिए और उसके अगले दिन यानी द्वादशी पर व्रत का पारण करना चाहिए।

14 अप्रैल, गुरुवार प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष) – मेष संक्रांति

प्रदोष व्रत को बहुत सी जगह पर प्रदोषम भी कहते हैं और यह भगवान शिव को समर्पित एक द्वामसिक त्यौहार है। यानी कि 1 माह में दो बार मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह चंद्र पखवाड़े के 13 वें दिन मनाया जाता है। यह दिन पूरी तरह से सर्वोच्च भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है। प्रदोष व्रत एक धार्मिक व्रत है जो विजय, बहादुरी और अभय होने का प्रतिनिधित्व करता है।

16 अप्रैल, शनिवार हनुमान जयंती – चैत्र पूर्णिमा व्रत

हनुमान जयंती को भगवान हनुमान के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं। हनुमान जयंती हर साल हिंदू महीने चैत्र की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में हिंदू महीने कार्तिक में अंधेरे पखवाड़े के चौदहवें दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है।

चैत्र पूर्णिमा चैत्र के महीने में आने वाली पूर्णिमा को कहते हैं। इसे कई जगहों पर चैती पूनम के रूप में भी जाना जाता है। इसे हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह हिंदू वर्ष के पहले महीने की पूर्णिमा तिथि होती है। इस दिन लोग भगवान सत्यनारायण का आशीर्वाद लेने के लिए व्रत पूजा आदि करते हैं और रात में चंद्रमा भगवान की पूजा करते हैं। चैत्र पूर्णिमा पर, यह भी माना जाता है कि एक व्यक्ति यदि किसी नदी, तीर्थ सरोवर, या पवित्र झील में स्नान और यथाशक्ति के अनुसार दान करता है तो उसे पुण्य प्राप्त होता है।

19 अप्रैल, मंगलवार संकष्टी चतुर्थी

संकष्टी चतुर्थी हिंदू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है। यह भगवान गणेश को समर्पित एक बेहद ही शुभ दिन माना जाता है। संकष्टी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत संस्कृत शब्द ‘संकष्टी’ का अर्थ ‘मुक्ति’ या ‘कठिन और कठोर परिस्थितियों से बचना’ है, जबकि ‘चतुर्थी’ का अर्थ है ‘चौथी अवस्था’ से मिलकर बना है। इस दिन पूजा और उपवास करने से व्यक्ति को शांति, समृद्धि, ज्ञान और प्रसिद्धि प्राप्त होती है।

26 अप्रैल, मंगलवार वरुथिनी एकादशी

वरुथिनी एकादशी का व्रत सुख और सौभाग्य प्रदान करता है। इसके अलावा यह व्रत बीमारी और तमाम तरह की पीड़ा को दूर करने के साथ-साथ पापों को दूर करने और ऊर्जा और जोश को बहाल करने के संदर्भ में भी बेहद उपयोगी माना गया है। इस दिन भक्ति भाव से भगवान मधुसूदन की पूजा करने का विधान बताया गया है। वरुथिनी एकादशी के दिन उपवास करने से सूर्य ग्रहण के दौरान सोना दान करने के जितना फल प्राप्त होता है।

28 अप्रैल, गुरुवार प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

प्रदोष व्रत एक बेहद ही शुभ फलदायी व्रत होता है और कहते हैं इस व्रत को करने से व्यक्ति को विकास और सुख प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत आपको कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए अपने अतीत के पापों को दूर करने के लिए बेहद ही उपयुक्त माना जाता है। यदि आप मानसिक स्पष्टता और मन की शांति चाहते हैं, तो यह व्रत आपके लिए है। यह आपको समृद्धि, साहस और भय का उन्मूलन ला सकता है।

29 अप्रैल, शुक्रवार मासिक शिवरात्रि

शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित एक बेहद ही शुभ और शक्तिशाली व्रत होता है। कहते हैं यह श्रद्धा, बेहतर जीवन और भविष्य में सफलता के लिए पुरुष और महिलाएं दोनों ही कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि शिव मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने से व्यक्ति को सभी सांसारिक इच्छाओं से मुक्ति मिलती है। मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने के और भी कई फायदे हैं जैसे स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलता है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है, और साथ ही व्यक्ति को खुशियां भी प्राप्त होती है। ऐसा कहा जाता है कि यह उपवास करने से व्यक्ति के जीवन के सभी तनाव और दुख से मुक्ति प्राप्त होती है।

30 अप्रैल, शनिवार वैशाख अमावस्या

हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना वैशाख है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग (युग) इसी महीने शुरू हुआ था। यह वैशाख अमावस्या के धार्मिक महत्व को दस गुना करता है। इस दिन धार्मिक कार्य, स्नान, दान और पितृ तर्पण अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इस अमावस्या को कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए ज्योतिषीय उपचारों के अधीन भी किया जाता है। दक्षिण भारत में इसी दिन शनि जयंती मनाई जाती है।

अप्रैल महीने के गोचर और अस्त ग्रह

मंगल का कुंभ राशि में गोचर (07 अप्रैल, 2022): मंगल 7 अप्रैल 2022, गुरुवार को 14:24 बजे अपनी उच्च राशि मकर से निकलकर शनि देव की ही कुंभ राशि में गोचर करने वाला है।

बुध का मेष राशि में गोचर (08 अप्रैल 2022): बुध देव 08 अप्रैल 2022, शुक्रवार के दिन 11:50 बजे मीन राशि से अपना स्थान परिवतर्न करते हुए मेष राशि में अपना गोचर करेगा और ये यहाँ 25 अप्रैल 2022, सोमवार तक इसी राशि में स्थित रहेगा।

राहु गोचर: राहु 12 अप्रैल 2022 को सुबह 11:18 बजे वृषभ राशि से मेष राशि में गोचर करेगा।

केतु गोचर: केतु मंगल के आधिपत्य वाली राशि वृश्चिक से 12 अप्रैल, 2022 को सुबह 11:18 बजे पर शुक्र के आधिपत्य वाली राशि तुला में गोचर करेगा।

बृहस्पति गोचर: बृहस्पति इस वर्ष 13 अप्रैल 2022 को सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर शनि शासित राशि मकर से अपनी स्वराशि मीन में गोचर करेगा।

सूर्य का मेष राशि में गोचर (14 अप्रैल 2022): अब 14 अप्रैल 2022, गुरुवार के दिन 8:33 बजे अपने मित्र ग्रह गुरु बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि मेष राशि में गोचर करेगा।

बुध का वृषभ राशि में गोचर (25 अप्रैल 2022): बुध देव एक बार फिर अपना राशि परिवर्तन करते हुए वृष राशि में 25 अप्रैल 2022, सोमवार को 00:05 बजे अपना गोचर करेंगे।

शुक्र का मीन राशि में गोचर (27 अप्रैल, 2022): शुक्र देव शनि देव की कुंभ राशि से निकलकर मीन में 27 अप्रैल 2022, बुधवार को अपना गोचर करेंगे।

शनि गोचर 2022: शनि 29 अप्रैल 2022 को सुबह 09:57 बजे कुंभ राशि में गोचर करेंगे।

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