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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

Rakshason (राक्षसों) की उत्पत्ति का रहस्य: क्या वे रक्षक थे? Ravan वंश और Golden Lanka की (पूरी कथा) Puri Katha


✨ क्या राक्षस जन्म से ही बुरे थे या सृष्टि के रक्षक? जानिए ब्रह्मा द्वारा राक्षसों की उत्पत्ति, हेति और प्रहेति की कथा, स्वर्ण लंका का निर्माण, रावण का जन्म, शिव तपस्या और रामायण युद्ध तक का पूरा रोचक इतिहास। 🚩📜

👹 राक्षसों की उत्पत्ति कैसे हुई? क्या वे जन्म से ही बुरे थे या रक्षक? 🔱✨


वेद और पुराणों में देव, असुर, यक्ष, गंधर्व और नाग आदि जातियों का वर्णन मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिन्हें आज हम 'राक्षस' कहते हैं, उनका मूल काम क्या था और रावण का जन्म कैसे हुआ?

आइए जानते हैं राक्षस वंश का पूरा और रोचक इतिहास! 👇


1️⃣ रक्ष और यक्ष: उत्पत्ति का रहस्य 🌊

प्रारंभिक काल में जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो समुद्र और जल-प्राणियों की सुरक्षा के लिए कुछ जातियों को उत्पन्न किया।
जिन्होंने 'रक्षा' का भार संभाला, वे 'राक्षस' कहलाए। (शुरुआत में यह एक पवित्र कार्य माना जाता था)।
जिन्होंने 'यक्षण' (पूजन) स्वीकार किया, वे 'यक्ष' कहलाए।

2️⃣ हेति और प्रहेति: राक्षसों के प्रथम प्रतिनिधि 👑

ब्रह्मा जी के श्रम और क्रोध से 'हेति' और भूख से 'प्रहेति' नामक दो बलशाली भाइयों का जन्म हुआ। प्रहेति तपस्या में लीन हो गया, जबकि हेति ने राजपाट संभाला। हेति के वंश में आगे चलकर 'विद्युत्केश' का जन्म हुआ।

3️⃣ जब शिव-पार्वती ने लिया एक राक्षस पुत्र को गोद 🌙

विद्युत्केश की पत्नी ने अपने नवजात पुत्र को लावारिस छोड़ दिया था। तब उस अनाथ बालक पर भगवान शिव और माता पार्वती की नजर पड़ी। उन्होंने उसे गोद ले लिया और उसका नाम 'सुकेश' रखा। शिव जी के वरदान से वह अत्यंत शक्तिशाली और निर्भीक हो गया।

4️⃣ लंका का निर्माण और राक्षसों का अहंकार 🏰

सुकेश के तीन पराक्रमी पुत्र हुए— माल्यवान, सुमाली और माली।
इन तीनों भाइयों ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और अजेय होने का वरदान पाया। विश्वकर्मा जी से इन्होंने समुद्र तट पर 'त्रिकुट पर्वत' के निकट स्वर्ण लंका का निर्माण करवाया। लेकिन वरदान पाकर वे अहंकारी हो गए और यक्षों-देवताओं पर अत्याचार करने लगे।

5️⃣ रावण का जन्म और लंका पर अधिकार ⚔️

देवताओं से हारने के बाद राक्षसों को लंका छोड़नी पड़ी और लंका प्रजापति ब्रह्मा ने धनपति कुबेर (यक्ष) को सौंप दी।
सुमाली की पुत्री कैकसी का विवाह महर्षि विश्रवा से हुआ। इन्हीं के पुत्र हुए— महापराक्रमी रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और पुत्री शूर्पणखा। रावण ने अपनी माता के कहने पर शिव जी की तपस्या की, मायावी शक्तियां पाईं और अपने सौतेले भाई कुबेर से युद्ध कर लंका और पुष्पक विमान छीन लिया।

6️⃣ रावण का वंश और महाविनाश 🔥

रावण ने मंदोदरी से विवाह किया, जिससे मेघनाद, अक्षयकुमार आदि पुत्र हुए।
कुम्भकर्ण के पुत्रों में भीम (जिसके नाम पर भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग है) और विभीषण की पुत्री त्रिजटा (जो सीता जी की रक्षक थी) प्रमुख थे।
अपने अहंकार और अधर्म के कारण रावण ने देवलोक तक दुश्मनी मोल ली।
अंततः रामायण के महायुद्ध में विभीषण को छोड़कर लंका के समस्त राक्षस वंश का नाश हो गया और धर्म की जीत हुई।

।। जय जय सियाराम ।। 🙏🚩

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