Breaking

✨ "विपरीत परिस्थितियां कुछ लोगों को तोड़ देती हैं, और कुछ लोगों को रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार करती हैं" — अक्षय जमदग्नि ... 🌟 "आपका भविष्य आपके आज के फैसलों पर निर्भर करता है, ग्रहों की चाल को अपने पुरुषार्थ से बदलें" ... 🚀 "वास्तु सुधारेगा परिवेश, और विचार बदलेंगे आपका भविष्य" ... 💎 "Astro Vastu Kosh: जहाँ ज्ञान, ऊर्जा और प्रेरणा मिलते हैं" ...

🕉️ Astro Vastu Kosh 🔱

ज्योतिष | वास्तु | अंक ज्योतिष

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

27+ वर्षों का अनुभव | वैदिक ज्योतिष | वास्तु परामर्श | अंक ज्योतिष

गुरुवार, 7 अप्रैल 2022

नवरात्रि का सातवाँ दिन माँ कालरात्रि की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी

नवरात्रि का सातवाँ दिन माँ कालरात्रि की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी

नवरात्रि का सातवाँ दिन माँ कालरात्रि की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी
नवरात्रि का सातवाँ दिन माँ कालरात्रि की पूजा का विधानऔर अन्य महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी


माँ कालरात्रि - नवरात्रि का सातवाँ दिन


माता कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है। इन्हें देवी पार्वती के समतुल्य माना गया है। देवी के नाम का अर्थ- काल अर्थात् मृत्यु/समय और रात्रि अर्थात् रात है। देवी के नाम का शाब्दिक अर्थ अंधेरे को ख़त्म करने वाली है।

माता कालरात्रि का स्वरूप

देवी कालरात्रि कृष्ण वर्ण की हैं। वे गधे की सवारी करती हैं। देवी की चार भुजाएँ हैं, दोनों दाहिने हाथ क्रमशः अभय और वर मुद्रा में हैं, जबिक बाएँ दोनों हाथ में क्रमशः तलवार और खडग हैं।

पौराणिक मान्यताएँ

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुंभ और निशुंभ नामक दो दानव थे जिन्होंने देवलोक में तबाही मचा रखी थी। इस युद्ध में देवताओं के राजा इंद्रदेव की हार हो गई और देवलोक पर दानवों का राज हो गया। तब सभी देव अपने लोक को वापस पाने के लिए माँ पार्वती के पास गए। जिस समय देवताओं ने देवी को अपनी व्यथा सुनाई उस समय देवी अपने घर में स्नान कर रहीं थीं, इसलिए उन्होंने उनकी मदद के लिए चण्डी को भेजा।

जब देवी चण्डी दानवों से युद्ध के लिए गईं तो दानवों ने उनसे लड़ने के लिए चण्ड-मुण्ड को भेजा। तब देवी ने माँ कालरात्रि को उत्पन्न किया। तब देवी ने उनका वध किया जिसके कारण उनका नाम चामुण्डा पड़ा। इसके बाद उनसे लड़ने के लिए रक्तबीज नामक राक्षस आया। वह अपने शरीर को विशालकाय बनाने में सक्षम था और उसके रक्त (खून) के गिरने से भी एक नया दानव (रक्तबीज) पैदा हो रहा था। तब देवी ने उसे मारकर उसका रक्त पीने का विचार किया, ताकि न उसका खून ज़मीन पर गिरे और न ही कोई दूसरा पैदा हो।

माता कालरात्रि को लेकर बहुत सारे संदर्भ मिलते हैं। आइए हम उनमें से एक बताते हैं कि देवी पार्वती दुर्गा में कैसे परिवर्तित हुईं? मान्यताओं के मुताबिक़ दुर्गासुर नामक राक्षस शिव-पार्वती के निवास स्थान कैलाश पर्वत पर देवी पार्वती की अनुपस्थिति में हमला करने की लगातार कोशिश कर रहा था। इसलिए देवी पार्वती ने उससे निपटने के लिए कालरात्रि को भेजा, लेकिन वह लगातार विशालकाय होता जा रहा था। तब देवी ने अपने आप को भी और शक्तिशाली बनाया और शस्त्रों से सुसज्जित हुईं। उसके बाद जैसे ही दुर्गासुर ने दोबारा कैलाश पर हमला करने की कोशिश की, देवी ने उसको मार गिराया। इसी कारण उन्हें दुर्गा कहा गया।

देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मंत्र

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

प्रार्थना मंत्र

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥


स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान मंत्र

करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिम् करालिंका दिव्याम् विद्युतमाला विभूषिताम्॥
दिव्यम् लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम्॥
महामेघ प्रभाम् श्यामाम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

स्त्रोत

हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कवच मंत्र

ऊँ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनाम् पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

चैत्र नवरात्रि की सप्तमी की ढेरों शुभकामनाएँ!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🔮 Astro Vastu Kosh

Strategic Clarity by Akshay Jamdagni

📌 Daily Panchang | Vedic Astrology | Vastu Guidance | Spiritual Wisdom

💥 👨‍👩‍👧‍👦 आपके एक गलत फैसले का असर केवल आप पर नहीं, पूरे परिवार पर पड़ सकता है। 💥

🛑 सही समय, सही दिशा और सही निर्णय जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। कई बार जल्दबाज़ी, भ्रम या प्रतिकूल समय में लिया गया निर्णय आर्थिक, व्यावसायिक, पारिवारिक और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए दैनिक कॉस्मिक एनर्जी (Cosmic Energy), ग्रहों के गोचर, राहुकाल और शुभ-अशुभ समय को समझना अत्यंत आवश्यक है।

🔮 २७+ वर्षों के अनुभव से तैयार सटीक वैदिक पंचांग, दैनिक राशिफल, गोचर विश्लेषण और ज्योतिषीय मार्गदर्शन प्रतिदिन सबसे पहले प्राप्त करने के लिए अभी जुड़ें:

• 🟢 WhatsApp Channel: रोज सुबह सटीक पंचांग, राशिफल और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अपडेट प्राप्त करें।
👉 यहाँ क्लिक करके Follow करें

• 👥 Facebook Page: दैनिक वैदिक ज्ञान, ज्योतिषीय विश्लेषण, राशिफल और विशेष आध्यात्मिक सामग्री के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Like करें

• 💼 LinkedIn: व्यावसायिक एवं रणनीतिक मार्गदर्शन, करियर काउंसिलिंग और कॉरपोरेट वास्तु विश्लेषण के लिए जुड़ें।
👉 यहाँ क्लिक करके Connect करें

⚠️ व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श (Paid Consultation)

दैनिक राशिफल और गोचर केवल सामान्य संकेत प्रदान करते हैं, लेकिन आपके जीवन, करियर, व्यापार, धन, विवाह, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए व्यक्तिगत जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।

📿 २७+ वर्षों के अनुभव के साथ गहन, प्रामाणिक और व्यक्तिगत वैदिक ज्योतिषीय परामर्श हेतु:

✍️ Astro Vastu Kosh Newsletter

👉 अपनी ईमेल दर्ज करें और विशेष वैदिक ज्योतिषीय विश्लेषण, गहन लेख तथा परामर्श संबंधी अपडेट प्राप्त करें:
👉 परामर्श प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए यहाँ क्लिक करें


क्या आप अपनी कुंडली या घर का वास्तु दिखाना चाहते हैं?
हमारे Facebook Page से जुड़ें और अपनी समस्याओं का समाधान पाएं।

फेसबुक Page Join करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें