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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

Diwali - सूर्य ग्रहण का साया होने से कब करें लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन और भाई दूज

Diwali - सूर्य ग्रहण का साया होने से कब करें धनतेरस, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन और भाई दूज जानें विस्तार से

Diwali - सूर्य ग्रहण का साया होने से कब करें लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन और भाई दूज
Diwali - सूर्य ग्रहण का साया होने से कब करें लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन और भाई दूज 


दीपावली 2022 पर साल का आखिरी सूर्य ग्रहण का असर

इस साल सूर्य ग्रहण और तिथियों के कारण दिवाली का पांच दिवसीय त्योहार छह दिन का हो गया है. अधिकतर जगहों पर धनतेरस 22 अक्टूबर को है तो कुछ जगहों पर 23 अक्टूबर को धनतेरस मनाने की तैयारी है. ऐसे में 22 और 23 अक्टूबर दोनों दिन धनतेरस मनाया जाएगा. 25 को सूर्य ग्रहण की वजह से गोवर्धन पूजा दिवाली के दूसरे दिन है और भाई दूज तीसरे दिन है. तिथियों और सूर्य ग्रहण के कारण लोगों में छोटी दिवाली, यम के लिए दीपक, नर​क चतुर्दशी, हनुमान जयंती, काली चौदस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीखों को लेकर उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. आइए जानते हैं इन त्योहारों की सही तारीख.

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में धनतेरस की पूजा करना शास्त्र सम्मत है. इस वजह से ही 22 अक्टूबर को धनतेरस मनाना उचित है. इस दिन ही धनतेरस की खरीदारी करनी चाहिए. 22 अक्टूबर को त्रयोदशी तिथि शाम 06:02 बजे से लेकर 23 अक्टूबर को शाम 06:03 बजे तक है.

इस साल दिवाली का त्योहार 22 अक्टूबर से धनतेरस से प्रारंभ हो रहा है और यह 27 अक्टूबर को भाई दूज के साथ खत्म होगा. 24 को दिवाली है और अगले दिन सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा नहीं होगी, वह दूसरे दिन 26 अक्टूबर को होगी. ऐसे ही भाई दूज भी इस इस साल दिवाली के दूसरे दिन न होकर तीसरे दिन 27 अक्टूबर को है. इस तरह से दिवाली का त्योहार 5 दिन के बजाय 6 दिन का होगा.

दिवाली 2022 किस दिन मनाये कौन सा त्योहार

धनतेरस 2022: 22 अक्टूबर दिन शनिवार

धन्वंतरि जयंती 2022: 22 अक्टूबर दिन शनिवार, भगवान धन्वंतरी की पूजा इसी दिन होगी.

शनि प्रदोष 2022: 22 अक्टूबर

यम दीपक 2022: 22 अक्टूबर दिन शनिवार को शाम में और 23 अक्टूबर को भी

नरक चतुर्दशी 2022: 23 अक्टूबर दिन रविवार

छोटी दिवाली 2022: 23 अक्टूबर दिन रविवार

हनुमान जयंती 2022: 23 अक्टूबर दिन रविवार, हनुमान जी का दर्शन अगले दिन सुबह

काली चौदस 2022: 23 अक्टूबर दिन रविवार

दिवाली 2022: 24 अक्टूबर दिन सोमवार

सूर्य ग्रहण 2022: 25 अक्टूबर दिन मंगलवार

गोवर्धन पूजा 2022 या अन्नकूट 2022: 26 अक्टूबर दिन बुधवार

भाई दूज 2022: 27 अक्टूबर दिन गुरुवार

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भारत में खण्डग्रास सूर्यग्रहण

ग्रस्तास्त खण्डग्रास सूर्यग्रहण (25 अक्तूबर, 2022 ई. कार्तिक अमावस, मंगलवार)

यह खण्डग्रास सूर्यग्रहण लगभग सम्पूर्ण भारत में (असम राज्य के गुवाहाटी नगर से दाईं ओर तथा मेघालय राज्य के नलबारी नगर के दाईं ओर के सभी क्षेत्र/राज्यों को छोड़कर) ग्रस्तास्त खण्ड ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। अर्थात् पूर्वी भारत को छोड़कर समस्त भारत में यह ग्रस्तास्त रूप में ही देखा जा सकेगा। दूसरे शब्दों में भारत में ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति) होने से पहिले ही सूर्यास्त हो जाएगा। भूगोल पर इस ग्रहण का समय भा. स्टैं.टा. अनुसार इस प्रकार होगा

ग्रहण प्रारम्भ *ग्रहण मध्य (परमग्रास) ग्रहण समाप्त

"ग्रहण का ग्रासमान 0.861, ग्रहण की अवधि - 4र्ष-03 मिं.] =

जबकि भारत में इस खण्ड ग्रहण की व्याप्ति 16:15 से 18:15 (भा. स्टैं.य.) तक रहेगी। भारत के प्रसिद्ध 250 से भी अधिक नगरों में इस ग्रहण का स्पर्श (प्रारम्भ), मध्य तथा मोक्ष (समाप्ति) काल (भा.स्.टा.)

भारत में यह ग्रहण ग्रस्तास्त है, अतः सूर्यास्त ही इस ग्रहण का समाप्तिकाल होगा।

सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को मंगलवार के दिन तुला राशि में लगने जा रहा है। यह सूर्यग्रहण भारत में दिखने वाला पहला सूर्यग्रहण होगा। यह सूर्य ग्रहण 4 घंटे 3 मिनट तक रहेगा।

आइए जानते हैं सूर्यग्रहण का समय, परमग्रास और सूतक का समय विस्तार से।

सूर्यग्रहण का समय 25 अक्टूबर 2022

सूर्य ग्रहण का प्रारंभ दोपहर में 2 बजकर 29 मिनट।

सूर्य ग्रहण का मध्य काल शाम 4 बजकर 30 मिनट।

ग्रहण समाप्त शाम को 6 बजकर 32 मिनट पर।

सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 3 मिनट है।

भारत में सूर्यग्रहण का मोक्ष होने से पहले ही सूर्यास्त हो जाएगा। इसलिए भारत में सूर्यास्त ही सूर्यग्रहण का मोक्ष माना जाएगा।

सूर्यग्रहण के बाद क्या करें

सूर्यग्रहण लगभग पूरे भारत में दिखाई देगा। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, सूर्यग्रहण के तुरंत बाद लोगों को स्नान करने के बाद जप और पूजा पाठ करना चाहिए। इसके अलावा कार्तिक मास की अमावस्या को सूर्य ग्रहण घटित होने से इस दिन तीर्थ स्नान, दान करने का विशेष महत्व होगा। शास्त्रों में बताया गया है कि इस तरह की गतिविधियों के बाद मनुष्य का शरीर अपवित्र हो जाता है। इसलिए स्नान करना बेहद जरूरी होता है। दरअसल, धार्मिक मान्यताएं कहती है कि सूर्य ग्रहण राहु और केतु के कारण लगता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।

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