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शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

Mangal Gochar 2022: शनि और मंगल का मिथुन राशि में बनेगा षडाष्टक योग इन राशियों को मिलेंगे बेहद शुभ परिणाम

Mangal Gochar 2022: शनि और मंगल का मिथुन राशि में बनेगा षडाष्टक योग इन राशियों को मिलेंगे बेहद शुभ परिणाम

Mangal Gochar 2022: शनि और मंगल का मिथुन राशि में बनेगा षडाष्टक योग
Mangal Gochar 2022: शनि और मंगल का मिथुन राशि में बनेगा षडाष्टक योग इन राशियों को मिलेंगे बेहद शुभ परिणाम


मंगल 16 अक्टूबर 2022 रविवार के दिन दोपहर 12 बजकर 04 मिनट मिथुन राशि में गोचर करेंगे।

Mars Transit 2022: मंगल ग्रह को एक राशि से दूसरी राशि में जाने में लगभग 45 दिनों का समय लगता है। मंगल अब वृषभ राशि से निकलकर 16 अक्टूबर 2022, रविवार दोपहर 12 बजकर 04 मिनट पर अगली राशि मिथुन में गोचर करेंगे। मिथुन राशि का स्वामी बुध है, जिसे मंगल का शत्रु ग्रह माना जाता है। इसके अलावा मकर राशि में मौजूद शनि के साथ मंगल षडाष्टक योग बनाएंगे। इस योग को काफी अशुभ फल देनेवाला माना जाता है। ऐसे में मंगल के प्रभाव से जहाँ देशभर में बदलाव आएंगे, वहीं इस गोचर का प्रभाव सभी राशि के जातकों पर भी पड़ने वाला है। जिनकी कुंडली में मंगल अशुभ भावों का स्वामी है, उनके विवाह में समस्या आ सकती है, शत्रु बढ़ सकते हैं और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन कुछ राशियों के लिए मंगल का ये गोचर शुभ परिणाम भी लेकर आएगा।

मिथुन राशि में मंगल का होगा गोचर और 14 दिन के अंतराल में होंगे  वक्री: तिथि और समय

इसके बाद, 30 अक्टूबर 2022 को 06 बजकर 19 मिनट पर वक्री हो जाएंगे और इस अवस्था में मंगल ग्रह मिथुन राशि में 13 नवंबर तक रहेंगे। इस दौरान कुछ राशि के जातकों को लाभ होगा, तो कुछ राशियों के जातकों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि में किन राशि के जातकों को शुभ फल की प्राप्ति होगी।

मंगल ग्रह की स्थिति से किन – किन राशियों को होगा लाभ?

मेष राशि

मंगल का ये गोचर आपके तृतीय भाव में होगा। इस अवधि में आप अत्यधिक धैर्यवान और साहसी बनेंगे और फैसले लेने में जो समस्या आ रही थी, वो दूर हो जाएगी। कार्यस्थल पर आपकी ऊर्जा और काम के प्रति समर्पण की वजह से वरिष्ठ आपकी जमकर सराहना करेंगे। लेकिन इस दौरान अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें। अन्यथा, वाद-विवाद की वजह से आपका मानसिक तनाव बढ़ेगा और दीर्घावधि में नुकसान होगा।

सिंह राशि

मंगल का ये गोचर आपके एकादश भाव में होगा। ऐसे में आपको आय के क्षेत्र में अनुकूल परिणाम मिलेगा। इस अवधि में आर्थिक जीवन में सर्वाधिक उन्नति मिलेगी और आप अपनी अधूरी पड़ी सुख-सुविधाओं को पूरा कर पाएंगे। कार्यक्षेत्र पर मंगल का ये प्रभाव आपको ऊर्जावान बनाएगा। साथ ही दांपत्य जीवन से भी आप संतुष्ट रहेंगे। पारिवारिक जीवन में शांति रहेगी। इस स्थिति में ये आपको अनुकूल परिणाम देने का कार्य करेंगे। आपको आर्थिक जीवन में उन्नति मिलेगी और आपकी सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। 

कन्या राशि

मंगल का ये गोचर आपकी राशि के कर्म भाव यानी दशम स्थान में हो रहा है। मंगल की ये स्थिति आपको करियर में अनुकूल फल मिलने के योग बनाएगी। आर्थिक जीवन में आपको अपार धन लाभ होगा। आप वाहन और प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान कर सकते हैं। करियर में भी स्थितियां आपके पक्ष में होगी और आप रोजगार या व्यवसाय से जुड़ी अपनी जिम्मेदारी को भली-भांति पूरा करेंगे।

मकर राशि

मंगल का ये गोचर आपकी राशि के षष्टम भाव में होगा। क्रूर ग्रह का छठे भाव में गोचर आपको उत्तम परिणाम दिलाएगा। कार्यक्षेत्र में आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सक्षम रहेंगे। साथ ही प्रतिस्पर्द्धा की भावना की वजह से शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय आदि में तेजी से प्रगति करेंगे। यदि आप व्यापार से जुड़े हैं, तो आप इस समय सभी महत्वपूर्ण निर्णय ले सकेंगे, जिससे आग चलकर आपको काफी लाभ होगा। इस समय आपके शत्रु परास्त होंगे। आपकी आय में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आप बेहतर प्रदर्शन दे सकेंगे। बिजनेस में भी तरक्की हासिल होगी।

मीन राशि

मंगल देव आपकी राशि से चतुर्थ यानी सुख भाव में गोचर करेंगे। इसके चलते आपके जीवन में आर्थिक समृद्धि आने की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही आप किसी चल-अचल संपत्ति या प्रॉपर्टी से भी धन अर्जित करेंगे। व्यापारियों को अपने बिज़नेस के विस्तार में मदद मिलेगी। ये अवधि पारिवारिक जीवन में भी आपको अपने परिवार के सदस्यों का सहयोग दिलाएगी। साथ ही शादीशुदा जातक अपने साथी के साथ मिलकर दांपत्य सुख का आनंद उठा सकेंगे। इस अवधि में आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। आप धन जोड़ने में भी सफल रहेंगे। परिवार का माहौल सुखद रहेगा।

कुंडली के 12 भावों पर कैसा होगा मंगल का प्रभाव? 

कुंडली में मंगल के वक्री होने के कारण जातक के स्वभाव में नकारात्मकता, गुस्सा और आक्रामकता देखी जा सकती है। वक्री मंगल जातक में आलस्य को बढ़ावा देता है। इस स्थिति में जातक खुद को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं, काम को सही ढंग से संभालने में सक्षम नहीं होते हैं  जिसके चलते जातकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मंगल के मिथुन राशि में वक्री होने का प्रभाव सभी 12 भावों पर किसी न किसी रूप में ज़रूर पड़ेगा। आइए जानते हैं इसका जातकों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।

प्रथम भाव: कुंडली में मंगल के वक्री होने पर व्यक्ति झूठ बोलने लगता है और विपरीत लिंग के प्रति उसका आकर्षण बढ़ता है। जातक में अहंकार पैदा हो जाता है और स्वयं को सब कुछ समझने की भूल करने लगता है।

दूसरा भाव: जब वक्री मंगल द्वितीय भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति को गलत काम करने के लिए प्रेरित करने लगता है। ऐसे में वह व्यक्ति विदेशी महिलाओं से संबंध रखने लगता है और भौतिक सुखों में पड़ जाता है। इतना ही नहीं, अपने परिवार के सदस्यों का भी सम्मान नहीं करता है।

तृतीय भाव: तृतीय भाव में बैठे वक्री मंगल के कारण जातक परिवारजनों का सम्मान करना भूल जाता है और उनके साथ बहस करने लगता है। परिजनों से उसके मनमुटाव रहने लगते हैं। ऐसा व्यक्ति अपने आप में घमंडी हो जाता है।

चतुर्थ भाव: चतुर्थ भाव में मंगल के होने से जातक क्रोधी और ज़िद्दी हो जाता है। माता-पिता से लड़ाई झगड़ा करना उसका स्वभाव बन जाता है। ऐसा व्यक्ति घमंड के चलते अपने दोस्तों से बातचीत नहीं करता क्योंकि वह लोगों को नीचा दिखाने के लिए अग्रसर रहता है।

पंचम भाव: पंचम भाव में, जब मंगल वक्री होता है तो सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि इस स्थिति में मनुष्य का मन गलत कामों में लगने लगता है। ऐसे व्यक्ति जीवन के सबसे बुरे दिनों से गुजरता है और कई बार तो उसकी बनी बनाई मान प्रतिष्ठा खराब हो जाती है।

छठा भाव: षष्टम भाव में वक्री मंगल के कारण मनुष्य की सेहत संबंधित परेशानियां बढ़ने लगती हैं। कई बार इंसान बड़ी बीमारियों से घिर जाता हैं।

सप्तम भाव: जब कुंडली के सप्तम भाव में मंगल वक्री होता है तो मनुष्य को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साझेदारी में किया गया व्यापार नुकसान देने लगता है। कई बार पार्टनरशिप में भी धोखा मिलता है और आर्थिक नुकसान हो जाता है। जातक कोर्ट कचहरी के चक्कर में फंस जाता है और मुकदमे से बच नहीं पाता है।

अष्टम भाव: अष्टम भाव में स्थित वक्री मंगल जातक को मानसिक रूप से कमजोर करता है। छोटी-छोटी बातों पर जातक परेशान हो जाता है। दुख की स्थिति का सामना करने की भी उसमें क्षमता नहीं रहती। समाज में मान प्रतिष्ठा की कमी हो जाती है। इतना ही नहीं नौकरी और व्यवसाय आदि के कामों में भी मन नहीं लगता है।

नवम भाव: नवम भाव में वक्री मंगल मनुष्य को छल कपट वाला बनाता है, वह साधु बनकर लोगों को ठगना सिखाता है। जातक को उसके लक्ष्य से भटकाने का प्रयास करता है।

दशम भाव: दशम भाव का वक्री मंगल जातक को लक्ष्य से भटकाता है। यदि कोई अपना करियर बनाना चाहे तो भी उसमें रुकावटें खड़ी कर देता है। उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता है, साथ ही गुरुजनों से भी वैचारिक मतभेद होने लगता है जिससे उसका करियर बर्बादी की तरफ जाने लगता है।

एकादश भाव: एकादश भाव में वक्री मंगल, जातक की दोस्ती अच्छे लोगों से नहीं करवाता हैं और जिन लोगों से वह दोस्ती करता है उसका वह कभी साथ नहीं देते और बुरा चाहते हैं। ऐसा जातक नए दोस्त बनाना और लोगों से घुलना मिलना पसंद नहीं करता हैं ।

द्वादश भाव : द्वादश भाव का वक्री मंगल, मनुष्य की जीवनशैली को बिगाड़ देता है। व्यक्ति को क्रोध करने पर मजबूर करता है। ऐसे में लड़ाई झगड़े बढ़ने लगते हैं और इसका प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर पड़ता हैं। ऐसा व्यक्ति अपनी मनमानी करने पर उतारू रहता है।

Mangal Gochar 2022: शनि और मंगल का मिथुन राशि में बनेगा षडाष्टक योग


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