ऐसे में अगर आपको भी इस तरह की कोई समस्या है और लाख कोशिशों के बाद भी आपको उस बीमारी से निजात नहीं मिल रही है या फिर आपके घर में कोई अन्य सदस्य बार-बार बीमार पड़ रहा है तो, इसके पीछे का कारण बदलते मौसम के साथ-साथ कई मामलों में ग्रह और उनसे संबंधित रोग हो सकते हैं।
छोटी-मोटी समस्याओं के अलावा भी आज कैंसर, यौन रोग, बालों का झड़ना, डिप्रेशन या अवसाद, आदि जैसी गंभीर समस्याएं लोगों को न केवल परेशान कर रही हैं, बल्कि इनके उपचार के लिए उन्हें अपने जेब भी ढीली करते हुए अपनी राशि का एक बड़ा भाग अस्पतालों और डॉक्टर की बड़ी-बड़ी फीस पर ख़र्च करना पड़ता है। बावजूद इसके उन्हें अपनी समस्या का हल नहीं मिलता है।
ज्योतिष विज्ञान में किस ग्रह के दोष से कौन सी बीमारियां होने का खतरा अधिक रहता है और इससे निजात पाने के क्या-क्या सरल उपाय हो सकते हैं।
ग्रह का दुर्बल होना जातकों को दे सकते हैं उस ग्रह से जनित समस्याएं
वैदिक ज्योतिष की मदद से आप किसी विद्वान ज्योतिषियों से न केवल अपने जीवन में पूर्व की बीमारियों के बारे में जान सकते हैं, बल्कि मौजूदा बीमारी तथा भविष्य में होने वाले रोग व स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका को लेकर भी आप पहले से जानकारी प्राप्त करते हुए खुद को सतर्क रखने में सक्षम हो सकते हैं।
इसके अलाव ज्योतिष में ज्योतिषीय उपचारों व आयुर्वेद की मदद से आप अपनी समस्याओं को हल करने में भी सफल रहते हैं। क्योंकि ये उपचार हमे वैदिक ज्योतिष के विभिन्न ग्रहों और उनसे मिलने वाले रोग के अनुसार दिए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में किसी भी विशेष ग्रह का दुर्बल होना या दूषित होना, जातक को उस ग्रहण से संबंधित बीमारियां देने की आशंका बढ़ा देता हैं। आइये डालते हैं सभी 9 ग्रहों और उनसे मिलने वाले रोगों पर एक नज़र:-
ग्रह और उनसे मिलने वाले रोग
जिस प्रकार हर ग्रह हमारे जीवन के विभिन्न भागों को प्रभावित करता है। उसी प्रकार स्वास्थ्य की दृष्टि से भी हर ग्रह का हमारी सेहत और उसमे आए बदलावों से सीधा संबंध होता है। ज्योतिष के अनुसार आइये जानें निम्नलिखित ग्रह व्यक्ति को कौन-कौन सी समस्या दे सकते हैं:-
सूर्य से उत्पन्न बीमारियां:
सूर्य व्यक्ति के जीवन में पित्त, वर्ण, जलन, उदर संबंधी रोग, रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट, न्यूरोलॉजी से संबंधित रोग, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थियों से संबंधित रोग, कुष्ठ रोग, सिर के संबंधी रोग, रक्त संबंधी रोग, मिर्गी इत्यादि शारीरिक समस्या दे सकता है। ऐसे में यदि व्यक्ति को इनमें से कोई भी रोग या समस्या है तो इसका संबंध उसकी कुंडली में मौजूद सूर्य की स्थिति से हो सकता है।
चन्द्रमा से उत्पन्न बीमारियां:
व्यक्ति को हृदय एवं फेफड़ों, बायें नेत्र, अनिद्रा या नींद संबंधी समस्या, अस्थमा, डायरिया, रक्ताल्पता, रक्तविकार, उल्टी, मानसिक तनाव, किडनी, मधुमेह, ड्रॉप्सी, अपेंडिक्स, कफ रोग, मूत्र विकार, मुख, दांत, नासिका, पीलिया, डिप्रेशन या अवसाद और दिल से संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या चन्द्रमा से मिलती है। ऐसे में इन समस्याओं के पीछे व्यक्ति की कुंडली में चन्द्रमा की मौजूदा स्थिति को देखा जा सकता है।
बुध से उत्पन्न बीमारियां:
फलदीपिका के अनुसार, व्यक्ति को बुध से छाती रोग, नसों से संबंधित समस्या, नाक, ज्वर, विषमय, खुजली, टाइफाइड, पागलपन, शरीर के किसी हिस्से में लकवा, मिर्गी, अल्सर, अजीर्ण, मुख का रोग, किसी प्रकार का चर्म रोग, हिस्टीरिया, चक्कर आना, निमोनिया, विषम ज्वर, पीलिया, हकलाहट, कण्ठ रोग, चेचक, नाड़ियों की कमजोरी, जीभ और दाँत का रोग या दिमाग से संबंधित समस्या होने का खतरा रहता है।
मंगल से उत्पन्न बीमारियां:
मंगल ग्रह से विचारणीय समस्या गर्मी संबंधित रोग, विषजनित रोग, व्रण, कुष्ठ, खुजली, घमोरियां, रक्त या रक्तचाप संबंधित रोग, गर्दन व कण्ठ रोग, मूत्र रोग, ट्यूमर, कैंसर, पाइल्स, अल्सर, दस्त, दुर्घटना में रक्तस्त्राव, धारीर के किसी हिस्से का कटना, फोड़े-फुन्सी, ज्वर, अग्निदाह, चोट इत्यादि हैं। ऐसे में इन रोग के होने के पीछे जातक की कुंडली में मंगल की स्थिति को देखा जाता है।
शुक्र से उत्पन्न बीमारियां:
ज्योतिष अनुसार शुक्र दृष्टि संबंधित रोग, जननेन्द्रिय संबंधित रोग, मूत्र संबंधित एवं गुप्त रोग, मिर्गी, अपच, गले के रोग, नपुंसकता, यौन रोग, अन्त:स्त्रावी ग्रंथियों से संबंधित रोग, मादक द्रव्यों के सेवन से उत्पन्न रोग, पीलिया, बांझपन, वीर्य संबंधित और त्वचा संबंधित रोग देता हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति को अगर इनमें से कोई भी समस्या हैं तो इसके पीछे उसकी कुंडली में शुक्र की स्थिति को देखा जा सकता है।
गुरु से उत्पन्न बीमारियां:
व्यक्ति को लीवर, किडनी, तिल्ली आदि से संबंधित कोई रोग, कर्ण संबंधित रोग, मधुमेह, पीलिया, याददाश्त में कमी, जीभ संबंधित कोई समस्या, पिण्डलियों से संबंधित रोग, मज्जा दोष, यकृत पीलिया, स्थूलता, दंत रोग और मस्तिष्क विकार इत्यादि गुरु बृहस्पति के कारण होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति में अगर ये समस्या हैं तो उसकी कुंडली में गुरु की कमज़ोर स्थिति हो सकती है।
शनि से उत्पन्न बीमारियां:
व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी, शरीर में दर्द, पेट दर्द, घुटनों या पैरों में होने वाला दर्द, दांतों अथवा त्वचा संबंधित रोग, अस्थिभ्रंश, मांसपेशियों से संबंधित रोग, लकवा, बहरापन, खांसी, दमा, अपच, स्नायु विकार इत्यादि शनि के कारण हो सकते हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति को अगर इनमें से कोई भी समस्या है तो उसके पीछे उसकी कुंडली में शनि की स्थिति को देखा जा सकता है।
राहु से उत्पन्न बीमारियां:
फलदीपिका के अनुसार छाया ग्रह राहु व्यक्ति के मस्तिष्क विकार, यकृत विकार, निर्बलता, चेचक, पेट में कीड़े, ऊंचाई से गिरने से लगने वाली चोट, पागलपन, तेज दर्द, विष जनित परेशानियां, पशुओं या जानवरों से मिलने वाला शारीरिक कष्ट, कुष्ठ रोग, कैंसर, बुखार, दिमाग संबंधित विकार, अचानक चोट और दुर्घटना जैसी समस्या देता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को इनमें से कोई ही समस्या है तो इसके पीछे निश्चित रूप से कुंडली में राहु की भूमिका होगी।
केतु से उत्पन्न बीमारियां:
ज्योतिष में केतु से मिलने वाली समस्याएं हैं वात जनित बीमारियां, रक्तदोष, चर्म रोग, सुस्ती, अकर्मण्यता, शरीर में चोट, घाव, एलर्जी, आकस्मिक रोग ,परेशानी, कुत्ते का काटना, रीढ़ संबंधित समस्या, जोड़ों का दर्द, शुगर, कान, स्वप्नदोष, हर्निया और गुप्तांग संबंधी रोग।
तो ये थी फलदीपिका के अनुसार सभी 9 ग्रहों से मिलने वाली विभिन्न समस्याएं। चलिए अब जानते हैं कि आखिर इन ग्रहों से संबंधित किन उपायों की मदद से हम उन ग्रहों से मिलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से अपना बचाव कर सकते हैं।
हर ग्रह से संबंधित सरल ज्योतिषीय उपाय
सूर्य ग्रह के उपाय:
गरीबों व ज़रूरतमंद अस्वस्थ्य लोगों की सेवा करें।
नियमित रूप से सुबह सूर्य को अर्घ्य दें।
108 बार रोज़ाना सूर्य के बीज मंत्र “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:” का जाप करें।
सूर्य देव से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
रोजाना कम से कम 5 मिनट तक नग्न आँखों से सूर्य देव को देखें और उनके दर्शन करें।
अपनी कुंडली में सूर्य ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन सूर्य ग्रह शांति पूजा करवाएं।
चंद्र ग्रह के उपाय:
रोजाना शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और अगर ये संभव न हो तो ये कार्य हर सोमवार करें।
महिलाओं का सम्मान करें।
प्रतिदिन ध्यान व योग करें।
रोजाना अपनी मां का आशीर्वाद लें।
चंद्र ग्रह के बीज मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः” का रोजाना 108 बार जप करें।
चंद्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में चंद्र ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन चंद्र ग्रह शांति पूजा करवाएं।
मंगल ग्रह के उपाय:
हर मंगलवार मंदिर जाकर मिठाई का दान करें।
मंगलवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करें।
अपने घर या घर के पास नीम का पेड़ लगाएं और उसकी सेवा करें।
हर मंगलवार बंदरों को केले खिलाएं।
हमेशा अपने पास एक लाल रंग का रुमाल रखें।
एक माह में कम से कम एक बार रक्तदान ज़रूर करें।
मंगल ग्रह के बीज मंत्र “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” का रोजाना 108 बार जप करें।
मंगल ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में मंगल ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन मंगल ग्रह शांति पूजा करवाएं।
बुध ग्रह के उपाय:
हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
हमेशा कोई भी नया वस्त्र धारण करने से पहले इसे धो लें।
घर की महिलाओं को हरी वस्तुएं भेट स्वरूप दें।
नियमित रूप से भगवान विष्णु व गणेश जी की पूजा करें।
गाय को रोजाना एक रोटी व हरी पालक खिलाएं।
गरीब व ज़रूरतमंद छात्रों में शिक्षा की साम्रगी भेट करें।
बुध ग्रह के बीज मंत्र “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” का रोजाना 108 बार जप करें।
बुध ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में बुध ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन बुध ग्रह शांति पूजा करवाएं।
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बृहस्पति ग्रह के उपाय:
गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें।
प्रत्येक गुरुवार का व्रत करें।
घर में या घर के पास केले का वृक्ष लगाएं और उसकी सेवा करें।
गाय को चने की दाल खिलाएं।
108 बार रोज़ाना गुरु के बीज मंत्र “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः” का जाप करें।
गुरु ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में गुरु ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन गुरु ग्रह शांति पूजा करवाएं।
शुक्र ग्रह के उपाय:
चमकीले सफेद या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
देवी दुर्गा व देवी लक्ष्मी की आराधना करें।
शुक्रवार के दिन व्रत का पालन करें।
अपने पार्टनर या साथी का सम्मान करें और उन्हें सुगंधित वस्तु या इत्र भेट करें।
छोटी कन्याओं में मिठाई बांटे और उनका आशीर्वाद लें।
108 बार रोज़ाना शुक्र के बीज मंत्र “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का जाप करें।
शुक्र ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में शुक्र ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन शुक्र ग्रह शांति पूजा करवाएं।
शनि ग्रह के उपाय:
प्रतिदिन काले कुत्ते को खाना खिलाएं।
मांसाहार और शराब के सेवन और जुए आदि गलत कार्य करने से परहेज करें।
रोजाना घर के दक्षिण पूर्व कोने में सरसो के तेल का एक दीपक ज़रूर जलाएं।
शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करें।
हर शनिवार शनि देव के मंदिर जाकर उनके दर्शन करें और उनकी प्रतिमा या मूर्ति को बिना छुए सरसों का तेल चढ़ाएं।
108 बार रोजाना शनि के बीज मंत्र “ॐ शं शनैश्चरायै नम:” का जाप करें।
शनि ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में शनि ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन शनि ग्रह शांति पूजा करवाएं।
अपनी ऊँगली में लोहे का छल्ला धारण करें।
राहु ग्रह के उपाय:
Lead का दान करें।
रविवार के दिन गेहूं या गुड़ को किसी भी तांबे के बर्तन में रखकर बहते हुए जल या नदी में प्रवाहित कर दें।
गले में चांदी धारण करना आपके लिए उचित रहेगा।
चांदी के सर्प का जोड़ा बहते हुए जल या नदी में प्रवाहित करें।
बहते हुए जल में 5 नारियल या कद्दू प्रवाहित करें।
राहु ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
अपनी कुंडली में राहु ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन राहु ग्रह शांति पूजा करवाएं।
108 बार रोजाना राहु के बीज मंत्र “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः” का जाप करें।
केतु ग्रह के उपाय:
भूरे और सलेटी रंग के वस्त्र धारण करें।
छोटे बच्चों में मिठाइयां बांटे।
रोजाना स्नान कर घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
केतु ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
9 मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी आपके लिए लाभदायक रहेगा।
अपनी कुंडली में केतु ग्रह की शांति हेतु और उनके अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन केतु ग्रह शांति पूजा करवाएं।
108 बार रोजाना केतु के बीज मंत्र “ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः” का जाप करें।
नोट: आपको बता दें कि उपरोक्त जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है। ऐसे में किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर इन उपायों को अपनाने के साथ-साथ जातक को तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर व विशेषज्ञ की सलाह लेने की हिदायत भी दी जाती है।
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