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रविवार, 3 अप्रैल 2022

नवरात्रि तीसरे दिन का महत्व इस दिन मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी

नवरात्रि तीसरे दिन का महत्व इस दिन मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी

नवरात्रि तीसरे दिन का महत्व इस दिन मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी
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13 अप्रैल से चैत्र नवरात्र प्रारंभ हो चुकी है। ऐसे में 15 अप्रैल गुरुवार के दिन नवरात्रि का तीसरा दिन है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा का विधान बताया गया है। मां चंद्रघंटा अपने एक हाथ में धनुष, एक में त्रिशूल, एक में तलवार और एक हाथ में गदा धारण किए हुए हैं। इसके अलावा मां के सिर पर घंटे के आकार का चंद्रघंटा नजर आता है जिसकी वजह से मां का नाम चंद्रघंटा पड़ा। अपने इस विशेष आर्टिकल में जानते हैं चंद्रघंटा देवी से संबंधित कथा और पूजन विधि और मंत्र की संपूर्ण जानकारी।

नवरात्रि तीसरे दिन पूजन विधि


इस दिन भी सुबह जल्दी स्नान आदि करके मां की पूजा का संकल्प लें।
इस दिन की पूजा में मां चंद्रघंटा को सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य इत्यादि अर्पित करें।
इसके अलावा मां को सुगंधित फूल भी चढ़ाए।
भोग में मां के लिए दूध से बनी कोई मिठाई अवश्य शामिल करें।
इसके बाद दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में मां की आरती उतारें।
मां चंद्रघंटा से संबंधित व्रत कथा
मां चंद्रघंटा दैत्यों और राक्षसों का वध करने के लिए जानी जाती हैं। जब समस्त विश्व में दैत्यों का उत्पात हद से ज्यादा बढ़ गया था। तब मां चंद्रघंटा ने भक्तों की पीड़ा का नाश करने के लिए दैत्यों से युद्ध छेड़ा। इस दौरान उनका दैत्य महिषासुर से भयंकर युद्ध हुआ। इस दौरान माता ने अपने क्रोध से महिषासुर और उसकी विशाल दैत्यों की सेना का नाश कर दिया था और अंत में विजय की प्राप्ति की।

नवरात्रि तीसरे दिन का महत्व

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा की पूजा से व्यक्ति को अपने जीवन में डर से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा मां चंद्रघंटा की पूजा से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम या दूर करने में भी मदद हासिल होती है। क्योंकि मां चंद्रघंटा तंभ साधना में मणिपुर चक्र को नियंत्रित करती हैं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मणिपुर चक्र का सीधा संबंध मंगल ग्रह से जोड़कर देखा जाता है।

मां चंद्रघंटा के मंत्र


पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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