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| 10 mythological facts about Akshaya Tritiya, why every work started on this day gets auspicious results |
अक्षय तृतीया महापर्व आज
पुण्य भी अक्षय और पाप भी अक्षय
बाजारवाद ने पर्व को स्वर्ण रजत की खरीद से जोड़ा
आज ही अनंत से प्रगट हुए भगवान विष्णु
प्रारंभ हुई सृष्टि
हमारी संस्कृति का महान पर्व है अक्षय तृतीया:-
यही वह दिन है जब अनादि विष्णु अनंत ब्रह्मांड से प्रगट हुए थे और सृष्टि का शुभारंभ हुआ था । अक्षय तृतीया के दिन किए गए सभी पुण्यकर्म अक्षय रहते हैं। इसी तरह किए गए पाप भी कभी नष्ट नहीं होते, उनका फल भुगतना ही पड़ता है । गंगोत्री मंदिर के कपाट इसी दिन खुलते हैं । यह पावन दिन अनेक महापुरुषों के नामों से भी जुड़ा हुआ है ।
इस पर्व का सोने चांदी की खरीद से कोई लेना देना नहीं ।
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया पूर्ण तिथि है:-
भगवान विष्णु के प्रकाट्योत्सव के साथ प्रकृति और सृष्टि जन्म लेती हैं । चार युगों में प्रथम सतयुग और द्वितीय त्रेतायुग का आरंभ जिस दिन हुआ, वह अक्षय तृतीया ही थी। अन्नपूर्णा अक्षय तृतीया के दिन जन्मीं और कुबेर के लंबे तप का समापन इसी दिन हुआ । विष्णु पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार ऋषि वेदव्यास ने गणेश से पुराण, महाभारत आदि ग्रंथों के लेखन का कार्य अक्षय तृतीया को शुरू कराया।
जैन धर्म के अनुसार अक्षय तृतीया का महत्व:-
जैन धर्म के प्रवर्तक राजा ऋषभदेव के तीर्थंकर भगवान आदिनाथ बनने की तिथि भी अक्षय तृतीया है । भगवान परशुराम के अवतरण दिवस की तिथि यही दिन है। भगवान विष्णु के प्रकट होने के साथ ही महालक्ष्मी का आगमन हुआ और लक्ष्मीनारायण की पूजा प्रारंभ हुई । कालांतर में लक्ष्मीनारायण को सत्यनारायण के स्वरूप की मान्यता इसी वैशाख शुक्ल अक्षय दिवस पर मिली। शास्त्र कहते हैं कि बद्रीनाथ की मूर्ति अलकनंदा से निकालकर शंकराचार्य ने इसी दिन पूजा प्रारंभ कराई थी ।
स्वयं सिद्धि योग में पड़ रही अक्षय तृतीया:-
अक्षय पूर्णिमा स्वयं सिद्धि योग में पड़ रही है। कृतिका नक्षत्र में कोई भी कर्म किया जाए तो उसे कर्म सिद्धि योग कहा जाता है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दारिद्रों की सहायता करने से मनुष्य के अनेक रोग शोक नष्ट हो जाते हैं । इस दिन अच्छा या बुरा जैसा भी कर्म करेंगे वह नष्ट नहीं होगा, अक्षय रहेगा। पशुओं को चारा डालने तथा पक्षियों को दाना खिलाने की शुरुआत इस दिन की जा सकती है।
इस दिन बड़ी संख्या में विवाह होते हैं, जिन्हें सुझाने की जरूरत नहीं है। राजस्थान में इस पर्व को आखातीज कहा जाता है । आखातीज पर पहले बड़ी संख्या में बाल विवाह हुआ करते थे । यह प्रथा अब बंद कराई जा चुकी है । अक्षय तृतीया के दिन भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा विधि विधान से करनी चाहिए । सोने चांदी की खरीद से अक्षय तृतीया को शास्त्रों ने नहीं, आधुनिक बाजारवाद ने जोड़ा है । अक्षय तृतीया धातु खरीद का नहीं, शुभ कर्मों से पुण्य खरीदने का पर्व है । यह पर्व जन जन के लिए शुभ हो यही कामना।
अक्षय तृतीया के 10 पौराणिक तथ्य:-
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🌞⭕हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को *अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। महावीर पंचांग के अनुसार इस बार यह पर्व 22 अप्रैल 2023 शनिवार को मनाया जाएगा। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा। अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं। गंगोत्री धाम के पट खोले जाते हैं और जगन्नाथ भगवान के सभी रथों को बनाना प्रारम्भ किया जाता है।
🚩१. परशुराम का जन्म :- इस दिन भगवान नर-नारायण सहित परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था।
🚩२. अक्षय कुमार का जन्म :- इसी दिन ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी हुआ था।
🚩३. कुबेर जी को मिला खजाना :- इस दिन यक्षराज कुबेर को खजाना मिला था।
🚩४. गंगा अवतरण :- एक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा का अवतरण भी हुआ था।
🚩५. सुदामा कृष्ण मिलन :- इसी दिन सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे।
🚩६. ऋषभदेव के उपवास का पारण :- प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान के 13 महीने का कठिन उपवास का पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया था।
🚩७. युग का प्रारंभ :- इसी दिन सतयुग और त्रैतायुग का प्रारंभ हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ।
🚩८. महाभारत की रचना :- अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था।
🚩९. कनकधारा स्त्रोत :- आदि शंकराचार्य ने कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी।
🚩१०. युद्ध समाप्त :- इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई थी।
🚩#हरिऊँ🚩
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शास्त्रों में अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है:-
अक्षय तृतीया के दिन मांगलिक कार्य जैसे-विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार अथवा उद्योग का आरंभ करना अति शुभ फलदायक होता है। सही मायने में अक्षय तृतीया अपने नाम के अनुरूप शुभ फल प्रदान करती है। अक्षय तृतीया पर सूर्य व चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहते हैं। आइए जानें 25 बातों से अक्षय तृतीया का महत्व...
1 .नया वाहन लेना या गृह प्रवेश करना, आभूषण खरीदना इत्यादि जैसे कार्यों के लिए तो लोग इस तिथि का विशेष उपयोग करते हैं। मान्यता है कि यह दिन सभी का जीवन में अच्छे भाग्य और सफलता को लाता है। इसलिए लोग जमीन जायदाद संबंधी कार्य, शेयर मार्केट में निवेश रीयल एस्टेट के सौदे या कोई नया बिजनेस शुरू करने जैसे काम भी लोग इसी दिन करने की चाह रखते हैं...
2 .अक्षय तृतीया के विषय में मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाता है उसमें बरकत होती है। यानी इस दिन जो भी अच्छा काम करेंगे उसका फल कभी समाप्त नहीं होगा अगर कोई बुरा काम करेंगे तो उस काम का परिणाम भी कई जन्मों तक पीछा नहीं छोड़ेगा
3. धरती पर देवताओं ने 24 रूपों में अवतार लिया था। इनमें छठा अवतार भगवान परशुराम का था। पुराणों में उनका जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था।
4. इस दिन भगवान विष्णु के चरणों से धरती पर गंगा अवतरित हुई। सतयुग, द्वापर व त्रेतायुग के प्रारंभ की गणना इस दिन से होती है।
5.शास्त्रों की इस मान्यता को वर्तमान में व्यापारिक रूप दे दिया गया है जिसके कारण अक्षय तृतीया के मूल उद्देश्य से हटकर लोग खरीदारी में लगे रहते हैं। वास्तव में यह वस्तु खरीदने का दिन नहीं है। वस्तु की खरीदारी में आपका संचित धन खर्च होता है।
6.“न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगयां समम्।।”
वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया समान कोई तिथि नहीं है।
7. वैशाख मास की विशिष्टता इसमें आने वाली अक्षय तृतीया के कारण अक्षुण्ण हो जाती है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाए जाने वाले इस पर्व का उल्लेख विष्णु धर्म सूत्र, मत्स्य पुराण, नारदीय पुराण तथा भविष्य पुराण आदि में मिलता है।
8.यह समय अपनी योग्यता को निखारने और अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए उत्तम है।
9. यह मुहूर्त अपने कर्मों को सही दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। शायद यही मुख्य कारण है कि इस काल को ‘दान’ इत्यादि के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
10. ‘वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आखातीज के रुप में मनाया जाता है भारतीय जनमानस में यह अक्षय तीज के नाम से प्रसिद्ध है।
11.पुराणों के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान,दान,जप,स्वाध्याय आदि करना शुभ फलदायी माना जाता है इस तिथि में किए गए शुभ कर्म का फल क्षय नहीं होता है इसको सतयुग के आरंभ की तिथि भी माना जाता है इसलिए इसे’कृतयुगादि’ तिथि भी कहते हैं ।
12.यदि इसी दिन रविवार हो तो वह सर्वाधिक शुभ और पुण्यदायी होने के साथ-साथ अक्षय प्रभाव रखने वाली भी हो जाती है।
13. मत्स्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन अक्षत पुष्प दीप आदि द्वारा भगवान विष्णु की आराधना करने से विष्णु भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा संतान भी अक्षय बनी रहती है।
14.दीन दुखियों की सेवा करना, वस्त्रादि का दान करना ओर शुभ कर्म की ओर अग्रसर रहते हुए मन वचन व अपने कर्म से अपने मनुष्य धर्म का पालन करना ही अक्षय तृतीया पर्व की सार्थकता है।
15. कलियुग के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करके दान अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से निश्चय ही अगले जन्म में समृद्धि, ऐश्वर्य व सुख की प्राप्ति होती है।
16. भविष्य पुराण के एक प्रसंग के अनुसार शाकल नगर रहने वाले एक वणिक नामक धर्मात्मा अक्षय तृतीया के दिन पूर्ण श्रद्धा भाव से स्नान ध्यान व दान कर्म किया करता था जबकि उसकी पत्नी उसको मना करती थी,मृत्यु बाद किए गए दान पुण्य के प्रभाव से वणिक द्वारकानगरी में सर्वसुख सम्पन्न राजा के रुप में अवतरित हुआ।
17. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सामर्थ्य अनुसार जल,अनाज,गन्ना,दही,सत्तू,फल,सुराही,हाथ से बने पंखे वस्त्रादिल का दान करना विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है।
18. दान को वैज्ञानिक तर्कों में ऊर्जा के रूपांतरण से जोड़ कर देखा जा सकता है। दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित करने के लिए यह दिवस सर्वश्रेष्ठ है।
19. यदि अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र को आए तो इस दिवस की महत्ता हजारों गुणा बढ़ जाती है, ऐसी मान्यता है। किसानों में यह लोक विश्वास है कि यदि इस तिथि को चंद्रमा के अस्त होते समय रोहिणी आगे होगी तो फसल के लिए अच्छा होगा और यदि पीछे होगी तो उपज अच्छी नहीं होगी।
20. इस दिन प्राप्त आशीर्वाद बेहद तीव्र फलदायक माने जाते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की गणना युगादि तिथियों में होती है। सतयुग, त्रेता और कलयुग का आरंभ इसी तिथि को हुआ और इसी तिथि को द्वापर युग समाप्त हुआ था।
21.रेणुका के पुत्र परशुराम और ब्रह्मा के पुत्र अक्षय कुमार का प्राकट्य इसी दिन हुआ था। इस दिन श्वेत पुष्पों से पूजन कल्याणकारी माना जाता है।
22.धन और भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति तथा भौतिक उन्नति के लिए इस दिन का विशेष महत्व है। धन प्राप्ति के मंत्र, अनुष्ठान व उपासना बेहद प्रभावी होते हैं। स्वर्ण, रजत, आभूषण, वस्त्र, वाहन और संपत्ति के क्रय के लिए मान्यताओं ने इस दिन को विशेष बताया और बनाया है। बिना पंचांग देखे इस दिन को श्रेष्ठ मुहुर्तों में एक माना जाता है।
23.दान करने से जाने-अनजाने हुए पापों का बोझ हल्का होता है और पुण्य की पूंजी बढ़ती है। अक्षय तृतीया के विषय में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान खर्च नहीं होता है, यानी आप जितना दान करते हैं उससे कई गुणा आपके अलौकिक कोष में जमा हो जाता है।
24. मृत्यु के बाद जब अन्य लोक में जाना पड़ता है तब उस धन से दिया गया दान विभिन्न रूपों में प्राप्त होता है। पुनर्जन्म लेकर जब धरती पर आते हैं तब भी उस कोष में जमा धन के कारण धरती पर भौतिक सुख एवं वैभव प्राप्त होता है। इस दिन स्वर्ण, भूमि, पंखा, जल, सत्तू, जौ, छाता, वस्त्र कुछ भी दान कर सकते हैं। जौ दान करने से स्वर्ण दान का फल प्राप्त होता है।
25. इस तिथि को चारों धामों में से उल्लेखनीय एक धाम भगवान श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं। अक्षय तृतीया को ही वृंदावन में श्रीबिहारीजी के चरणों के दर्शन वर्ष में एक बार ही होते हैं।
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