Aaj ka Panchang and Muhurt अग्नि पंचक की हुई शुरुआत, अगले 5 दिनों तक भूल से भी ना करें ये काम
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वार बृहस्पतिवार, 03 मार्च 2022
तिथि प्रतिपदा 09:36 PM तक उसके बाद द्वितीया
नक्षत्र पूर्व भाद्रपद 01:56 AM, Mar 04 तक
पक्ष शुक्ल पक्ष
माह फाल्गुन
सूर्योदय 06:19 AM
सूर्यास्त 06:01 PM
चंद्रोदय 06:51 AM
चन्द्रास्त 06:43 PM
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त 11:47 AM से 12:33 PM
अमृत काल मुहूर्त 06:10 PM से 07:43 PM
विजय मुहूर्त 02:07 PM से 02:54 PM
गोधूलि मुहूर्त 05:49 PM से 06:13 PM
सायाह्न संध्या मुहूर्त 06:01 PM से 07:15 PM
निशिता मुहूर्त 11:45 PM से 12:34 AM, Mar 04
ब्रह्म मुहूर्त 04:40 AM, Mar 04 से 05:29 AM, Mar 04
प्रातः संध्या 05:05 AM, Mar 04 से 06:18 AM, Mar 04
अशुभ मुहूर्त
दुष्टमुहूर्त 10:13:27 से 11:00:11 तक, 14:53:51 से 15:40:35 तक
कालवेला / अर्द्धयाम 16:27:19 से 17:14:03 तक
कुलिक 10:13:27 से 11:00:11 तक
यमघण्ट 07:06:31 से 07:53:15 तक
कंटक 14:53:51 से 15:40:35 तक
यमगण्ड 06:19:48 से 07:47:25 तक
राहुकाल 13:37:54 से 15:05:32 तक
गुलिक काल 09:15:02 से 10:42:40 तक
भद्रा कोई नहीं है
गण्ड मूल कोई नहीं है
Shubh Muhurat – 03 March 2022
अभिजीत मुहूर्त 11:47 AM से 12:33 PM
सर्वार्थ सिद्धि योग कोई नहीं है
अमृत सिध्दि योग कोई नहीं है
रवि योग कोई नहीं है
द्विपुष्कर योग कोई नहीं है
त्रिपुष्कर योग कोई नहीं है
अग्नि पंचक की हुई शुरुआत, अगले 5 दिनों तक भूल से भी ना करें ये काम
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक अशुभ है. इस दौरान कुछ जरूरी कार्य नहीं करना चाहिए. पंचांग के मुताबिक 01 मार्च से अग्नि पंचक की शुरुआत हो चुकी है
हिंदू धर्म में कोई शुभ काम शुभ समय और मुहूर्त को देखकर किया जाता है, जिससे उस काम सफलता प्राप्त होती है. ज्योतिष के मुताबिक अगर अशुभ समय या बिना मुहूर्त देखकर काम किया जाता है तो उसमें सफलता प्राप्त नहीं होती है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक पंचक अशुभ होता है. इस दौरान कुछ जरूरी कार्यों को करने की मनाही होती है. पंचांग के मुताबिक 01 मार्च से अग्नि पंचक की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में जानते हैं कि इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए.
पंचक 1 मार्च शाम 4 बजकर 31 मिनट से शुरू हो चुका है. इस अग्नि पंचक का समापन 06 मार्च सुबह 2 बजकर 29 मिनट पर होगा.
दिन के हिसाब से तय होते हैं पंचक के नाम
शास्त्रों के मुताबिक पंचक के नाम दिन के मुताबिक तय किए जाते हैं. रविवार से शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है. सोमवार से शुरू होने पर राज पंचक कहा जाता है. मंगलवार के दिन जब पंचक आरंभ होता है तो उसे अग्नि पंचक कहते हैं. शुक्रवार के आरंभ होने वाले पंचक को रोग पंचक कहते हैं. जबकि शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहते हैं.
अग्नि पंचक के दौरान क्या ना करें?
–ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अग्नि पंचक के दौरान लकड़ी, घास आदि जालने वाली वस्तुएं एकत्र नहीं करना चाहिेए.
–पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करना निषेध माना गया है. दरअसल यह दिशा यम और पितरों की मानी गई है.
–पंचक के दौरान घर नहीं बनवाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से घर में लड़ाई-झगड़े और धन की हानि होती है. इसके अलावा पंचक के दौरान क्रोध करने से परहेज करना चाहिए.
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