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रविवार, 27 फ़रवरी 2022

तिरंगे ने दिलवाया भारत को विदेशी धरती पर सम्मान

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तिरंगे ने दिलवाया भारत को विदेशी धरती पर सम्मान
तिरंगे ने दिलवाया भारत को विदेशी धरती पर सम्मानhttps://jyotishwithakshayji.blogspot.com/2022/02/blog-post_27.html


यूक्रेन में तिरंगा बना भारतीय छात्रों के सुरक्षित रहने की गारंटी, बंकर में मिली है को पनाह

भारतीय दूतावास ने भी संदेश दिया है कि जो जहां है, वहीं रुक जाए। अगर फिर भी कहीं जाना पड़े तो अपनी गाड़ी पर तिरंगा लगा लें

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यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र बंकरों में पनाह लिए हैं। खाने-पीने का सामान तक नहीं मिल रहा है तो कोई नमकीन-बिस्किट के सहारे जी रहा है। संकट की इस घड़ी में सबसे बड़ा सहारा बना है भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा। छात्र-छात्राएं इसे लगाकर पड़ोसी देशों की तरफ बढ़ रहे हैं। भारतीय दूतावास ने भी संदेश दिया है कि जो जहां है, वहीं रुक जाए। अगर फिर भी कहीं जाना पड़े तो अपनी गाड़ी पर तिरंगा लगा लें

उप्र के बागपत के एसीएमओ डा. गजेंद्र सिंह का बेटा मनीष चौहान इवानो मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है। मनीष ने पिता को मैसेज भेजा कि हम 30 भारतीय छात्र शरीर पर तिरंगा लगाकर रोमानिया बार्डर की ओर बढ़ गए हैं। जहां से वह स्वदेश लौटेंगे। उप्र के ही सिसाना निवासी आदित्य चौहान खार्किव में एक बंकर में दोस्तों के साथ छिपा हुआ है। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है

पूर्व बिहार, कोसी और सीमांचल के 49 छात्रों के यूक्रेन में फंसे रहने की सूचना मिल रही है। गिद्धौर के कुंदन कुमार के यूक्रेन में फंसे रहने की चिंता में उनकी मां तीन दिनों से खाना नहीं खा रही हैं। यूक्रेन में फंसे लोगों की सकुशल वापसी के लिए मुंगेर के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने विदेश मंत्री को ट्वीट किया है। सुपौल का सत्यजीत तीन दिनों से मेट्रो स्टेशन पर शरण लिए हुए है तो शिव दो दिनों से बंकर में छिपा है।

कटिहार की निक्की कुछ सहपाठियों के साथ 40 किमी पैदल चलकर पोलैंड की सीमा तक पहुंचीं, लेकिन उसे पोलैंड में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के अक्षत जोशी समेत राज्य के कई छात्र खारकीव में फंसे हुए हैं। वे कभी हास्टल तो कभी मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में छिपकर रात गुजार रहे हैं। उन्हें खाना-पानी तक बड़ी मुश्किल से नसीब हो रहा है। अक्षत के मुताबिक सेना ने उन्हें मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में भेज दिया। कई घंटे भूखे-प्यासे रहने के बाद देर शाम उन्हें हास्टल वापस जाने को कहा गया। अब बमुश्किल थोड़े से चावल व अंडे मिल पाए हैं।

यूक्रेन में मची तबाही ने मुजफ्फरपुर के दीवान रोड निवासी नतालया सुभानी को बेचैन कर दिया है। हर थोड़ी देर में वह ओडेशा में रह रही अपनी 60 वर्षीया मां ततियाना क्रसनिस्कयान से मोबाइल पर बात करती हैं। उन्होंने बताया कि घर के अंदर बने तहखाने में छिपी हुई हैं।

पंजाब के बठिंडा जिले का गुरप्रीत ¨सह यूक्रेन से बाहर निकलने के लिए अपने दोस्तों के साथ पिछले तीन दिन से पैदल चल रहा है। ये रात के 12 बजे तक पैदल चलने के बाद दो घंटे आराम करके फिर चल देते हैं। रविवार सुबह तक इनके पोलैंड के बार्डर तक पहुंचे की उम्मीद है, लेकिन वहां बार्डर पर भी छात्रों की लंबी लाइनें लगी हुई थी। लाइन में भी 24 घंटे निकल जाएंगे।

यूक्रेन के लवीव में बड़ी संख्या मे दिल्ली, हिमाचल व जम्मू के छात्र फंसे हुए हैं। दो डिग्री तापमान में ठंड के बीच गैस स्टेशन पर इनको रात काटनी पड़ रही है। खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका है। तीन दिन से केवल बिस्किट और पानी के सहारे जिंदगी कट रही है। कीव शहर से 550 किलोमीटर का सफर तय करके पोलैंड के बार्डर पर पहुंचे अमृतसर के जगजीत सिंह सन्नी, हरजिंदर सिंह, तरलोचन सिंह ने बताया कि हमारे पास खाने-पीने के लिए कुछ नहीं बचा। हमें बचाया जाए।

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