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सोमवार, 1 अगस्त 2022

नाग पंचमी पर बन रहा दुर्लभ संयोग जाने कालसर्प दोष शांति का शुभ मुहुर्त

Nag Panchami 2022 : नाग पंचमी पर बन रहा दुर्लभ संयोग जाने कालसर्प दोष शांति का शुभ मुहुर्त 

नाग पंचमी पर बन रहा दुर्लभ संयोग जाने कालसर्प दोष शांति का शुभ मुहुर्त
नाग पंचमी पर बन रहा दुर्लभ संयोग जाने कालसर्प दोष शांति का शुभ मुहुर्त 


नाग पंचमी के दिन बन रहे बेहद शुभ संयोग 

इस बार नागपंचमी पर शुभ फल देने वाले सूर्योदय से उ.फा. नक्षत्र लगेगा जो कि सांय 5:29 बजे तक तदोपरान्त हस्त नक्षत्र आरम्भ होगा एवं विशेष "शिव योग" सांय 6:36 बजे तक तदोपरांत "सिद्ध योग" आरम्भ होगा। इस दिन कन्या के चन्द्र के विशेष योग में नागपंचमी मनायी जायेगी। कालसर्प दोष निवारण के लिए यह विशिष्ट दिन है। नागपंचमी के सिद्ध मुहुर्त प्रात: 9:07 बजे से अपराह्ण 2:04 बजे तक चर लाभ,अमृत के चौघड़िया,अपराह्न 3:46 बजे से सांय 5:24 बजे तक शुभ के चौघड़िया में कालसर्प दोष शांति कराना अति उत्तम रहेगा। वर्ष के मध्य में कालसर्प योग जिस समय बने उस समय अनुष्ठान भी सर्वश्रेष्ठ रहता है। *कालसर्प योग यज्ञ का आरम्भ या समाप्ति पंचमी, अष्टमी,दशमी या चुतुर्दशी तिथि वार चाहें जो भी हो,भरणी,आद्रा, पुनर्वसु, पुष्य,आश्लेषा,उत्तराषाढ़ा,अभिजित एवं श्रवण नक्षत्र श्रेष्ठ माने जाते हैं। परन्तु जातक की राशि से ग्रह गणना का विचार करना परम आवश्यक होता है।

पुराणों के अनुसार 

अग्नि पुराण में लगभग 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन मिलता है, जिसमें अनन्त, वासुकी, पदम, महापध, तक्षक, कुलिक, कर्कोटक और शंखपाल यह प्रमुख माने गये हैं। स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण तथा कूर्मपुराण में भी इनका उल्लेख मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहू के जन्म नक्षत्र "भरणी" के देवता काल हैं एवं केतु के जन्म नक्षत्र ' 'अश्लेषा के देवता सर्प हैं। अत: राहू-केतु के जन्म नक्षत्र देवताओं के नामों को जोड़कर "कालसर्प योग" कहा जाता है। राशि चक्र में 12 राशियां हैं, जन्म पत्रिका में 12 भाव हैं एवं 12 लग्न हैं। इस तरह कुल 144 = 288 कालसर्प योग घटित होते हैं। 

नागपंचमी के त्योहार पर अनन्त, वासुकि, शेष, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शङ्खपाल, कालिया, तक्षक, पिङ्गल कुल 12 नाग देवताओं की पूजा की जाती है।

इस बार कालसर्प दोष शांति का मिलेगा विशेष फल क्योंकि नागपंचमी के दिन "शिव योग" बन रहा है। ऐसे में काल सर्प दोष दूर करने के लिए जानें सबसे सही मुहुर्त क्या है। 

इस बार नाग पंचमी होगी विशेष नाग पंचमी 2022 शुभ मुहूर्त

पंचमी तिथि प्रारम्भ: 2 अगस्त, 2022 को सुबह 05 बजकर 14 मिनट से.

पंचमी तिथि समापन: 3 अगस्त, 2022 को सुबह 05 बजकर 42 मिनट पर.

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त: 2 अगस्त 2022 को प्रात: 05 बजकर 42 मिनट से 08 बजकर 24 मिनट तक.

मुहूर्त की अवधि: 02 घण्टे 41 मिनट.

नाग पंचमी का महत्व 

विधान से नाग देवता की पूजा- अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नागों को भी देवता के रूप में पूजा जाता है। नाग भगवान शिव को भी बहुत अधिक प्रिय होते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोषों से मुक्ति मिल जाती है।

नाग देवता को घर का रक्षक भी माना जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है।

नाग पंचमी पूजा- विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।

स्नान के पश्चात घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

इस पावन दिन शिवलिंग पर जल जरूर अर्पित करें।

नाग देवता का अभिषेक करें।

नाग देवता को दूध का भोग लगाएं।

भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश को भी भोग लगाएं।

नाग देवता की आरती करें।

अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी करें।

नाग पंचमी पूजा सामग्री-

नाग देवता की प्रतिमा या फोटो, दूध, पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।

Nag Panchami 2022: नाग देवता की पूजा करते समय अपनी राशि के अनुसार, मंत्रों का जाप किया जाता है तो दोगुने फल प्राप्त होता है। तो आइये जानते हैं किस राशि के जातक को कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?

मेष राशि-    ॐ गिरी नम:

वृषभ राशि-  ॐ भूधर नम:

मिथुन राशि-  ॐ व्याल नम:

कर्क राशि-    ॐ काकोदर नम:

सिंह राशि-     ॐ सारंग नम:

कन्या राशि-    ॐ भुजंग नम:

तुला राशि-     ॐ महिधर नम:

वृश्चिक राशि-   ॐ विषधर नम:

धनु राशि-      ॐ अहि नम:

मकर राशि-     ॐ अचल नम:

कुंभ राशि-     ॐ नगपति नम:

मीन राशि-     ॐ शैल नम:

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