गुप्त नवरात्र के पहले दिन से ही सफलता देने वाले चार मंगलकारी योग गुप्त नवरात्रों में मेघनाथ ने प्राप्त की सिद्धि
गुप्त नवरात्र का व्रत विशेष कामनाओं के लिए रखा जाता है | जिसमें विशेष तरह की इच्छा की पूर्ति तथा सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है. अश्विन और चैत्र माह में आने वाली नवरात्रि में जहां भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना होती है, वहीं, गुप्त नवरात्र में देवी के दस महाविद्या स्वरूप की आराधना भी की जाती है
नहीं होगा किसी तिथि का क्षय 30 जून से 8 जुलाई तक पूरे नौ दिन रहेगी आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र।
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में जहां वामाचार उपासना की जाती है । वहीं माघ मास की गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति को अधिक मान्यता नहीं दी गई है । ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष का विशेष महत्व है।
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित: ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ॥
ऐसा माना जाता है की गुप्ता नवरात्री में साधना करने का प्रत्यक्ष फल मिलता है। ऋषि विश्वामित्र गुप्त नवरात्र में दशमहाविद्याओं की साधना करके अद्भुत शक्तिया प्राप्त की थी। उनकी सिद्धियाँ इतनी प्रबल हो गयी थी की उनोने एक नए संसार का निर्माण क्र दिया था।
जानिए गुप्त नवरात्र के पहले दिन साधना में सफलता देने वाले चार मंगलकारी योग
आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र 30 जून से 8 जुलाई तक रहेगी। इस वर्ष नवरात्र के पहले दिन ही साधना में सफलता देने वाले चार मंगलकारी संयोग बनेंगे। इसमें गुरु-पुष्य, सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और पुष्य नक्षत्र शामिल हैं। इतने संयोग एक साथ घट स्थापना के दिन बनना दुर्लभ संयोग है। इस बार किसी भी तिथि के क्षय न होने से पर्व के दौरान पूरे नौ दिन तंत्र, यंत्र और मंत्र साधना का अवसर रहेगा। साथ ही दस महाविद्याओं का पूजन भी होगा।
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 30 जून सुबह 10.49 बजे और ध्रुव योग सुबह 9.52 बजे तक रहेगा। इस दिन कार्य में सिद्धि देने वाला सर्वार्थ सिद्धि और खरीदी का अक्षय फल प्रदान करने वाला गुरु-पुष्य नक्षत्र भी दिवस पर्यंत रहेगा। नवरात्र का समापन भड़ली नवमी के दिन 8 जुलाई को होगा। इस दिन भी साधना में सिद्धि देने वाला शिव और सिद्धि योग रहेगा। यह दिन स्वयं सिद्ध मुहूर्त में से एक होने के चलते इस दिन बड़ी संख्या में वैवाहिक आयोजन होंगे। नवमी तिथि का समापन शाम 6.25 बजे होगा। इसके बाद नवरात्र का पारणा हो सकेगा।
यंत्र, तंत्र और मंत्र सिद्धि के लिए खास वर्ष में चार नवरात्र आते हैं। इसमें दो प्राकट्य और दो गुप्त नवरात्र हैं। चैत्र और अश्विन माह की नवरात्र को प्रकट नवरात्र माना गया है, जबकि आषाढ़ व माघ माह की नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाती है। चारों नवरात्र में माता के नौ स्वरूपों का पूजन होता है। गुप्त नवरात्र में यंत्र, तंत्र और मंत्र साधना की जाती है। इस दौरान विशेष हवन-अनुष्ठान होते हैं। इस अवसर पर दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।
गुरुवार से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं. गुप्त नवरात्रि का व्रत तंत्र साधना और मंत्रों की सफलता के लिए किया जाता है. गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना को गोपनीय रखा जाता है.
गुरुवार से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
साल में 4 बार नवरात्रि का त्योहार आता है. चैत्र और क्वार मास में पड़ने वाली नवरात्रि के बारे में सामान्यतः सभी लोगों को जानकारी होती है परंतु माघ और आषाढ़ में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि के बारे में कम ही लोगों को इसकी जानकारी होती है. हिंदू धर्म में वासंतीय नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले इन दोनों नवरात्रों में व्रत पूजन करते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं. गुप्त नवरात्रि का व्रत तंत्र साधना और मंत्रों की सफलता के लिए किया जाता है. गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना को गोपनीय रखा जाता है.
इस साल आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि 30 जून दिन गुरुवार से प्रारंभ हो रही है. जो 8 जुलाई तक रहेगी. गुप्त नवरात्रि के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 30 जून दिन गुरुवार को सुबह 5:26 से सुबह 6:45 तक है.
कारोबार में सफलता प्राप्त करने के लिए, नौकरी में पदोन्नति पाने के लिए मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं. 9 बतासे पर दो-दो लौंग रखकर एक-एक करके मां दुर्गा को अर्पित करें. यह उपाय करने से मां दुर्गा प्रसन्न होंगी और मनोकामना की पूर्ति होगी.
विवाह संबंधी अड़चन को दूर करने के लिए मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं. उन्हें हर रात्रि लाल फूलों की माला चढ़ाएं. ऐसा करने से विवाह संबंधी समस्या का समाधान होगा.
गुप्त नवरात्रि में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घर में सोने या चांदी के सिक्के लाएं या सोने चांदी के जेवर बनवा कर लाएं. ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
गुप्त नवरात्रि में प्रातः काल स्नान करके हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाने से संकट मोचन बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है. तंत्र साधना में सफलता प्राप्त होती है.
गुप्त नवरात्रि की कथा
गुप्त नवरात्रों के बारे में एक प्राचीन कथा प्रचलित है, एक बार जब श्रृंगी ऋषि अपने भक्तो को दर्शन दे रहे थे तब अचानक भीड़ में से एक स्त्री निकल कर आई और करबद्ध होकर ऋषि श्रृंगी से बोली ! मेरे पति बुरी आदतों से हमेशा घिरे रहते हैं, जिस कारण मैं कोई पूजा-पाठ नहीं कर पाती धर्म और भक्ति से जुड़े कार्य भी नहीं कर पाती और में दान धरम एवं ऋषि मुनियो को उनके हिस्से का अन्न भी दान नहीं कर पाती मेरा पति मांसाहारी और जुआरी है।
लेकिन मैं मां दुर्गा कि सेवा करना चाहती हूं। उनकी भक्ति साधना से जीवन को पति सहित सफल बनाना चाहती हूं। ऋषि श्रृंगी महिला के भक्तिभाव से बहुत प्रभावित हुए। ऋषि ने उस स्त्री को आदरपूर्वक उपाय बताते हुए कहा कि वासंतिक और शारदीय नवरात्रों से तो आम जनमानस परिचित है लेकिन इसके अतिरिक्त दो नवरात्र और भी होते हैं । जिन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है प्रकट नवरात्रों में नौ देवियों की उपासना हाती है और गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है । इन नवरात्रों की प्रमुख देवी स्वरुप का नाम सर्वैश्वर्यकारिणी देवी है । यदि इन गुप्त नवरात्रों में कोई भी भक्त माता दुर्गा की पूजा साधना करता है तो माँ उसके जीवन को सफल कर देती हैं ।
गुप्त नवरात्री में हर कोई साधना कर सकता है चाहे वो मांसाहारी, कामी, लोभी, और पूजा पाठ नहीं करने वाला भी क्यों न हो। गुप्त नवरात्रों में माता की पूजा जो कोई भी करता है और सिद्धि प्राप्त कर लेता है फिर उसको उसके जीवन में कुछ और करने की आवश्यकता ही नहीं होती। स्त्री ने ऋषि श्रृंगी के बात पर पूर्ण श्रद्धा रखते हुए गुप्त नवरात्र की पूजा करी और माता रानी उससे प्रसन्न हो गयी। उसके जीवन में परिवर्तन आने लगा, घर में सुख शांति आयी। पति अच्छे मार्ग पर आ गया और जीवन माता की कृपा से श्रेश्ट हो गया। यदि आप भी एक या कई तरह के दुर्व्यसनों से ग्रस्त हैं और आपकी इच्छा है कि माता की कृपा से जीवन में सुख समृद्धि आए तो गुप्त नवरात्र की साधना अवश्य करें ।
गुप्त नवरात्रि के तांत्रिक उपाय
तंत्र और शाक्त मतावलंबी साधना की दृष्टि से गुप्त नवरात्र के समय को बहुत सिद्धि दायक माना जाता हैं। गुप्त नवरात्र को माँ वैष्णो देवी, पराम्बा देवी एवं कामाख्या देवी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंगलाज देवी की सिद्धि के लिए भी इस समय को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार दस महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए ऋषि विश्वामित्र और ऋषि वशिष्ठ ने बहुत प्रयत्न किए थे लेकिन उन्हें सिद्धि प्राप्त नहीं हुयी। लेकिन वृहद काल गणना और ध्यान की स्थिति में उन्हें यह ज्ञान हुआ की गुप्त नवरात्रों में शक्ति के दस स्वरूपों को सिद्ध किया जा सकता है।
कैसे गुप्त नवरात्रों में मेघनाथ ने प्राप्त की सिद्धि
शुक्राचार्य ने मेघनाद को बताया था कि गुप्त नवरात्रों में यदि वह अपनी कुल देवी निकुम्बाला कि साधना करता है तो वह अजय-अमर बनाने वाली शक्तियों का स्वामी बन सकता है, दशानन रावण के पुत्र मेघनाद ने शक्तियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्र में साधना की, फिर जब भगवान श्री राम और दशानन रावण का युद्ध हुआ तब युद्ध के समय केवल मेघनाद ने ही भगवान राम एवं उनके भाई लक्ष्मण जी को नागपाश मे बांध कर मृत्यु के द्वार तक पहुंचा दिया था। ऐसा माना जाता है, यदि नास्तिक व्यक्ति भी गुप्त नवरात्री के समय मंत्र साधना कर लेता है, तो उसको भी इसका फल प्राप्त होता है और जीवन में सफलता मिलती है।
गुप्त नवरात्रि का रहस्य
गुप्त नवरात्र में ज्यादातर मंत्र साधना का महत्व है। आज के समय में व्यस्त जीवन के कारण यदि आपके पास समय की कमी है तो गुप्त नवरात्री आपके लिए माता रानी का उपहार ही समझिये क्योकि गुप्त नवरात्र में आप कुछ जरूरी नियमो का पालन करते हुए आप मंत्र साधना कर सकते है। गुप्त नवरात्र में की गयी साधना को गुप्त रूप से करना बहुत आवश्यक है। गुप्त रूप से की गयी साधना बहुत फलकारी होती है। गुप्त नवरात्र में आपको किसी मंदिर जाने की आवश्यकता नहीं है घर पर रह कर आप मंत्र साधना प्राप्त कर सकते है। यह समय गुप्त एवं चमत्कारिक शक्तिया प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा माना गया है।
गुप्त नवरात्रि के पीछे का व्यावहारिक (Practical) दृष्टिकोण
धार्मिक दृष्टिकोण तो ज्यादातर सभी जानते हैं। दरअसल इस शक्ति साधना के पीछे छुपा व्यावहारिक पक्ष (practical view) यह है कि नवरात्र के समय ऋतू परिवर्तन होता है। आयुर्वेद के मुताबिक इस बदलाव से जहां शरीर में वात, पित्त, कफ में दोष पैदा होते हैं, वहीं बाहरी वातावरण में रोगाणु पनपते है जो की विभिन्न प्रकार की बीमारियों का कारण बनते हैं सुखी-स्वस्थ जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत आवश्यक है नवरात्र के विशेष समय में देवी उपासना के माध्यम से खान-पान, रहन-सहन और देव स्मरण करने पर संयम और अनुशासन तन व मन को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता हैं जिससे इंसान निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्र में प्रमुख रूप से भगवान शंकर व देवी शक्ति की आराधना की जाती है।
देवी दुर्गा शक्ति का साक्षात स्वरूप है दुर्गा शक्ति में दमन का भाव भी जुड़ा है । यह दमन या अंत होता है शत्रु रूपी दुर्गुण, दुर्जनता, दोष, रोग या विकारों का ये सभी जीवन में अड़चनें पैदा कर सुख-चैन छीन लेते हैं । यही कारण है कि देवी दुर्गा के कुछ खास और शक्तिशाली मंत्रों का देवी उपासना के विशेष काल में जाप शत्रु, रोग, दरिद्रता रूपी भय बाधा का नाश करने वाला माना गया है सभी नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक किए जाने वाले पूजन, जाप और उपवास का प्रतीक है नव शक्ति समायुक्तां नवरात्रं तदुच्यते। देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं।
गुप्त नवरात्रि के फायदे
नवरात्र के नौ दिनों तक श्रद्धा एवं भक्ति का माहौल होता है। गुप्त नवरात्र के अनेक फायदे है, धार्मिक आस्था के साथ-साथ नवरात्र लोगो को एकता, सौहार्द, भाईचारा सिखाती है। मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधना के समय नहीं हैं। श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख व अक्षय ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है "दुर्गावरिवस्या" नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में जो नवरात्र माघ के महीने में आता है उसमे व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक बल प्रदान होता हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख एवं सम्रद्धी प्राप्त होती हैं। शिवसंहिता के अनुसार ये नवरात्र भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए भी सर्वश्रेष्ट हैं। गुप्त नवरात्रों के साधनाकाल में मां शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से जीवन में आ रही सभी बाधाएं नष्ट होने लगती हैं।
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम् ।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥


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