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शनिवार, 25 नवंबर 2023

Baikuntha Chaturdashi: कब है बैकुंठ चतुर्दशी 25 या 26 नवंबर जाने ज्योतिषविद् से शुभ मुहूर्त महत्व - पूजाविधि और उपाय

कब है बैकुंठ चतुर्दशी 25 या 26 नवंबर जाने ज्योतिषविद् से शुभ मुहूर्त महत्व - पूजाविधि और उपाय
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Baikuntha Chaturdashi: कब है बैकुंठ चतुर्दशी 25 या 26 नवंबर जाने ज्योतिषविद् से शुभ मुहूर्त महत्व - पूजाविधि और उपाय


इस साल 25 नवंबर 2023 को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि श्रीहरि और देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना से स्वर्ग-लोक की प्राप्ति होती है


हिंदू धर्म में बैकुंठ चतुर्दशी के दिन शिवजी और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। हर साल कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। इस साल 26 नवंबर 2023 को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि श्रीहरि और देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना से स्वर्ग-लोक की प्राप्ति होती है और जातक के सभी दुख दूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं बैंकुठ चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजाविधि और उपाय…

बैकुंठ चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, 25 नवंबर 2023 को शाम 5:22 पीएम पर कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा और 26 नवंबर को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगा। विष्णुजी की पूजा निशिता काल में की जाती है। इसलिए इस साल 26 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी मनाया जाएगा।

धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन विष्णुजी निद्रा योग से जागते हैं और बैंकुठ चतुर्दशी के दिन शिवजी ने उन्हें ब्रह्मांड संभालने का कार्यभार सौंपा था। इसलिए इस शुभ दिन पर विष्णुजी और शिवजी की पूजा-उपासना का बड़ा महत्व है।

बैकुंठ चतुर्दशी कथा 

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, एक बार श्री हरि विष्णु भोलेनाथ की पूजा करने के लिए काशी पहुंचे थे। गंगा में स्नान करने के बाद उनके मन में शिव जी को एक हजार स्वर्ण कमल पुष्प अर्पित करने की इच्छा उत्पन्न हुई। पूजा के दौरान भगवान विष्णु ने पाया कि एक फूल की संख्या कम थी। कहा जाता है, इस पुष्प को भगवान शिव विष्णु जी की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए छिपा दिया था, जब भगवान विष्णु को वह कमल का फूल नहीं मिला, तो उन्होंने अपनी एक आंख भोलेनाथ को भेंट करने की सोची।

भगवान विष्णु जी का नेत्र चढ़ाना 


क्योंकि नारायण की आंखों को कमल नयन भी कहा जाता है। जैसे ही भगवान विष्णु अपनी आंख चढ़ाने ही वाले थे, वैसे ही भगवान शिव प्रकट हो गए। और उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। अपने प्रति श्री हरि का प्रेम देखकर भोलेबाबा बहुत प्रसन्न हुए।

भगवान विष्णु जी को सुदर्शन चक्र मिलना 


इसके पश्चात भगवान शिव ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया और कहा, कि जो भक्त इस पवित्र दिन पर भगवान विष्णु की पूजा करेगा, वो सीधे उनके निवास स्थान यानी बैकुंठ धाम जाएगा। तभी से बैकुंठ चतुर्दशी को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है

इसके साथ ही विष्णुजी की कृपा पाने के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें।

धन लाभ के उपाय:

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन विष्णुजी को बेलपत्र अर्पित करें और अगले दिन इसे अपनी तिजोरी में रख लें। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की तंगी दूर होती है और आय के साधनों में वृद्धि होती है।

सुख-समृद्धि के उपाय: 

इस शुभ दिन शिवजी का मंत्र ऊँ नमः शिवाय और ऊँ अं वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करना बेहद मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में खुशियां आती हैं।

जीवन में तरक्की के उपाय: 

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन शिवजी को तुलसी दल अर्पित कर सकते हैं। यह एकमात्र ऐसा दिन है, जब शिवजी को तुलसी का पत्ता अर्पित करना शुभ माना जाता है।
Offering the eyes of Lord Vishnu?

Because Narayan's eyes are also called lotus eyes. Just as Lord Vishnu was about to offer his eyes, Lord Shiva appeared. And stopped them from doing so. Bhole Baba was very happy to see Shri Hari's love for him..

Lord Vishnu receiving Sudarshan Chakra?

After this, Lord Shiva presented him with Sudarshan Chakra and said that the devotee who worships Lord Vishnu on this holy day will go straight to his abode i.e. Baikunth Dham. Since then Baikunth Chaturdashi has been celebrated with great devotion..

This is the only day when Tulsi leaf is offered to Lord Shiva?

Ways to progress in life: You can offer Tulsi Dal to Lord Shiva on the day of Baikunth Chaturdashi. This is the only day when offering Tulsi leaves to Lord Shiva is considered auspicious..


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