Breaking

✨ "विपरीत परिस्थितियां कुछ लोगों को तोड़ देती हैं, और कुछ लोगों को रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार करती हैं" — अक्षय जमदग्नि ... 🌟 "आपका भविष्य आपके आज के फैसलों पर निर्भर करता है, ग्रहों की चाल को अपने पुरुषार्थ से बदलें" ... 🚀 "वास्तु सुधारेगा परिवेश, और विचार बदलेंगे आपका भविष्य" ... 💎 "Astro Vastu Kosh: जहाँ ज्ञान, ऊर्जा और प्रेरणा मिलते हैं" ...

🕉️ Astro Vastu Kosh 🔱

ज्योतिष | वास्तु | अंक ज्योतिष

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

27+ वर्षों का अनुभव | वैदिक ज्योतिष | वास्तु परामर्श | अंक ज्योतिष

सोमवार, 7 जून 2021

कभी ना लगाएं तुलसी को घर के इस कोने में, कंगाली नही छोड़ेगी पीछा


 हमारी भारतीय संस्कृति और शास्त्रों के अनुसार जिस घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा होता है, वहां पर कभी नकरात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती. ऐसी मान्यता है तुलसी के पौधे में साक्षात मां लक्ष्मी का वास होता है. इसके घर में होने से कंगाली दूर होती है।

अगर होती भी है तो यह उसे नष्ट कर घर में धन की वृद्धि करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं घर का एक ऐसा कोना है जहां पर कभी तुलसी नहीं लगानी चाहिए, आइए जाने इसके बारे में

पूर्व या उत्तर दिशा : तुलसी के गमले में दूसरा कोई पौधा न लगाएं। तुलसी हमेशा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में लगाएं।

दक्षिण में लगना होगा नुक़सान : वास्तु के अनुसार, घर के दक्षिण भाग को छोड़कर कहीं भी तुलसी का पौधा लगाया जा सकता है क्योंकि दक्षिण में लगा पौधा फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकता है।

शालिग्राम का पूजन : प्राचीन परम्परा से तुलसी का पूजन सद्गृहस्थ परिवार में होता आया है, जिनकी संतान नहीं होती, वे तुलसी विवाह भी कराते हैं। तुलसी पत्र चढ़ाए बिना शालिग्राम का पूजन नहीं होता।

पंचामृत में तुलसी : विष्णु भगवान को चढ़ाए श्राद्ध भोजन में, देव प्रसाद, चरणामृत, पंचामृत में तुलसी पत्र होना आवश्यक है अन्यथा वह प्रसाद भोग देवताओं को नहीं चढ़ता।

मरते हुए प्राणी के अंतिम समय में गंगाजल व तुलसी पत्र : मरते हुए प्राणी के अंतिम समय में गंगाजल व तुलसी पत्र दिया जाता है. तुलसी जितनी धार्मिक मान्यता किसी भी पेड़-पौधे की नहीं है।

भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है।

(1). हिक्काज विश्वास पाश्र्वमूल विनाशिन:।

पितकृतत्कफवातघ्नसुरसा: पूर्ति: गन्धहा।।

अर्थात  सुरसा यानी तुलसी हिचकी, खांसी, जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है।

(2). तुलसी कटु कातिक्ता हद्योषणा दाहिपित्तकृत।

दीपना कृष्टकृच्छ् स्त्रपाश्र्व रूककफवातजित।।

अर्थात  तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली दिल के लिए लाभकारी, त्वचा रोगों में फायदेमंद, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और मूत्र से संबंधित बीमारियों को मिटाने वाली है। यह कफ और वात से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करती है।

शास्त्रों में भी कहा गया है

(3). त्रिकाल बिनता पुत्र प्रयाश तुलसी यदि।

विशिष्यते कायशुद्धिश्चान्द्रायण शतं बिना।।

तुलसी गंधमादाय यत्र गच्छन्ति: मारुत:।

दिशो दशश्च पूतास्तुर्भूत ग्रामश्चतुर्विध:।।

अर्थात  यदि सुबह, दोपहर और शाम को तुलसी का सेवन किया जाए तो उससे शरीर इतना शुद्ध हो जाता है, जितना अनेक चांद्रायण व्रत के बाद भी नहीं होता। तुलसी की गंध जितनी दूर तक जाती है, वहां तक का वातारण और निवास करने वाले जीव निरोगी और पवित्र हो जाते हैं।

(4). तुलसी तुरवातिक्ता तीक्ष्णोष्णा कटुपाकिनी।

रुक्षा हृद्या लघु: कटुचौहिषिताग्रि वद्र्धिनी।।

जयेद वात कफ श्वासा कारुहिध्मा बमिकृमनीन।

दौरगन्ध्य पार्वरूक कुष्ट विषकृच्छन स्त्रादृग्गद:।।

अर्थात  तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली कफ, खांसी, हिचकी, उल्टी, कृमि, दुर्गंध, हर तरह के दर्द, कोढ़ और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। तुलसी को भगवान के प्रसाद में रखकर ग्रहण करने की भी परंपरा है, ताकि यह अपने प्राकृतिक स्वरूप में ही शरीर के अंदर पहुंचे और शरीर में किसी तरह की आंतरिक समस्या पैदा हो रही हो तो उसे खत्म कर दे। शरीर में किसी भी तरह के दूषित तत्व के एकत्र हो जाने पर तुलसी सबसे बेहतरीन दवा के रूप में काम करती है। सबसे बड़ा फायदा ये कि इसे खाने से कोई रिएक्शन नहीं होता है।

तुलसी की मुख्य जातियां

तुलसी मुख्यत: पांच प्रकार की होती है लेकिन घरों में दो प्रकार की तुलसी लगाई जाती हैं, ये हैं इन्हें रामा और श्यामा।

रामा तुलसी : रामा तुलसी को गौरी भी कहा जाता है क्योंकि इनके पत्तों का रंग हल्का होता है।

श्यामा तुलसी : श्यामा तुलसी के पत्तों का रंग काला होता है। इसमें कफनाशक गुण होते हैं और इसलिए इसे दवा के रूप में अधिक उपयोग में लाया जाता है।

वन तुलसी : वन तुलसी में जहरनाशक प्रभाव पाया जाता है, लेकिन इसे घरों में बहुत कम लगाया जाता है। आंखों के रोग, कोढ़ और प्रसव में परेशानी जैसी समस्याओं में यह कारगर दवा है।

मरूवक तुलसी : एक अन्य जाति मरूवक है, जो बहुत कम पाई जाती है। राजमार्तण्ड ग्रंथ के अनुसार किसी भी तरह का घाव हो जाने पर इसका रस बेहतरीन दवा की तरह काम करता है।

बर्बरी तुलसी : तुलसी की एक और जाति जो बहुत उपयोगी है वह है, बर्बरी तुलसी। इसके बीजों का प्रयोग वीर्य को गाढ़ा करने वाली दवा के रूप में किया जाता है।

तुलसी के फायदे

बुखार : जुकाम के कारण आने वाले बुखार में भी तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए।

त्वचा के रोगों : तुलसी के रस में पाए जाने थाइमोल तत्व से त्वचा के रोगों में लाभ होता है।

संक्रमण : तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ने से त्वचा के संक्रमण में फायदा मिलता है।

थकान होने पर : ज्यादा थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी का सेवन करें, थकान दूर होगी।

फ्लू संक्रमण : फ्लू के रोगियों को तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से काफी फायदा होता है।

ह्रदय और कोलेस्ट्रॉल : दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए यह अमृत समान है। इससे खून में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है।

माइग्रेन : रोजाना 4- 5 बार तुलसी की पत्तियाँ चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलता है।

मलेरिया : मलेरिया में तुलसी एक कारगर औषधि है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया जल्दी ठीक हो जाता है।

कैन्सर व ख़ून की ख़राबी : तुलसी के पत्तों को तांबे के पानी से भरे बर्तन में एक घंटे तक भीगा रहने दें। यह पानी पीने से बहुत से कैन्सर, हार्ट अटैक, ख़ून की ख़राबी जैसी बीमारियाँ पास नहीं आतीं।

पथरी : किडनी की पथरी होने पर रोगी को तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह तक पिलाएं, पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाएगी।

प्रतिरोधक क्षमता : शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा गुड़ डालकर सेवन करें, आराम मिलेगा।

खांसी व ज़ुकाम : तुलसी के रस में मुलहटी व थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेने से खांसी व ज़ुकाम की परेशानी दूर हो जाती है, आप चाहें तो चार-पांच लौंग भूनकर तुलसी के पत्तों के रस में मिलाकर भी पी सकते हैं।

काली या सुखी खांसी : तुलसी के पत्तों और अडूसा के पत्तों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से काली या सुखी खांसी दूर होती है। इसके अलावा तुलसी व अदरक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से भी खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है।



🔮 Astro Vastu Kosh

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

📌 Daily Panchang | Vedic Astrology | Vastu Guidance | Spiritual Wisdom

💥 👨‍👩‍👧‍👦 आपके एक गलत फैसले का असर केवल आप पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ सकता है। 💥

🛑 सही समय, सही दिशा और सही निर्णय जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। कई बार जल्दबाज़ी, भ्रम या प्रतिकूल समय में लिया गया निर्णय आर्थिक, व्यावसायिक, पारिवारिक और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दैनिक कॉस्मिक एनर्जी (Cosmic Energy), ग्रहों के गोचर, राहुकाल और शुभ-अशुभ समय को समझना अत्यंत आवश्यक है।

🔮 २७+ वर्षों के अनुभव से तैयार सटीक वैदिक पंचांग, दैनिक राशिफल, गोचर विश्लेषण और ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रतिदिन सबसे पहले प्राप्त करने के लिए अभी जुड़ें:

• 🟢 WhatsApp Channel: रोज सुबह सटीक पंचांग, राशिफल और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अपडेट प्राप्त करें।
👉 यहाँ क्लिक करके Follow करें

• 👥 Facebook Page: दैनिक वैदिक ज्ञान, ज्योतिषीय विश्लेषण, राशिफल और विशेष आध्यात्मिक सामग्री के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Like करें

• 💼 LinkedIn: व्यावसायिक एवं रणनीतिक मार्गदर्शन, करियर काउंसिलिंग और कॉरपोरेट वास्तु विश्लेषण के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Connect करें

⚠️ व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श (Paid Consultation)

दैनिक राशिफल और गोचर केवल सामान्य संकेत प्रदान करते हैं, लेकिन आपके जीवन, करियर, व्यापार, धन, विवाह, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।

📿 २७+ वर्षों के अनुभव के साथ गहन, प्रामाणिक और व्यक्तिगत वैदिक ज्योतिषीय परामर्श हेतु:

✍️ Astro Vastu Kosh Newsletter

👉 अपनी ईमेल दर्ज करें और विशेष वैदिक ज्योतिषीय विश्लेषण, गहन लेख तथा परामर्श संबंधी अपडेट प्राप्त करें:
👉 परामर्श प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए यहाँ क्लिक करें


क्या आप अपनी कुंडली या घर का वास्तु दिखाना चाहते हैं?
हमारे Facebook Page से जुड़ें और अपनी समस्याओं का समाधान पाएं।

फेसबुक Page Join करें

4 टिप्‍पणियां: