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Astro Vastu Kosh - ज्योतिष एवं वास्तु
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
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🌍मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ते हैं? जानिए शेषनाग, वास्तु और आस्था का गहरा रहस्य🐍
🌍मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ते हैं? जानिए शेषनाग, वास्तु और आस्था का गहरा रहस्य🐍
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🌍नया घर बनाने से पहले नींव में चांदी का नाग और कलश गाड़ना, यह सिर्फ एक रस्म नहीं है। यह एक हज़ारों साल पुरानी आस्था है, जो पृथ्वी, परमात्मा और गृहस्वामी के बीच एक अदृश्य संबंध स्थापित करती है।
श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, पृथ्वी के नीचे सात लोक हैं: अतल, वितल, सतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल। इन सभी लोकों में सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता, फिर भी वहाँ अंधेरा नहीं है। नागों की दिव्य मणियों की आभा से वे लोक सदा प्रकाशित रहते हैं।
महर्षि शुकदेव जी के वचनों के अनुसार, पाताल से भी तीस हजार योजन नीचे स्वयं भगवान शेषनाग विराजमान हैं, जिनके विशाल फण पर यह समस्त पृथ्वी, अपने पर्वतों और सागरों सहित, टिकी हुई है।
महाभारत के भीष्मपर्व में स्पष्ट उल्लेख है:
"शेष चाकल्पयद्देवमनन्तं विश्वरूपिणम्। यो धारयति भूतानि धरां चेमां सपर्वताम्॥"
अर्थात, परमदेव ने विश्वरूप अनंत शेषनाग को प्रकट किया, जो पर्वतों सहित इस सम्पूर्ण पृथ्वी को धारण करते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है: "अनन्तश्चास्मि नागानाम्", यानी नागों में मैं शेषनाग हूँ।
जब स्वयं भगवान किसी रूप को अपनी विभूति कहें, तो उस रूप की महत्ता असंदिग्ध हो जाती है।
यह कर्मकांड किसी अंधविश्वास की उपज नहीं है। यह एक गहरी मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रार्थना है।
गृहस्वामी की भावना होती है: "जिस प्रकार शेषनाग ने अपने फण पर इस विशाल पृथ्वी को थामा हुआ है, उसी प्रकार मेरे इस भवन की नींव भी उनके आशीर्वाद से अडिग और दीर्घायु हो।"
यह प्रार्थना शब्दों में नहीं, प्रतीकों में की जाती है।
शेषनाग का निवास क्षीरसागर है। इसीलिए पूजन के कलश में दूध, दही और घी भरकर, मंत्रों के साथ उनका आह्वान किया जाता है।
इस पूजन में हर वस्तु एक प्रतीक है:
कलश स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप है। उसमें रखा सिक्का माता लक्ष्मी की उपस्थिति का द्योतक है। दूध और पुष्प नागों को प्रिय हैं, इसलिए इन्हें सादर अर्पित किया जाता है।
भगवान शिव के कंठ का आभूषण भी नाग ही है। लक्ष्मण जी और बलराम जी को शेष के अवतार माना गया है। जो देवता इतने महापुरुषों के जीवन से जुड़ा हो, उसका स्मरण नई गृहस्थी के शुभारंभ पर करना, यह हमारे पूर्वजों की दूरदर्शिता को दर्शाता है।
यह प्रथा आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है, क्योंकि आस्था को किसी प्रमाण की नहीं, केवल एक सच्चे हृदय की आवश्यकता होती है।
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About Akshay Jamdagni
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