Breaking

✨ "विपरीत परिस्थितियां कुछ लोगों को तोड़ देती हैं, और कुछ लोगों को रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार करती हैं" — अक्षय जमदग्नि ... 🌟 "आपका भविष्य आपके आज के फैसलों पर निर्भर करता है, ग्रहों की चाल को अपने पुरुषार्थ से बदलें" ... 🚀 "वास्तु सुधारेगा परिवेश, और विचार बदलेंगे आपका भविष्य" ... 💎 "Astro Vastu Kosh: जहाँ ज्ञान, ऊर्जा और प्रेरणा मिलते हैं" ...

🕉️ Astro Vastu Kosh 🔱

ज्योतिष | वास्तु | अंक ज्योतिष

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

27+ वर्षों का अनुभव | वैदिक ज्योतिष | वास्तु परामर्श | अंक ज्योतिष

गुरुवार, 26 मई 2022

18 Purana me ak Matsya Purana में नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन or वास्तु पुरुष की उत्पत्ति

18 Purana me ak Matsya Purana में नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन or वास्तु पुरुष की उत्पत्ति

18 Purana me ak Matsya Purana में नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन or वास्तु पुरुष की उत्पत्ति
18 Purana me ak Matsya Purana में नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन or वास्तु पुरुष की उत्पत्ति


वास्तु शास्त्र:मत्स्य पुराण के अनुसार भगवान शिव के पसीने से हुई थी वास्तु पुरुष की उत्पत्ति

भगवान शिव के पसीने से वास्तु पुरुष की उत्पत्ति हुई है। भगवान शिव का पसीना धरती पर गिरा तो उससे ही वास्तु पुरुष उत्पन्न होकर जमीन पर गिरा। वास्तु पुरुष को प्रसन्न करने के लिए वास्तु शास्त्र की रचना की गई। वास्तु पुरुष का असर सभी दिशाओं में रहता है। इसके बाद वास्तु पुरुष के कहने पर ब्रह्मा जी ने वास्तु शास्त्र के नियम बनाए। जिनके अनुसार कोई भी मकान या इमारत बनाई जाती है। इसके बाद भूमि पूजन से गृह प्रवेश तक हर मौके पर वास्तु पुरुष की पूजा का महत्व है। जिसके साथ ही भगवान शिव, गणेश और ब्रह्मा जी की पूजा जरूर करनी चाहिए। इससे भूमि शुद्ध हो जाती है और वहां जगह पर रहने वाले लोग किसी भी तरह परेशान नहीं होते।

भूमि पूजन से गृह प्रवेश तक, वास्तु पूजा जरूरी
पुराणों के अनुसार किसी भी तरह के निर्माण कार्य के मौके पर वास्तु पुरुष की पूजा की जाती है। ऐसा करने से शुभ फल मिलता है। इसलिए सबसे पहले भूमि पूजन के समय वास्तु देवता की पूजा की जाती है। इसके बाद नींव खोदते समय, मुख्य द्वार लगाते समय और गृह प्रवेश के दौरान भी वास्तु पुरुष की पूजा करने का विधान बताया गया है। इससे उस घर में रहने वाले लोग हर तरह की परेशानियों से दूर रहते हैं। उनको हर तरह का सुख और समृद्धि भी मिलती है।

वास्तु पुरुष हैं भवन के मुख्य देवता
वास्तु पुरुष को भवन का प्रमुख देवता माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार वास्तु पुरुष भूमि पर अधोमुख स्थित है। अधोमुख यानी उनका मुंह जमीन की तरफ और पीठ उपर की ओर हैं। सिर ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में, पैर नैऋत्य कोण यानी दक्षिण-पश्चिम दिशा में है। इस तरह उनकी भुजाएं पूर्व और उत्तर में हैं।

ब्रह्माजी ने बनाए वास्तु शास्त्र के नियम
कई पुराणों में वास्तु शास्त्र के नियम बताए गए हैं लेकिन इनके बारे में खासतौर से मत्स्य पुराण में बताया गया है। इसके अनुसार वास्तु पुरुष की प्रार्थना पर ही ब्रह्माजी ने वास्तु शास्त्र के नियमों की रचना की थी। इनकी जानकारी पुराणों के जरिये अन्य ग्रंथों से होते हुए आम लोगों तक पहुंची।
18 Purana me ak Matsya Purana में नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन or वास्तु पुरुष की उत्पत्ति
18 Purana me ak Matsya Purana में नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन or वास्तु पुरुष की उत्पत्ति

Matsya Purana: सनातन धर्म के 18  पुराणों में से एक मत्स्य पुराण बेहद महत्वपूर्ण पुराण होती है। जिसमें लगभग 291 अध्याय के साथ 14 हजार श्लोक सम्मिलित हैं। इस पुराण का सीधा संबंध भगवान विष्णु के मत्स्य यानी मछली अवतार से हैं, जिसके कारण ही ये पुराण मत्स्य पुराण के नाम से विख्यात हुई। इस पुराण में महात्म्य के द्वारा भगवान विष्णु ने मत्स्या अवतार में राजा वैवस्वत मनु तथा सप्त ऋषियों को उपदेश दिये थे। 

इन उपदेशों में ही दान-पुण्य, यज्ञ, तप, व्रत, राजधर्म का वर्णन, नवग्रहों के स्वरूपों का वर्णन, स्वप्न शास्त्र, शकुन शास्त्र, ज्योतिष रत्न विज्ञान, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के स्वरूप का वर्णन, वास्तु शास्त्र, तारकासुर आख्यान, नरसिंह वर्णन, ऋषियों के संपूर्ण वंश का वर्णन, आदि का ज्योतिष अनुसार वर्णन किया गया है। ऐसे में आज हम इस लेख के माध्यम से ज्योतिष शास्त्र के सबसे महत्वपूर्ण अंग यानी सभी 9 ग्रहों के स्वरूपों के बारे में जानेंगे, जिनका वर्णन स्वयं भगवान विष्णु ने अपने इस मत्स्य पुराण में किया था।

मत्स्य पुराण में स्पष्ट नवग्रहों के स्वरूप का वर्णन

सूर्य : 

ग्रहों के राजा सूर्यदेव की दो भुजाएं होती हैं और उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। वे स्वयं भी कमल के आसन पर विराजमान रहते हैं। उनकी आभा कमल के भीतरी भाग की भांति हैं। साथ ही वे सात घोड़ों एवं सात रस्सियों से जुते एक विशाल व भव्य रथ पर आरूढ़ रहते हैं। 

चंद्रमा : 

चंद्रमा गौरवर्ण हैं अर्थात उनकी काया सुंदर व रंग गोरा है। उनकी दो भुजाएं हैं और उनके एक हाथ में गदा और दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है। वे सदैव श्वेत/ सफ़ेद वस्त्र धारण करते हैं। उनका वाहन अश्वयुक्त रथ है और उनके अश्वों का रंग भी श्वेत है। 

मंगल : 

मंगल की चार भुजाएं होती हैं और उनके चारों हाथों में क्रमश: शक्ति, त्रिशूल, गदा एवं वरद मुद्रा है। उनके शरीर के रोएं का रंग लाल हैं। मंगल लाल रंग की पुष्पमाला और लाल रंग के वस्त्र धारण करते हैं। 

बुध : 

बुध की चार भुजाएं हैं और उनके चारों हाथों में क्रमश: तलवार, ढाल, गदा और वरद मुद्रा है। वे पीले रंग की पुष्पमाला और पीले वस्त्र धारण करते हैं। उनके शरीर की आभा कनेर के पुष्प की भांति है। बुध देव सिंह की सवारी करते हैं। 

जानें ग्रहों के गोचर का जन्म कुंडली के आधार पर आपके जीवन के विभिन्न मामलों पर होने वाला प्रभाव: हमारे ज्योतिषियों से प्रश्न पूछें !


गुरु बृहस्पति : 

बृहस्पति को समस्त देवताओं के गुरु की उपाधि प्राप्त है, इस कारण इसे गुरु भी कहते हैं। इनकी चार भुजाएं है और चारों हाथों में क्रमश: दंड, रुद्राक्ष की माला, कमंडलु और वरद मुद्रा में है। इनके शरीर का रंग पीला है। वे स्वयं भी पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं। 

शुक्र : 

दानवों के गुरु शुक्राचार्य ही शुक्र हैं, जिनके शरीर का रंग श्वेत है। इनकी भी चार भुजाएं होती है और चारों हाथों में क्रमश: दंड, रुद्राक्ष की माला, कमंडलु और वरमुद्रा है। शुक्र श्वेत रंग के ही वस्त्र धारण करते हैं। 

शनि : 

शनैश्चर यानी शनि की आभा इंद्रनीलमणि (नीले रंग के नीलम मणि/रत्न) के समान है। शनि गृद्ध की सवारी करते हैं। इनकी भी चार भुजाएं है और वे चारों हाथों में क्रमश: धनुष, बाण, त्रिशूल और वरमुद्रा में रहते हैं। 

राहु : 

राहु का मुख अत्यंत भयावह व भयंकर होता है। ये नील रंग के विशालकाय सिंहासन पर विराजित रहते हैं। इनकी चार भुजाएं है और चारों हाथों में क्रमश: तलवार, ढाल, त्रिशूल और वरमुद्रा सुशोभित रहते हैं। 

केतु : 

केतु कोई एक नहीं बल्कि अनेकानेक हैं और उन सबकी दो-दो भुजाएं हैं। वे अपने दोनों हाथों में गदा और वरमुद्रा धारण किए रहते हैं। उनके शरीर और वस्त्रों का रंग धूम्र (धुएँ के रंग की भांति) हैं। उनके मुख विकृत हैं और वे नित्य गृद्ध की सवारी करते हैं।


🔮 Astro Vastu Kosh

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

📌 Daily Panchang | Vedic Astrology | Vastu Guidance | Spiritual Wisdom

💥 👨‍👩‍👧‍👦 आपके एक गलत फैसले का असर केवल आप पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ सकता है। 💥

🛑 सही समय, सही दिशा और सही निर्णय जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। कई बार जल्दबाज़ी, भ्रम या प्रतिकूल समय में लिया गया निर्णय आर्थिक, व्यावसायिक, पारिवारिक और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दैनिक कॉस्मिक एनर्जी (Cosmic Energy), ग्रहों के गोचर, राहुकाल और शुभ-अशुभ समय को समझना अत्यंत आवश्यक है।

🔮 २७+ वर्षों के अनुभव से तैयार सटीक वैदिक पंचांग, दैनिक राशिफल, गोचर विश्लेषण और ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रतिदिन सबसे पहले प्राप्त करने के लिए अभी जुड़ें:

• 🟢 WhatsApp Channel: रोज सुबह सटीक पंचांग, राशिफल और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अपडेट प्राप्त करें।
👉 यहाँ क्लिक करके Follow करें

• 👥 Facebook Page: दैनिक वैदिक ज्ञान, ज्योतिषीय विश्लेषण, राशिफल और विशेष आध्यात्मिक सामग्री के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Like करें

• 💼 LinkedIn: व्यावसायिक एवं रणनीतिक मार्गदर्शन, करियर काउंसिलिंग और कॉरपोरेट वास्तु विश्लेषण के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Connect करें

⚠️ व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श (Paid Consultation)

दैनिक राशिफल और गोचर केवल सामान्य संकेत प्रदान करते हैं, लेकिन आपके जीवन, करियर, व्यापार, धन, विवाह, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।

📿 २७+ वर्षों के अनुभव के साथ गहन, प्रामाणिक और व्यक्तिगत वैदिक ज्योतिषीय परामर्श हेतु:

✍️ Astro Vastu Kosh Newsletter

👉 अपनी ईमेल दर्ज करें और विशेष वैदिक ज्योतिषीय विश्लेषण, गहन लेख तथा परामर्श संबंधी अपडेट प्राप्त करें:
👉 परामर्श प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए यहाँ क्लिक करें


क्या आप अपनी कुंडली या घर का वास्तु दिखाना चाहते हैं?
हमारे Facebook Page से जुड़ें और अपनी समस्याओं का समाधान पाएं।

फेसबुक Page Join करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें