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बुधवार, 20 मार्च 2024

24 और 25 March 2024 पर भद्रा और चन्द्र ग्रहण की भ्रांतियों से मुक्त होकर मनाए होली का उत्सव

Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024
Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024, free from misconceptions about Bhadra and lunar eclipse


Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024 चन्द्र ग्रहण की भ्रांतियों से मुक्त होकर मनाए होली का उत्सव: 

25 मार्च 2024 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में मान्य नहीं होगा क्योंकि यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। उपछाया चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है, जिससे चंद्रमा पर हल्की छाया पड़ती है, लेकिन यह पूरी तरह से ग्रहण नहीं होता है। भारत में केवल पूर्ण चंद्र ग्रहण ही मान्य होते हैं, जिनमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है।

यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, यह केवल यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। 

Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024
Holi Celebrate


इसलिए, 25 मार्च 2024 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से मान्य नहीं होगा।

Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024
Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024, free from misconceptions about Bhadra and lunar eclipse


होलिका-दहन का समय:

24 मार्च, 2024 प्रदोष व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन भद्रा रहितकाल में होलिका-दहन किया जाता है। 

यथा-'सा प्रदोषव्यापिनी भद्रारहित ग्राह्या ।। (धर्मसिन्धुः)

Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024
Celebrate Holi on 24 and 25 March 2024, free from misconceptions about Bhadra and the lunar eclipse

(स्त्रोत = मुहूर्त चिंतामणि {ज्योतिषाचार्य डॉ. सरेश चन्द्र मिश्र} पृष्ठ संक्या 65 )

यदि प्रदोषकाल के समय भद्रा हो तो दूसरे दिन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होलिका दहन करना चाहिए। यदि दूसरे दिन पूर्णिमा प्रदोष-व्यापिनी न हो तो पहिले दिन भद्रा समाप्ति पर होली जलाएं। होलिकादहन अनिवार्य होता है, ऐसे में यदि भद्रा निशीथ (अर्द्धरात्रि) के बाद या निशीथ में समाप्त हो तो भद्रा की पूछ अवधि में होलिका दहन करे |

ध्यान दें - 

इसदिन 24 मार्च, 2024 भद्राकाल रात्रि 7:54. से 10:07 बजे तक रहेगा, परिस्थिति के अनुसार भद्रा काल से पहले शाम 06:33 से 07:50 तक होलिकादहन करें अथवा शास्त्रनिर्देशानुसार भद्रा के बाद रात्रि 10:10 बजे से निशीथकाल रात्रि 12 :34 से पहले ही होलिका-दहन करना चाहिए।

'परदिने प्रदोष-

स्पर्शाभावे पूर्वदिने यदि निशीथात्प्राक् - भद्रासमाप्तिः तदा भद्रावसानोत्तरमेव होलिका-दीपनम्। निशीथोत्तरं भद्रा समाप्तौ भद्रामुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव।' 

(धर्मसिन्धुः)

इसवर्ष फाल्गुन पूर्णिमा (सं. 2080 वि.) केवल 24 मार्च, 2024 ई. को ही प्रदोषव्यापिनी है। 25 मार्च को तो वह प्रदोषकाल को बिल्कुल स्पर्श नहीं कर रही। 24 मार्च को भद्रा अर्द्धरात्रि (24-33 मि.) से पहिले 23घं.-13मिं. पर समाप्त हो रही है। अतः होलिका-दहन 24 मार्च, को रात्रि 23घं.-13मिं. के बाद ही करना होगा।

होलिका दहन व जप-ध्यान हेतु रात्रि-जागरण - 24 मार्च 2024

होली, धुलेंडी - 25 मार्च 2024

इस वर्ष 24 मार्च 2024, होलिका दहन को सुबह 9-53 से रात्रि 11-13 तक भद्रा है। शास्त्रों में भद्राकाल में होलिका दहन का निषेध है।अतः भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करना चाहिये ।

दिनांक 24 मार्च 2024 को होलिका दहन के लिए भद्रारहित शुभ मुहूर्त -

द्वारका (गुजरात) - 

रात्रि 11-14 से 1-00 तक

कावारत्ती (लक्षद्वीप) - 

रात्रि 11-14 से 12-45 तक

मुंबई (महाराष्ट्र) -

रात्रि 11-14 से 12-44 तक

दमन (दमन एवं दीव) - 

रात्रि 11-14 से 12-44 तक

पणजी (गोवा)- 

रात्रि 11-14 से 12-41 तक

पुणे (महाराष्ट्र) - 

रात्रि 11-14 से 12-40 तक

जम्मू (जम्मू-कश्मीर)  - 

रात्रि 11-14 से 12-36 तक

अमृतसर (पंजाब) - 

रात्रि 11-14 से 12-36 तक

चंडीगढ़ - 

रात्रि 11-14 से 12-29 तक

गुरुग्राम (हरियाणा) - 

रात्रि 11-14 से 12-28 तक

तिरुवनंतपुरम् (केरल) - 

रात्रि 11-14 से 12-28 तक

शिमला (हिमाचल प्रदेश) - 

रात्रि 11-14 से 12-27 तक

दिल्ली - 

रात्रि 11-14 से 12-27 तक

लेह (लेह-लद्दाख) - 

रात्रि 11-14 से 12-25 तक

बेंगलुरु (कर्नाटक) - 

रात्रि 11-14 से 12-25 तक

अहमदाबाद (गुजरात) - 

रात्रि 11-14 से 12-24 तक

हरिद्वार (उत्तराखंड) - 

रात्रि 11-14 से 12-23 तक

हैदराबाद (तेलंगाना) - 

रात्रि 11-14 से 12-22 तक

कानपुर (उत्तर प्रदेश) - 

रात्रि 11-14 से 12-18 तक

चेन्नई (तमिलनाडु)- 

रात्रि 11-14 से 12-15 तक

रायपुर (छत्तीसगढ़) - 

रात्रि 11-14 से 12-09 तक

विशाखापट्टनाम - 

रात्रि 11-14 से 12-03 तक

पटना (बिहार) - 

रात्रि 11-14 से 11-55 तक

रांची (झारखण्ड) - 

रात्रि 11-14 से 11-55 तक

भुवनेश्वर (ओड़िशा) - 

रात्रि 11-14 से 11-52 तक

कोलकाता (पश्चिम बंगाल) - 

रात्रि 11-14 से 11-42 तक

गंगटोक (सिक्किम) - 

रात्रि 11-14 से 11-41 तक

अगरतला (त्रिपुरा) - 

रात्रि 11-14 से 11-31 तक

गुवाहटी (असम) - 

रात्रि 11-14 से 11-29 तक

शिलांग (मेघालय) - 

रात्रि 11-14 से 11-28 तक

आइजॉल (मिजोरम) - 

रात्रि 11-14 से 11-25 तक

इटानगर (अरुणाचल प्रदेश) - 

रात्रि 11-14 से 11-21 तक

इंफाल (मणिपुर) - 

रात्रि 11-14 से 11-20 तक

कोहिमा (नागालैंड) - 

रात्रि 11-14 से 11-19 तक

Holi 2024 होलिका दहन के दिन इन कार्यों को करने से बचें?

होलिका दहन के दिन घर में सुख समृद्धि की कामना की जाती है इसलिए इस दिन भूलकर भी मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।

यदि आप धन वृद्धि की कामना करते हैं तो होलिका दहन के दिन कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न आ जाए किसी को भी पैसे उधार देने और लेने से बचना चाहिए।

बुजुर्गों को हमेशा सम्मान देना चाहिए और उनका अपमान नहीं करना चाहिए लेकिन खासतौर पर होलिका दहन के दिन बुजुर्गों का अपमान करने से बचें।

यदि संभव हो तो होलिका दहन के दिन किसी दूसरे के घर में खाना खाने से बचना चाहिए।

होलिका दहन के दिन कई तरह की नकारात्मक शक्तियां घूमती हैं इसलिए महिलाओं को इस दिन अपने बाल खुले नहीं छोड़ने छोड़ने चाहिए और बांध कर रखना चाहिए।

यदि कोई महिला गर्भवती है तो उसे होलिका दहन के दिन होलिका की परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।

Holi 2024 इन कामों को जरूर करें

होलिका दहन के बाद आपको अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर चंद्र देव के दर्शन करने चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। 

इसके अलावा, होलिका दहन से पहले होलिका की सात या 11 बार परिक्रमा करके उसमें मिठाई, उपले, इलायची, लौंग, अनाज, आदि चीज़ें डालना चाहिए इससे परिवार के सुख में वृद्धि होती है।

Holi 2024 होलिका दहन में राशि के अनुसार डालें आहुति

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलिका दहन में हमेशा राशि के अनुसार आहुति देनी चाहिए, जिससे जीवन में सुख-संपदा के अलावा शांति भी बनी रहे। आइए जानते हैं होलिका दहन में किसी राशि के व्यक्ति को कौन से चीज़ें अग्नि में आहुति देना शुभ माना गया है:

मेष राशि

मेष राशि के जातकों को होलिका दहन में गुड़ की आहुति देना बेहद चाहिए। ये आपके लिए भाग्यशाली साबित होगा।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों को होलिका दहन में बताशे की आहुति देना। ऐसा करने से आपको लाभ होगा।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों होलिका दहन में कपूर की आहुति देना चाहिए। ऐसा करने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों को होलिका दहन में चीनी की आहुति देना चाहिए। ऐसा करने से आपके हर काम बनने लगेंगे।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए गुड़ की आहुति देना लाभकारी रहेगा। ऐसा करने से आपकी हर मनोकामना पूरी होगी।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को कपूर की आहुति देना चाहिए। ऐसा करने से आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होगा।

तुला राशि

तुला राशि के जातकों को अक्षत की आहुति देना लाभकारी साबित होगा। ऐसा करने से आपको व्यापार और कार्यक्षेत्र दोनों में तरक्की हासिल होगी।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों को सूखा नारियल की आहुति देना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की आप पर विशेष कृपा बनी रहेगी।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों को होलिका दहन में पीली सरसों की आहुति देना चाहिए। यदि आप निःसंतान हैं और संतान प्राप्ति की कामना कर रहे हैं तो इसमें आपको सफलता मिलेगी। 

मकर राशि

मकर राशि के जातकों को लौंग होलिका की अग्नि में अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से आपको बिज़नेस के क्षेत्र में लाभ होगा और आपकी आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिलेगा।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों को होलिक दहन में काले तिल अग्नि में प्रवाहित करना चाहिए। ऐसा करने से आपको ग्रह दोष से मुक्ति मिल सकती है।

मीन राशि

मीन राशि के जातकों को होलिका दहन में सरसों डालना चाहिए। आपके घर में सुख-समृद्धि का आगमन होगा और आप हर चुनौतियों को आसानी से पार करने में सक्षम होंगे।

होलिका स्तोत्र

होलिका जलाते समय यह मंत्र पढ़ें--

अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः ।

अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ।

होली जलाते समय या होली जलाने के बाद परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथ जोड़ कर नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से सभी प्रकार से कल्याण होता है ---

|| होलिका स्तोत्र || (Holika Stotra)

पापं तापं च दहनं कुरु कल्याणकारिणि |

होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः ||१||

होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी |

ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव ||२||

वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च |

अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव ||३||

अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः |

अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव ||४||

त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च |

जल्पन्तु स्वेछ्या लोकाः निःशङ्का यस्य यन्मतम् ||५||

|| अस्तु ||

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