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बुधवार, 1 जून 2022

Rambha Tritiya Teej 2022: सुहागिन ही नहीं कुंवारी कन्यायों के लिए वरदान है ये व्रत जानें कथा मुहूर्त और मंत्र

Rambha Tritiya Vrat 2022: सुहागिन ही नहीं कुंवारी कन्यायों के लिए वरदान है ये व्रत जानें कथा मुहूर्त और मंत्र  

Rambha Tritiya Teej 2022: सुहागिन ही नहीं कुंवारी कन्यायों के लिए वरदान है ये व्रत जानें कथा मुहूर्त और मंत्र
Rambha Tritiya Teej 2022: सुहागिन ही नहीं कुंवारी कन्यायों के लिए वरदान है ये व्रत जानें कथा मुहूर्त और मंत्र  


रंभा तीज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ ही कुवांरी कन्याएं भी करती हैं. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाली महिलाओं के जीवन में प्रेम और सौभाग्य भरपूर होता है.

Rambha Teej 2022 / Apsara Rambha Tritiya Puja Vidhi: सौंदर्य और सौभाग्य का व्रत रंभा तीज ज्येष्ठ माह (Jyeshta Maah) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इस बार यह व्रत 2 जून को रखा जायेगा. यह व्रत सुहागिन महिलाओं और कुवांरी कन्याओं के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अप्सरा रंभा (Apsara Rambha) के विभिन्न नामों की पूजा करने से व्रती को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव, माता पार्वती और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है. इस दिन रंभा अप्सरा को याद किया जाता है.

इस तरह करें रंभा पूजन

रंभा तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं और सूर्यदेव की तरफ एक दीपक जलाएं। इस दिन सुहागिन महिलाएं मां लक्ष्मी और मां सती की विधि विधान से पूजा करती है। इस दिन सौभाग्य और सुंदरता का प्रतीक अप्सरा रंभा की पूजा की जाती है। कई जगहों पर चूड़ियों के जोड़ों को रंभा के रुप में पूजा जाता है। साथ ही इस दिन रंभोत्कीलन यंत्र की भी पूजा की जाती है। अप्सरा रंभा को चंदन, फूल, फल आदि अर्पित किए जाते है और मां के समक्ष दीपक जलातें है। हाथ में गुलाबी रंग से रंगे अक्षत को लेकर इन मंत्रो का जाप किया जाता है।

रंभा तृतीया / रंभा तीज पूजा शुभ मुहूर्त - Apsara Rambha TritiyaPuja Shubh Muhurt

ज्येष्ठ माह (Jyeshta Maah) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह व्रत जातक के जीवन में प्रेम और सौभाग्य लाता है. यह व्रत 2 जून को रखा जाएगा.

तृतीया तिथि का आरंभ- 1 जून बुधवार की रात में 09 बजकर 47 मिनट से

तृतीया तिथि समापन- 3 जून, शुक्रवार की रात 12 बजकर 17 मिनट पर 

रंभा अप्सरा की उत्पत्ति व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवों और असुरों के द्वारा अमृत कलश की चाह में किए गए समुद्र मंथन से अप्सरा रंभा की उत्पति हुई थी। माना जाता है कि समुद्र मंथन से जो 14 रत्न प्राप्त हुए थे उनमें से अप्सरा रंभा भी थीं। रंभा तीज का व्रत सुंदरता का प्रतीक मानी जाने वाली अप्सरा रंभा को ही समर्पित माना जाता है। जो स्त्री इस व्रत को विधि विधान से और श्रद्धापूर्वक करती है उसे अखंड सौभाग्यवती होने के साथ ही संतान और रूप की प्राप्ति होती है।

Apsara Rambha Tritiya Mantra 2022: रंभा तीज मंत्र का जाप करें

रंभा तीज व्रत के पूजन में इस मंत्र का जाप करने से अति पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

रंभा तीज मंत्र ( Rambha Teej Mantra)

रंभा तीज व्रत रखने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इस व्रत का पूजन विधि पूर्वक करने से यौवन और आरोग्य मिलता है. इस दिन दान करना भी अत्यंत शुभफलदायी माना गया है.

रंभा तीज व्रत के पूजन में इस मंत्र का जाप करें-

ॐ ! रंभे अगच्छ पूर्ण यौवन संस्तुते

रंभा तृतीया पूजा मंत्र:

रंभा तृतीया के दिन पूजन के दौरान सुहागिन स्त्री और कुंवारी कन्याओं को ॐ महाकाल्यै नम:, ॐ महालक्ष्म्यै नम:, ॐ महासरस्वत्यै नम: आदि मंत्रों का जाप करना चाहिए।

रंभा तीज 2022 का महत्व -Rambha Teej vart Importance

रंभा तीज व्रत पूजन से स्त्रियों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस व्रत का पूजन विधि पूर्वक करने से यौवन और आरोग्य प्राप्त होता है. इस दिन दान का भी विशेष महत्व है.

हिंदू कैलेंडर के तीसरे महीने ज्येष्ठ में कई महत्वपूर्ण व्रत पड़ते हैं जिनमें से रंभा तृतीया भी एक है। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रंभा तृतीया या तीज का व्रत रखा जाता है। इस साल 2022 में ये व्रत 2 जून, गुरुवार को पड़ रहा है। सुहागिन महिलाओं ये व्रत अपनी पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं।

सौभाग्य, आरोग्य और सौंदर्य प्रदान करने वाले इस व्रत के दिन रंभा अप्सरा के साथ ही भगवान शिव, माता पार्वती और लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। वहीं शास्त्रों के अनुसार रंभा तृतीया का व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए भी बहुत विशेष रूप से फल देने वाला माना जाता है। 

Rambha Teej 2022: रंभा तीज व्रत को सौंदर्य और सौभाग्य का व्रत माना जाता है. यह ज्येष्ठ माह (Jyeshta Maah) के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है. इस बार यह व्रत 2 जून को रखा जा रहा है. यह व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ ही कुवांरी कन्याएं भी करती हैं. यह व्रत विशेष रूप से फलदायी होता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अप्सरा रंभा (Apsara Rambha) के विभिन्न नामों की पूजा करने से व्रती को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव, माता पार्वती और देवी लक्ष्मी की पूजा करती हैं. जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, इस व्रत का महत्व.

कौन थी अप्सरा रंभा (Who was Apsara Rambha)

पौराणिक कथा की मानें तो रंभा अप्सरा की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी. रंभा पुराणों में सौंदर्य का प्रतीक मानी गई है. रंभा तीज का व्रत रंभा अप्सरा को समर्पित है. जब देवता और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. उसी समुद्र मंथन में निकले 14 रत्नों में से एक अप्सरा रंभा भी थी.

रंभा तीज व्रत पूजा विधि

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करके व्रत एवं पूजा का संकल्प लें.

पूजा स्थल पर पूर्व दिशा में मुंहकर के पूजा के लिए बैठें.

स्वच्छ आसन पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करें.

पूजा में पांच दीपक जलाएं.

सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें.

इसके बाद 5 दीपक की पूजा करें.

इसके बाद भगवान शिव-पार्वती की पूजा करें.

पूजा में मां पार्वती को कुमकुम, चंदन, हल्दी, मेहंदी, लाल फूल, अक्षत और अन्य पूजा की सामग्री चढ़ाएं.

वहीं भगवान शिव गणेश और अग्निदेव को अबीर, गुलाल, चंदन और अन्य सामग्री चढ़ाएं.

इस दिन अप्सरा रंभा के विभिन्न नामों की पूजा करने से व्यक्ति को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जानिए रंभा तीज के दिन किस तरह से पूजा अर्चना करनी चाहिए जानिए क्या है इसका महत्व-

जानिए रंभा तीज का क्या महत्व है

रंभा तीज का यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस बार यह व्रत 2 जून गुरुवार को रखा जाने वाला है। इस व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, विडाल योग आदि का निर्माण हो रहा है। तृतीया तिथि का आरंभ 1 जून की रात को 9:47 से शुरु होगा और 3 जून की रात 12:17 पर समाप्त हो जाएगा। इस व्रत के दिन विधि-विधान से पूजा पाठ करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इससे दांपत्य जीवन भी अच्छा बना रहता है। इस व्रत को पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन स्त्री रखती है। वहीं कुंआरी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए रखती है।


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