shani dev ki vahan शनि देव जी का वाहन कौआ क्यों होता है?
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shani dev ki vahan ki katha
कौआ शनिदेव को लेकर अपने काकलोक पहुंचा, जहां लंबे समय तक माता-पिता से दूर रहने के कारण कौए को मां-पिता की दुलार भरी फटकार मिली. मगर जब कौए ने शनिदेव को काकलोक में रखने की इच्छा जताई तो कौए के पिता भड़क उठे. इस पर कौए ने उन्हें बताया कि शनि की वजह से ही उनका पुत्र उनके सामने जिंदा खड़ा है
Mahima Shanidev Ki: शनिदेव की माता छाया सूर्यदेव की पत्नी संध्या की परछाई होकर भी उनके सभी दायित्वों का निर्वहन करती थीं.
Mahima Shanidev Ki: सूर्यदेव की पत्नी संध्या ने अपनी जरूरत के लिए अपनी छाया का निर्माण किया था. खुद तपस्या पर जाने से पहले उन्होंने छाया को अपने पति सूर्यदेव और संतानों यम और यमी की देखभाल के लिए छोड़ा था. मगर पति से छिपाकर तपस्या पर जाने के लिए संध्या ने छाया को अपने सभी उत्तरदायित्व समझा दिए थे, साथ ही चेतावनी भी दी कि वह सूर्यदेव से संयमित दूरी जरूर रखें, लेकिन यह सुनिश्वित रखें कि सूर्यदेव को उनमें संध्या का अक्स जरूर दिखे. पहाड़ों पर लंबी तपस्या पूरी करके जब संध्या लौटीं तो उन्हें पता चला कि छाया एक पुत्र प्राप्त कर चुकी हैं, जिसे कुरुप या छाया के चलते सांवला होने से पिता सूर्यदेव ने खुद परित्याग कर दिया है. यह देखकर संध्या छाया पर आग बबूला हो उठीं और उन्हें शनि समेत सूर्यलोक से निष्कासित करने के लिए योजनाएं बनाने लगीं.
छाया ने उठाया कदम तो खुद सूर्यलोक छोड़ गईं संध्या
रोज रोज की प्रताड़ना से परेशान छाया ने एक दिन संध्या को समझाने का प्रयास किया कि जब शनि महादेव से मिलकर जैसे ही लौटेंगे, वह खुद उनकी परछाई होने के नाते संध्या में ही लुप्त हो जाएंगी. मगर संध्या नहीं मानीं, ऐसे में छाया ने उन्हें चेताया कि अगर वह अब भी शनि का इंतजार किए बगैर कोई कदम उठाती हैं तो खुद छाया सूर्यदेव से उनके झूठ को उजागर कर देंगी, क्योंकि सूर्यदेव को अब तक नहीं पता था कि संध्या अपनी अनुपस्थिति में छाया को सूर्यलोक छोड़ गई थीं, जिनसे सूर्यदेव के पुत्र शनि जन्मे हैं. ऐसे में पत्नी के झूठ पर आग बबूला होकर वह संध्या को ही भस्म कर देंगे और यम यमी भी मां के अपराध को क्षमा नहीं करेंगे.
छाया ने कहा कि संध्या ने सूर्यलोक की स्वामिनी बनने की चाह में खुद अपने बच्चों यम-यमी के प्रति मोह नहीं दिखाया है, ऐसे में उन्हें उनकी मां कहलाने का कोई अधिकार नहीं. अब जब कि खुद छाया शनिदेव की कृपा से देवी बन चुकी हैं तो संध्या को खुद सूर्यलोक छोड़ना होगा, यह सुनकर संध्या भयभीत हो उठती हैं और मदद मांगने के लिए पिता भगवान विश्वकर्मा से गुहार लगाती हैं. मगर उन्हें यहां भी निराशा मिलती है, क्योंकि विश्वकर्मा भी जानते थे कि शनि छाया के पुत्र हैं और उन्हें अगर संध्या में अपनी माता की ममता का रूप नहीं दिखा तो वह माता छाया के लिए प्रलय ला सकते हैं. ऐसे में विश्वकर्मा ने भी पुत्री की मदद से मना कर दिया और मजबूरन संध्या को सूर्यलोक छोड़ना पड़ा.
Mahima Shanidev Ki : शनि देव (Shani Dev) की माता छाया सूर्यदेव की पत्नी संध्या की परछाई होने के चलते जीव रूप में नहीं थीं. लंबे तप के बाद संध्या के लौटने पर उन्हें खत्म हो जाना था. ऐसे में मां के प्राण बचाने के लिए शनि महादेव से वरदान मांगने पहुंचे. कई बाधाओं को पार कर वह माता छाया के लिए जीवन का वरदान तो ले आए, लेकिन संध्या की वापसी के बाद दोनों के बीच संघर्ष से पूरी तरह अनजान थे.
पद्म पुराण
संध्या शनि की माता छाया के बीच संघर्ष की स्थिति बनी हुई थी. सूर्यलोक में छाया की मौजूदगी से परेशान होकर संध्या ने छाया को खत्म करने के लिए सभी प्रयास किए, लेकिन पिता भगवान विश्वकर्मा नियति को जानते हुए छाया के साथ खड़े रहे. मान्यताओं के अनुसार एक बार संध्या ने छाया को खत्म करने के लिए सूर्य के तेज का इस्तेमाल करना चाहा तभी विश्वकर्मा आ गए और उन्होंने इसके लिए संध्या को कड़ी फटकार लगाई. संध्या ने पिता से विरोध जताया तो उन्होंने बताया कि छाया शनि के प्रयास और महादेव के वरदान से अब देवी बन चुकी हैं. वह किसी की भी छाया नहीं रहीं, इसलिए वह तुम्हारे किसी प्रयासों से प्रभावित नहीं होंगी.
इंद्र, दानव या मानव छाया को नहीं मिटा सकेंगे
भगवान विश्वकर्मा ने बेटी संध्या को बताया कि छाया को स्वयं महादेव से जीवन का वरदान मिला है. ऐसे में उन्हें संध्या तो क्या खुद देवराज इंद्र, सूर्यदेव और यहां तक कि ब्रह्मदेव नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं, जबकि असुर शनि के भय से कभी उनके पास नहीं फटक सकते हैं. अंतत: संध्या को हार माननी ही पड़ी.
Mahima Shani Dev Ki: शनिदेव माता छाया से बिछड़ने के बाद आहत होकर भटकने लगे, इस दौरान सहारा बना उनका वाहन कौआ.
Mahima Shani Dev Ki: सूर्यपत्नी संध्या के तिरस्कार और माता छाया से बिछड़ने के बाद शनिदेव ने हर किसी से संबंध खत्म कर सूर्यलोक त्याग दिया. साथ ही चेताया कि उन्हें अगर कोई मनाने उनके पीछे आया तो वह उसे भस्म कर देंगे. जाते-जाते पिता सूर्यदेव ने भी उन्हें रुकने का आग्रह किया, लेकिन शनिदेव की चेतावनी ने उन्हें कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया. मां की याद में भटकते हुए शनि जंगल, रेगिस्तान और वीरानों में घूम रहे थे, इस बीच उनका वाहन कौआ उनके पीछे पीछे ही रहा. एक दिन अचानक सामने आए कौए ने उनसे अपने साथ रखने की प्रार्थना की तो शनि एक बार फिर गुस्से से भर उठे, लेकिन कौए की याचना पर वह उसे साथ रखने के लिए मान गए.
काकलोक पहुंचे शनिदेव को कौए की मां ने दुलारा
कौआ शनिदेव को लेकर अपने काकलोक पहुंचा, जहां लंबे समय तक माता-पिता से दूर रहने के कारण कौए को मां-पिता की दुलार भरी फटकार मिली. मगर जब कौए ने शनिदेव को काकलोक में रखने की इच्छा जताई तो कौए के पिता भड़क उठे. इस पर कौए ने उन्हें बताया कि शनि की वजह से ही उनका पुत्र उनके सामने जिंदा खड़ा है. इस पर भावुक हुई कौए की माता ने शनि को पुत्र संबोधित कर खूब प्यार दुलार दिया और पिता भी शनि के काकलोक में रहने पर राजी हो गए.
आभार -- पद्म पुराण
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